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गर परिषद को आर्थिक क्षति पहुंचाने के मामले में तीन पूर्व कार्यकारी अधिकारी दोषी करार
Updated Fri, 31 Aug 2018 10:26 PM IST
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नगर परिषद को आर्थिक क्षति पहुंचाने में तीन पूर्व कार्यकारी अधिकारी पाए दोषी
व्यवसायिक प्लाटों की नीलामी में कथित घोटाले की जांच रिपोर्ट सरकार को सौंपी
अमर उजाला ब्यूरो
अबोहर। करीब 8 वर्ष पूर्व नगर परिषद की ओर से नई सड़क के किनारे की गई व्यवसायिक प्लाटों की नीलामी में कथित घोटाले की जांच रिपोर्ट सेवानिवृत्त वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डॉ. आरसी नैयर ने सरकार को सौंप दी है। जिसमें नगर परिषद के तीन पूर्व कार्यकारी अधिकारी दोषी पाए गए।
यह कथित घोटाला पूर्व भाजपा विधायक डा. राम कुमार गोयल के पुत्र शिवराज गोयल के परिषद प्रधान के कार्यकाल में हुआ। सेवानिवृत्त नगर परिषद कर्मचारी संगठन की शिकायत पर पंजाब सरकार ने प्रारंभिक जांच विजिलेंस ब्यूरो से कराई थी। ब्यूरो ने क्लर्क जसपाल सिंह व तत्कालीन अध्यक्ष शिवराज गोयल के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज कराए थे। जिन्हें अदालत ने जमानत दे दी। हालांकि ब्यूरो ने जांच में नगर परिषद के पूर्व कार्यकारी अधिकारियों के खिलाफ कोई टिप्पणी नहीं की। लेकिन बीते फरवरी माह में पंजाब सरकार सेवा नियमों के तहत इनके खिलाफ जांच का कार्य डा. आरसी नैयर को सौंपा गया। जिसमें सभी पूर्व कार्यकारी अधिकारियों ने स्वयं को निर्दोष बताया। नैयर ने पांच पन्नों की जांच रिपोर्ट में कहा है कि प्लाटों की नीलामी की शर्तें षड्यंत्र पूर्वक बाद मेें बदल दी गईं। जिससे परिषद को भारी आर्थिक नुकसान हुआ। शर्तों में मूलरूप से लिखा था कि सफल बोलीदाता शेष राशि पर 18 प्रतिशत ब्याज अदा करेंगे और कोने वाले प्लाट के लिए 10 प्रतिशत अतिरिक्त राशि वसूली जाएगी। अगर कोई बोलीदाता बाद में किसी अन्य को प्लाट बेचेगा तो 3 प्रतिशत हस्तांतरण शुल्क वसूला जाएगा। लेकिन बाद में इन शर्तों में तब्दीली कर दी गई। गवाही के दौरान सेवानिवृत्त क्लर्क रविंद्र सिंह ने इस बात की पुष्टि की कि 20 अगस्त 2010 को हुई नीलामी के सफल बोलीदाताओं से पुरानी शर्तों के अनुसार वसूली की गई। जांच में सामने आया कि कि शर्तों में फेरबदल के जो दस्तावेज तैयार किए उस पर प्रधान शिवराज गोयल व तत्कालीन कार्यकारी अधिकारी जगसीर सिंह के हस्ताक्षर थे। इसलिए ड्यूटी में लापरवाही और कोताही बरतने के अलावा नगर परिषद को वित्तीय हानि पहुंचाने के लिए पूर्व कार्यकारी अधिकारियों जगसीर सिंह, भूषण सिंह राणा और भूषण अग्रवाल को दोषी ठहराया गया है।
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व्यवसायिक प्लाटों की नीलामी में कथित घोटाले की जांच रिपोर्ट सरकार को सौंपी
अमर उजाला ब्यूरो
अबोहर। करीब 8 वर्ष पूर्व नगर परिषद की ओर से नई सड़क के किनारे की गई व्यवसायिक प्लाटों की नीलामी में कथित घोटाले की जांच रिपोर्ट सेवानिवृत्त वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डॉ. आरसी नैयर ने सरकार को सौंप दी है। जिसमें नगर परिषद के तीन पूर्व कार्यकारी अधिकारी दोषी पाए गए।
यह कथित घोटाला पूर्व भाजपा विधायक डा. राम कुमार गोयल के पुत्र शिवराज गोयल के परिषद प्रधान के कार्यकाल में हुआ। सेवानिवृत्त नगर परिषद कर्मचारी संगठन की शिकायत पर पंजाब सरकार ने प्रारंभिक जांच विजिलेंस ब्यूरो से कराई थी। ब्यूरो ने क्लर्क जसपाल सिंह व तत्कालीन अध्यक्ष शिवराज गोयल के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज कराए थे। जिन्हें अदालत ने जमानत दे दी। हालांकि ब्यूरो ने जांच में नगर परिषद के पूर्व कार्यकारी अधिकारियों के खिलाफ कोई टिप्पणी नहीं की। लेकिन बीते फरवरी माह में पंजाब सरकार सेवा नियमों के तहत इनके खिलाफ जांच का कार्य डा. आरसी नैयर को सौंपा गया। जिसमें सभी पूर्व कार्यकारी अधिकारियों ने स्वयं को निर्दोष बताया। नैयर ने पांच पन्नों की जांच रिपोर्ट में कहा है कि प्लाटों की नीलामी की शर्तें षड्यंत्र पूर्वक बाद मेें बदल दी गईं। जिससे परिषद को भारी आर्थिक नुकसान हुआ। शर्तों में मूलरूप से लिखा था कि सफल बोलीदाता शेष राशि पर 18 प्रतिशत ब्याज अदा करेंगे और कोने वाले प्लाट के लिए 10 प्रतिशत अतिरिक्त राशि वसूली जाएगी। अगर कोई बोलीदाता बाद में किसी अन्य को प्लाट बेचेगा तो 3 प्रतिशत हस्तांतरण शुल्क वसूला जाएगा। लेकिन बाद में इन शर्तों में तब्दीली कर दी गई। गवाही के दौरान सेवानिवृत्त क्लर्क रविंद्र सिंह ने इस बात की पुष्टि की कि 20 अगस्त 2010 को हुई नीलामी के सफल बोलीदाताओं से पुरानी शर्तों के अनुसार वसूली की गई। जांच में सामने आया कि कि शर्तों में फेरबदल के जो दस्तावेज तैयार किए उस पर प्रधान शिवराज गोयल व तत्कालीन कार्यकारी अधिकारी जगसीर सिंह के हस्ताक्षर थे। इसलिए ड्यूटी में लापरवाही और कोताही बरतने के अलावा नगर परिषद को वित्तीय हानि पहुंचाने के लिए पूर्व कार्यकारी अधिकारियों जगसीर सिंह, भूषण सिंह राणा और भूषण अग्रवाल को दोषी ठहराया गया है।
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