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जजनोटकांड: मुख्य आरोपी को विदेश जाने की मंजूरी
Updated Sat, 24 Feb 2018 01:36 AM IST
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जज नोटकांड : मुख्य आरोपी भसीन को विदेश जाने की मिली मंजूरी
1 से 8 मार्च तक हॉन्गकॉन्ग और थाईलैंड जाने की मांगी थी अनुमति
अदालत में पहले ही जमा करवा चुका है 15 लाख की एफडी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
जज नोटकांड में मुख्य आरोपी और किंगपिन दिल्ली निवासी होटलियर रविंदर सिंह भसीन को सीबीआई अदालत ने शुक्रवार को विदेश जाने की अनुमति दे दी है। भसीन ने इससे पहले अदालत से एक सप्ताह के लिए बिजनेस के सिलसिले में हॉन्गकॉन्ग और थाईलैंड जाने की अनुमति मांगी थी। सीबीआई के जवाब के बाद दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सीबीआई अदालत से इसे मंजूर कर दिया।
भसीन की ओर से दायर याचिका में कहा था कि उसे बिजनेस के सिलसिले में 1 से 8 मार्च तक हॉन्गकॉन्ग और थाईलैंड जाना है। इसके लिए उसे अनुमति दी जाए। वह पहले भी अदालत की अनुमति से विदेश जा चुका है। इसके लिए उसने 15 लाख रुपये की एफडी भी जमा कराई है।
याचिका पर सीबीआई की ओर से दाखिल जवाब में कहा गया था कि आरोपी ने विदेश में कहां जाना है इसका पता नहीं दिया गया है। वहीं जाने का स्पष्ट कारण भी नहीं बताया गया है। उन्हें अंदेशा है कि आरोपी बेल जंप कर सकता है। याचिका पर दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने भसीन की याचिका मंजूर कर दी।
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यह था मामला
आरोप के अनुसार 13 अगस्त, 2008 की रात को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के वकील संजीव बंसल जो उस समय हरियाणा एडिशनल एडवोकेट जनरल के पद पर कार्यरत थे, उन्होंने अपने मुंशी को जस्टिस निर्मल यादव के यहां 15 लाख रुपये देने के लिए भेजा था। मुंशी ने गलती से यह रकम अन्य जज निर्मलजीत कौर के यहां दे दी थी। जज निर्मलजीत कौर की शिकायत पर चंडीगढ़ पुलिस ने मामला दर्ज कर संजीव बंसल, मुंशी प्रकाश राम, राजीव और निर्मल सिंह को गिरफ्तार कर लिया था। जबकि, चार्जशीट में प्रकाश राम का नाम हटा दिया गया था। जस्टिस यादव का नाम आने पर मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी। सीबीआई ने मामले में मुकदमा चलाने की अनुमति नहीं मिलने की सूरत में क्लोजर रिपोर्ट दायर की थी। लेकिन, सीबीआई अदालत ने जांच एजेंसी की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करते हुए मामले की जांच जारी रखने के निर्देश दिए थे।
4 मार्च, 2011 को सीबीआई ने मामले में चार्जशीट दायर की। इसी दिन जस्टिस यादव उत्तराखंड हाईकोर्ट से सेवानिवृत्त हुई थीं। सीबीआई का आरोप था कि 15 लाख रुपये की राशि सोलन लैंड डीड के लिए नहीं थी। यह वह कथित बेनामी पैसा था, जिसका इस्तेमाल 11 मार्च, 2008 को जस्टिस यादव के पंचकूला सेक्टर-16 की एक प्रॉपर्टी के हक में फैसले देने के लिए था।
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1 से 8 मार्च तक हॉन्गकॉन्ग और थाईलैंड जाने की मांगी थी अनुमति
अदालत में पहले ही जमा करवा चुका है 15 लाख की एफडी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
जज नोटकांड में मुख्य आरोपी और किंगपिन दिल्ली निवासी होटलियर रविंदर सिंह भसीन को सीबीआई अदालत ने शुक्रवार को विदेश जाने की अनुमति दे दी है। भसीन ने इससे पहले अदालत से एक सप्ताह के लिए बिजनेस के सिलसिले में हॉन्गकॉन्ग और थाईलैंड जाने की अनुमति मांगी थी। सीबीआई के जवाब के बाद दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सीबीआई अदालत से इसे मंजूर कर दिया।
भसीन की ओर से दायर याचिका में कहा था कि उसे बिजनेस के सिलसिले में 1 से 8 मार्च तक हॉन्गकॉन्ग और थाईलैंड जाना है। इसके लिए उसे अनुमति दी जाए। वह पहले भी अदालत की अनुमति से विदेश जा चुका है। इसके लिए उसने 15 लाख रुपये की एफडी भी जमा कराई है।
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याचिका पर सीबीआई की ओर से दाखिल जवाब में कहा गया था कि आरोपी ने विदेश में कहां जाना है इसका पता नहीं दिया गया है। वहीं जाने का स्पष्ट कारण भी नहीं बताया गया है। उन्हें अंदेशा है कि आरोपी बेल जंप कर सकता है। याचिका पर दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने भसीन की याचिका मंजूर कर दी।
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यह था मामला
आरोप के अनुसार 13 अगस्त, 2008 की रात को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के वकील संजीव बंसल जो उस समय हरियाणा एडिशनल एडवोकेट जनरल के पद पर कार्यरत थे, उन्होंने अपने मुंशी को जस्टिस निर्मल यादव के यहां 15 लाख रुपये देने के लिए भेजा था। मुंशी ने गलती से यह रकम अन्य जज निर्मलजीत कौर के यहां दे दी थी। जज निर्मलजीत कौर की शिकायत पर चंडीगढ़ पुलिस ने मामला दर्ज कर संजीव बंसल, मुंशी प्रकाश राम, राजीव और निर्मल सिंह को गिरफ्तार कर लिया था। जबकि, चार्जशीट में प्रकाश राम का नाम हटा दिया गया था। जस्टिस यादव का नाम आने पर मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी। सीबीआई ने मामले में मुकदमा चलाने की अनुमति नहीं मिलने की सूरत में क्लोजर रिपोर्ट दायर की थी। लेकिन, सीबीआई अदालत ने जांच एजेंसी की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करते हुए मामले की जांच जारी रखने के निर्देश दिए थे।
4 मार्च, 2011 को सीबीआई ने मामले में चार्जशीट दायर की। इसी दिन जस्टिस यादव उत्तराखंड हाईकोर्ट से सेवानिवृत्त हुई थीं। सीबीआई का आरोप था कि 15 लाख रुपये की राशि सोलन लैंड डीड के लिए नहीं थी। यह वह कथित बेनामी पैसा था, जिसका इस्तेमाल 11 मार्च, 2008 को जस्टिस यादव के पंचकूला सेक्टर-16 की एक प्रॉपर्टी के हक में फैसले देने के लिए था।