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बरनाला सिविल अस्पताल बना रैफर अस्पताल
Updated Wed, 31 Jan 2018 10:33 PM IST
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‘यहां दर्जा चार कर्मी लगाते हैं इंजेक्शन’
सिविल अस्पताल बरनाला में फार्मासिस्ट देखते हैं गंभीर मरीज
अमर उजाला ब्यूरो
बरनाला।
सिविल अस्पताल बरनाला में सुविधाओं का अकाल है। यह अस्पताल केवल रैफरल बनकर रह गया है। आलम तो यह है कि अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में डाक्टर की जगह सीरियस मरीजों को सिर्फ फार्मासिस्ट ही चेक करता है और टीके दर्जा चार मुलाजिम लगाते हैं। इमरजेंसी में ड्यूटी से डॉक्टर गायब रहते हैं और बुलाने पर ही इमरजेंसी में पहुंचते हैं, तब तक सीरियस रोगी भगवान को प्यारा हो जाता है।
यहां पेट के रोगी परमजीत सिंह को सीरियस हालत में अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में दाखिल करवाया गया। सीरियस हालत पडे़ परमजीत सिंह को काफी समय तक इमरजेंसी वार्ड में मौजूद फार्मासिस्ट ही अटेंड करता रहा ,जबकि डाक्टर गैरहाजिर था। पूछने पर फार्मासिस्ट बोला कोई बात नही डॉक्टर को बुला देते हैं। वह फार्मासिस्ट सीरियस मरीजों को खुद ही देखता रहा और वहां मौजूद दर्जा चार कर्मियों से मरीजों के टीके लगवाता रहा। इस दौरान घटना ऐसी घटी कि जो इंजेक्शन सीरियसमरीज परमजीत सिंह को लगाना था, वह दर्जा चार कर्मचारी ने इमरजेंसी वार्ड में लीवर की बीमारी से पीड़ित रोगी अवतार सिंह को लगा दिया गया। इससे दोनों मरीजों के परिजनों में हड़कंप मच गया।
ड्यूटी से गायब चल रहे इमरजेंसी के डाक्टर सूचना मिलने पर मौका पर पहुंच गए और सारी स्थिति पर नियंत्रण किया। यह अस्पताल रैफर सेंटर बनकर रह गया है। हर सीरियस मरीजों को प्राथमिक सहायता देकर आगे रैफर कर दिया जाता है। जब इस घटना संबंधी अस्पताल के एसएमओ डाक्टर जसवीर सिंह औलख से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि ऐसी लापरवाही का सख्त नोटिस लिया जाएगा और लापरवाही करने वाले डाक्टरों व फार्मासिस्टों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी। एसएमओ ने भी माना कि अस्पताल में सीरियस मरीजों के बचाने के लिए आधुनिक साधन नही हैं।
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सिविल अस्पताल बरनाला में फार्मासिस्ट देखते हैं गंभीर मरीज
अमर उजाला ब्यूरो
बरनाला।
सिविल अस्पताल बरनाला में सुविधाओं का अकाल है। यह अस्पताल केवल रैफरल बनकर रह गया है। आलम तो यह है कि अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में डाक्टर की जगह सीरियस मरीजों को सिर्फ फार्मासिस्ट ही चेक करता है और टीके दर्जा चार मुलाजिम लगाते हैं। इमरजेंसी में ड्यूटी से डॉक्टर गायब रहते हैं और बुलाने पर ही इमरजेंसी में पहुंचते हैं, तब तक सीरियस रोगी भगवान को प्यारा हो जाता है।
यहां पेट के रोगी परमजीत सिंह को सीरियस हालत में अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में दाखिल करवाया गया। सीरियस हालत पडे़ परमजीत सिंह को काफी समय तक इमरजेंसी वार्ड में मौजूद फार्मासिस्ट ही अटेंड करता रहा ,जबकि डाक्टर गैरहाजिर था। पूछने पर फार्मासिस्ट बोला कोई बात नही डॉक्टर को बुला देते हैं। वह फार्मासिस्ट सीरियस मरीजों को खुद ही देखता रहा और वहां मौजूद दर्जा चार कर्मियों से मरीजों के टीके लगवाता रहा। इस दौरान घटना ऐसी घटी कि जो इंजेक्शन सीरियसमरीज परमजीत सिंह को लगाना था, वह दर्जा चार कर्मचारी ने इमरजेंसी वार्ड में लीवर की बीमारी से पीड़ित रोगी अवतार सिंह को लगा दिया गया। इससे दोनों मरीजों के परिजनों में हड़कंप मच गया।
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ड्यूटी से गायब चल रहे इमरजेंसी के डाक्टर सूचना मिलने पर मौका पर पहुंच गए और सारी स्थिति पर नियंत्रण किया। यह अस्पताल रैफर सेंटर बनकर रह गया है। हर सीरियस मरीजों को प्राथमिक सहायता देकर आगे रैफर कर दिया जाता है। जब इस घटना संबंधी अस्पताल के एसएमओ डाक्टर जसवीर सिंह औलख से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि ऐसी लापरवाही का सख्त नोटिस लिया जाएगा और लापरवाही करने वाले डाक्टरों व फार्मासिस्टों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी। एसएमओ ने भी माना कि अस्पताल में सीरियस मरीजों के बचाने के लिए आधुनिक साधन नही हैं।
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