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लाखों का बिजनेस छोड़, समाज बदलने पैदल निकला पीएचडी का छात्र

Wed, 09 Jan 2019 02:06 AM IST
Panchkula bureau Panchkula bureau
Updated Wed, 09 Jan 2019 02:06 AM IST
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लाखों का बिजनेस छोड़, समाज बदलने पैदल निकला पीएचडी का छात्र
फोटो सहित
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बिजनेस छोड़ समाज बदलने पैदल घूम रहे उत्तराखंड के अजय

-होटल मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री लेने के बाद और फिलहाल कर रहे हैं पीएचडी
- बालश्रम के खिलाफ साढ़े तीन साल से नंगे पाव चल रहे हैं अजय
- 7 राज्य, साढ़े बारह हजार किमी पैदल कर चुके हैं यात्रा

रिशु राज सिंह
चंडीगढ़। समाज को बदलना है तो सबसे पहले खुद में ही बदलाव लाना होगा। इस फसाने से साथ 26 साल के अजय औली बालश्रम व भिक्षावृत्ति के खिलाफ साढ़े तीन साल से नंगे पांव शहर दर शहर घूम रहे हैं। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ से संबंध रखने वाले अजय ने होटल मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री हासिल की है और फिलहाल पीएचडी कर रहे हैं। नंगे पांव घूमना अजय के उस प्रतिज्ञा का हिस्सा है जो उन्होंने अपने आप से की है। जब अजय ने भीख मांगने वाले बच्चों को नंगे पैर चलते देखा तो उन्होंने भी जूते-चप्पल पहनना छोड़ दिया और लोगों को जागरूक करने निकल पड़े।
अपनी 14वीं यात्रा के दौरान मंगलवार को चंडीगढ़ पहुंचे अजय ने बताया कि गरीब बच्चों को शिक्षित करना उनका जुनून है। वह अब तक 7 राज्यों की यात्रा कर चुके हैं। कुल 80 हजार किमी का सफर तय किया है, जिसमें साढ़े बारह हजार किमी पैदल चले हैं। अजय ने बताया कि साल 2015 से पहले उनका इवेंट मैनेजमेंट का बिजनेस था, जिसका सालाना टर्नओवर 43 लाख का था। लेकिन एक वाक्या ने उन्हें सबकुछ छोड़ने पर मजबूर कर दिया। अजय ने बताया कि वह पिथौरागढ़ में घनश्याम ओली चाइल्ड वेलफेयर सोसायटी नाम से एक एनजीओ चलाते हैं। एनजीओ के द्वारा वह 14 हजार बच्चों को शिक्षा मुहैया करा चुके हैं। जिले में अब तक कई बच्चों को वे बाल श्रम और भिक्षावृत्ति से मुक्त करा चुके हैं। उन्होंने अब अपने अभियान का दायरा बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके लिए उन्होंने नंगे पांव पैदल यात्रा शुरू की।
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लोग पागल समझ करते हैं दुर्व्यवहार
अजय ने बताया कि लगातार पैदल चलने से खराब हुई हालत को देखकर कई बार लोग उन्हें पागल समझ लेते हैं। उन्होंने एक वाक्या का जिक्र किया कि चंडीगढ़ आने से पहले वो पटियाला में थे। रात के समय ठहरने के लिए वो एक होटल में गए। वहां होटल मालिक ने उन्हे पागल समझ कमरा देने से मना कर दिया और वहां से जाने को कह दिया। काफी समझाने के बाद भी जब नहीं समझे तो उन्होने अपने किसी जानकार से होटल मालिक की बात करवाई तब जाकर रात गुजारने के लिए उन्हें कमरा मिला। अजय ने बताया कि उनके साथ कई जिलों के डीएम जुड़े हुए हैं। इसके अलावा उनके पास देहरादून में तैनात आईएएस ऑफिसर सी रविशंकर द्वारा लिखित एक लेटर हैं।
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मोटिवेशनल सेशन है कमाई का जरिया
अजय औली अपने दम पर सभी यात्राएं करते हैं। उन्होेंने बताया कि वह मोटिवेशनल स्पीकर भी हैं और यही उनके कमाई का जरिया भी है। वह विभिन्न सेमिनार में जाते हैं और हर घंटे के 2000 रुपये चार्ज करते हैं। हालांकि वह हफ्ते में सिर्फ तीन दिन अपने लिए काम करते हैं बाकी के चार दिन अपने संस्था को देते हैं। अजय एक दिन में कम से कम 400 बच्चों से मिलते हैं सभी को भीख न मांगने की शपथ दिलाते हैं। चंडीगढ़ पहुंचने पर भी उन्होेंने चंडीगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट और सेक्टर-37 स्थित सरकारी स्कूल में बच्चों को भीख नहीं देने व चाइल्ड बैगिंग के खिलाफ काम करने की शपथ दिलाई।


चंडीगढ़ आने के बाद टूट गया स्मार्ट सिटी का भ्रम
अजय ने बताया कि चंडीगढ़ रहने वाले उनके दोस्त ने शहर के बारे में बहुत कुछ बताया था। शहर वाकई खूबसूरत भी है, लेकिन यहां भी बहुत ज्यादा बच्चे भीख मांगते है। हर रेड लाइट प्वाइंट पर कोई न कोई बच्चा भीख मांगते हुए दिखाई दे ही जाता है। यह बहुत हैरान करता है क्योंकि चंडीगढ़ एक बहुत छोटा शहर है, यहां आने से पहले नहीं सोचा था कि यहां भी इस संख्या में छोटे बच्चे भीख मांगते होंगे।
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