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कर्मियों को निकालने के पंजाब सरकार के आदेश हाईकोर्ट ने किए खारिज
Updated Sat, 24 Jun 2017 01:16 AM IST
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पंजाब सरकार के आदेश हाईकोर्ट ने किए खारिज
सरकार ने पहले नियुक्ति कर बाद में निकाले जाने का दिया था आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
पनसप में 2014 में नियुक्त सीनियर सहायक (अकाउंट्स), सीनियर सहायक, इंस्पेक्शन ग्रेड-1 और 2 के कर्मियों को बड़ी राहत देते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने उन्हें निकाले जाने के आदेश को रद्द कर दिया है। हाईकोर्ट ने अब सरकार को नए सिरे से सभी नियुक्त कर्मियों को एक महीने के भीतर कारण बताया नोटिस जारी कर उनके जवाब मांगे जाने की पूरी प्रक्रिया तीन महीने में पूरी कर मामले के निपटारे के आदेश दे दिए हैं।
दरअसल, पंजाब यूनिवर्सिटी की ओर से आयोजित परीक्षा के प्रश्न पत्र के लीक होने के चलते इन नियुक्तियों को रद्द कर नए सिरे से सरकार ने नियुक्तियों की सिफारिश की थी। जस्टिस एबी चौधरी ने शुक्रवार को एक याचिका का निपटारा करते हुए यह आदेश दिए हैं।
बता दें कि इन नियुक्तियों के लिए आयोजित परीक्षा के प्रश्न पत्र के लीक होने पर पंजाब विजिलेंस ने गत वर्ष मई माह में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की थी। इस मामले में याचिकाकर्ता सहित कई अन्य पर यह आरोप लगा मामला दर्ज कर लिया गया कि इन्होंने लीक हुए प्रश्न पत्र हासिल कर परीक्षा दी है। इस मामले में उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया गया और इन नियुक्तियों को रद्द करने को कहा गया। अभी कई नियुक्त कर्मियों को नोटिस भी नहीं मिला था कि उन्होंने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर कर दीं।
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हाईकोर्ट ने याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए इन्हें हटाए जाने के आदेशों पर अंतरिम रोक लगा दी थी और कहा था कि हाईकोर्ट की ओर से इन याचिकाओं पर सुनाए गए फैसले पर ही यह नियुक्तियां निर्भर होंगी। इसी दौरान याचिकाकर्ता ने अपने खिलाफ दर्ज मामले में अंतरिम जमानत ले ली थी, जिसके बाद याचिकाकर्ता को दोबारा सेवा में ले लिया गया। याचिकाकर्ता के एडवोकेट राव पीएस गिरवर ने हाईकोर्ट को बताया कि इस पेपर लीक मामले में कोई शिकायत ही नहीं आई थी। बाद में कमेटी की ओर से पेपर लीक मामले में पंजाब यूनिवर्सिटी को भी एनओसी दे गई। ऐसे में अब एक बार फिर सरकार ने इन नियुक्तियों को रद्द कर नए सिरे से भर्ती करने का मन बना लिया है। हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए इन नियुक्तिओं को रद्द करने के आदेशों को खारिज कर दिया है। साथ ही इस मामले में अन्य याचिकाओं पर हाईकोर्ट के निर्देशों को भी खारिज करते हुए सरकार को सभी नियुक्त कर्मियों को नए सिरे से एक महीने के भीतर कारण बताया नोटिस जारी कर तीन महीनों के भीतर इस मामले का निपटारा करने के आदेश दे दिए हैं।
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सरकार ने पहले नियुक्ति कर बाद में निकाले जाने का दिया था आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
पनसप में 2014 में नियुक्त सीनियर सहायक (अकाउंट्स), सीनियर सहायक, इंस्पेक्शन ग्रेड-1 और 2 के कर्मियों को बड़ी राहत देते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने उन्हें निकाले जाने के आदेश को रद्द कर दिया है। हाईकोर्ट ने अब सरकार को नए सिरे से सभी नियुक्त कर्मियों को एक महीने के भीतर कारण बताया नोटिस जारी कर उनके जवाब मांगे जाने की पूरी प्रक्रिया तीन महीने में पूरी कर मामले के निपटारे के आदेश दे दिए हैं।
दरअसल, पंजाब यूनिवर्सिटी की ओर से आयोजित परीक्षा के प्रश्न पत्र के लीक होने के चलते इन नियुक्तियों को रद्द कर नए सिरे से सरकार ने नियुक्तियों की सिफारिश की थी। जस्टिस एबी चौधरी ने शुक्रवार को एक याचिका का निपटारा करते हुए यह आदेश दिए हैं।
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बता दें कि इन नियुक्तियों के लिए आयोजित परीक्षा के प्रश्न पत्र के लीक होने पर पंजाब विजिलेंस ने गत वर्ष मई माह में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की थी। इस मामले में याचिकाकर्ता सहित कई अन्य पर यह आरोप लगा मामला दर्ज कर लिया गया कि इन्होंने लीक हुए प्रश्न पत्र हासिल कर परीक्षा दी है। इस मामले में उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया गया और इन नियुक्तियों को रद्द करने को कहा गया। अभी कई नियुक्त कर्मियों को नोटिस भी नहीं मिला था कि उन्होंने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर कर दीं।
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हाईकोर्ट ने याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए इन्हें हटाए जाने के आदेशों पर अंतरिम रोक लगा दी थी और कहा था कि हाईकोर्ट की ओर से इन याचिकाओं पर सुनाए गए फैसले पर ही यह नियुक्तियां निर्भर होंगी। इसी दौरान याचिकाकर्ता ने अपने खिलाफ दर्ज मामले में अंतरिम जमानत ले ली थी, जिसके बाद याचिकाकर्ता को दोबारा सेवा में ले लिया गया। याचिकाकर्ता के एडवोकेट राव पीएस गिरवर ने हाईकोर्ट को बताया कि इस पेपर लीक मामले में कोई शिकायत ही नहीं आई थी। बाद में कमेटी की ओर से पेपर लीक मामले में पंजाब यूनिवर्सिटी को भी एनओसी दे गई। ऐसे में अब एक बार फिर सरकार ने इन नियुक्तियों को रद्द कर नए सिरे से भर्ती करने का मन बना लिया है। हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए इन नियुक्तिओं को रद्द करने के आदेशों को खारिज कर दिया है। साथ ही इस मामले में अन्य याचिकाओं पर हाईकोर्ट के निर्देशों को भी खारिज करते हुए सरकार को सभी नियुक्त कर्मियों को नए सिरे से एक महीने के भीतर कारण बताया नोटिस जारी कर तीन महीनों के भीतर इस मामले का निपटारा करने के आदेश दे दिए हैं।