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खेतीबाडी विभाग पर जमकर बरसे किसान
Updated Fri, 15 Jun 2018 10:16 PM IST
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किसानों ने घेरा खेतीबाड़ी दफ्तर
भारतीय किसान यूनियन एकता (डकौंदा) की अगुवाई में किया रोष प्रदर्शन
अमर उजाला ब्यूरो
बरनाला। भारतीय किसान यूनियन एकता (डकौंदा) की अगुवाई में किसानों ने शुक्रवार को जिला खेतीबाड़ी दफ्तर का घेराव किया। साथ ही विभाग को किसान विरोधी ठहराते हुए रोष प्रदर्शन किया।
यूनियन के प्रदेश उपाध्यक्ष दर्शन सिंह राएसर व जिला प्रधान दर्शन सिंह उग्गोके ने कहा कि खेतीबाड़ी विभाग किसानों का मददगार कहलाता है और दूसरी तरफ किसानों को इसका कोई लाभ नही है। किसान नेताओं ने कहा किविभाग एक तरफ तो किसानों को धान की ओर ज्यादा झाड़ देने वाली किस्में बीजने की सलाह देता है, दूसरी तरफ किसानों से धोखाधड़ी करते हुए पावरकाम से कह रहा है कि किसानों को 20 जून से पहले धान के लिए बिजली न दी जाए। किसानों ने कहा कि खेतीबाडी विभाग का किसान विरोधी होने का यह सबूत है कि इसने मुक्तसर व फिरोजपुर के सेम की मार झेल रहे क्षेत्रों में भी 20 जून से पहले धान की फसल लाने की आज्ञा नहीं दी। इस पर किसानों को पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खड़काना पड़ा।
अब उन्होंने हाईकोर्ट से इजाजत लेकर धान की फसल की बिजाई की है। उन्होंने कहा कि खेतीबाडी विभाग झूठे प्रचार कर रहा है कि धरती का पानी स्तर नीचे करने में किसान जिम्मेवार हैं। किसान नेताओं ने कहा असलियत यह है कि सरकारों की नीतियों के कारण पानी का स्तर नीचे जा रहा है। किसानों ने कहा कि धान की बिजाई 20 जून के बाद की जाती है तो झाड़ कम निकलेगा और धान में नमी की मात्रा अधिक आएगी। इस तरह किसानों को होने वाले घाटे की सारी जिम्मेवारी पंजाब सरकार की होगी।
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भारतीय किसान यूनियन एकता (डकौंदा) की अगुवाई में किया रोष प्रदर्शन
अमर उजाला ब्यूरो
बरनाला। भारतीय किसान यूनियन एकता (डकौंदा) की अगुवाई में किसानों ने शुक्रवार को जिला खेतीबाड़ी दफ्तर का घेराव किया। साथ ही विभाग को किसान विरोधी ठहराते हुए रोष प्रदर्शन किया।
यूनियन के प्रदेश उपाध्यक्ष दर्शन सिंह राएसर व जिला प्रधान दर्शन सिंह उग्गोके ने कहा कि खेतीबाड़ी विभाग किसानों का मददगार कहलाता है और दूसरी तरफ किसानों को इसका कोई लाभ नही है। किसान नेताओं ने कहा किविभाग एक तरफ तो किसानों को धान की ओर ज्यादा झाड़ देने वाली किस्में बीजने की सलाह देता है, दूसरी तरफ किसानों से धोखाधड़ी करते हुए पावरकाम से कह रहा है कि किसानों को 20 जून से पहले धान के लिए बिजली न दी जाए। किसानों ने कहा कि खेतीबाडी विभाग का किसान विरोधी होने का यह सबूत है कि इसने मुक्तसर व फिरोजपुर के सेम की मार झेल रहे क्षेत्रों में भी 20 जून से पहले धान की फसल लाने की आज्ञा नहीं दी। इस पर किसानों को पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खड़काना पड़ा।
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अब उन्होंने हाईकोर्ट से इजाजत लेकर धान की फसल की बिजाई की है। उन्होंने कहा कि खेतीबाडी विभाग झूठे प्रचार कर रहा है कि धरती का पानी स्तर नीचे करने में किसान जिम्मेवार हैं। किसान नेताओं ने कहा असलियत यह है कि सरकारों की नीतियों के कारण पानी का स्तर नीचे जा रहा है। किसानों ने कहा कि धान की बिजाई 20 जून के बाद की जाती है तो झाड़ कम निकलेगा और धान में नमी की मात्रा अधिक आएगी। इस तरह किसानों को होने वाले घाटे की सारी जिम्मेवारी पंजाब सरकार की होगी।
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