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फरमान: हड़ताल-धरने में भाग लेने वालों की नौकरी से छुट्टी
Updated Sun, 18 Jun 2017 01:39 AM IST
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फरमान : हड़ताल-धरने में भाग लेने पर नौकरी से छुट्टी
- आंगनबाड़ी वर्कर्स और हेल्पर्स के प्रदर्शनों में शामिल होने पर भी रोक
- महिला एवं बाल विकास निदेशक ने सभी डीपीओ को दिए निर्देश
- हड़ताल और धरने में शामिल होने पर समाप्त करें सेवाएं
यशपाल शर्मा
चंडीगढ़।
हरियाणा महिला एवं बाल विकास विभाग ने आंगनबाड़ी वर्कर्स और हेल्पर्स के धरना-प्रदर्शन करने व हड़ताल में शामिल होने पर रोक लगा दी है। इसके बावजूद अगर इन्होंने विभागीय आदेशों का उल्लंघन किया तो नौकरी से छुट्टी हो जाएगी। महिला एवं बाल विकास विभाग की निदेशक रेणु फुलिया ने सभी जिला कार्यक्रम अधिकारियों को इस संबंध में पत्र जारी कर दिया है।
निदेशक की ओर से निर्देश दिए गए हैं कि जो भी आंगनबाड़ी वर्कर्स और हेल्पर्स धरने-प्रदर्शन में भाग लेती हैं और हड़ताल करती हैं, उनकी सेवाएं समाप्त कर दी जाएं। समेकित बाल विकास परियोजना विभाग की अहम योजना है। इसके अंतर्गत गर्भवती और प्रसूता महिलाओं, छह माह से छह साल तक के बच्चों को 300 दिन राशन उपलब्ध कराया जाता है। विभाग की अन्य योजनाएं भी इन्हीं कर्मियावें के मार्फत अमल में लाई जा रही हैं।
विभाग के देखने में आया है कि ये कर्मचारी योजनाओं को दरकिनार कर छोटी-छोटी मांगों के लिए धरने-प्रदर्शन और हड़ताल करती रहती हैं, जो उचित नहीं है। इससे विभाग की योजनाएं बाधित हो रही हैं, साथ ही जनता में संदेश भी गलत जा रहा है। इससे विभाग की छवि धूमिल होने के साथ ही योजनाओं पर विपरीत प्रभाव तो पड़ ही रहा है, आंगनबाड़ी केंद्रों के काम भी प्रभावित हो रहे हैं। इसलिए इन कर्मियों की गतिविधियों पर रोक लगाना जरूरी है।
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प्रथा पर रोक लगाना जरूरी : फुलिया
महिला एवं बाल विकास विभाग की निदेशक रेणु एस फुलिया के अनुसार आंगनबाड़ी वर्कर्स और हेल्पर्स की इस प्रथा पर रोक लगाना जरूरी है। अगर भविष्य में ये आदेशों की अवहेलना करती हैं तो इनकी सेवाएं तत्काल प्रभाव से खत्म कर दी जाएं।
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- आंगनबाड़ी वर्कर्स और हेल्पर्स के प्रदर्शनों में शामिल होने पर भी रोक
- महिला एवं बाल विकास निदेशक ने सभी डीपीओ को दिए निर्देश
- हड़ताल और धरने में शामिल होने पर समाप्त करें सेवाएं
यशपाल शर्मा
चंडीगढ़।
हरियाणा महिला एवं बाल विकास विभाग ने आंगनबाड़ी वर्कर्स और हेल्पर्स के धरना-प्रदर्शन करने व हड़ताल में शामिल होने पर रोक लगा दी है। इसके बावजूद अगर इन्होंने विभागीय आदेशों का उल्लंघन किया तो नौकरी से छुट्टी हो जाएगी। महिला एवं बाल विकास विभाग की निदेशक रेणु फुलिया ने सभी जिला कार्यक्रम अधिकारियों को इस संबंध में पत्र जारी कर दिया है।
निदेशक की ओर से निर्देश दिए गए हैं कि जो भी आंगनबाड़ी वर्कर्स और हेल्पर्स धरने-प्रदर्शन में भाग लेती हैं और हड़ताल करती हैं, उनकी सेवाएं समाप्त कर दी जाएं। समेकित बाल विकास परियोजना विभाग की अहम योजना है। इसके अंतर्गत गर्भवती और प्रसूता महिलाओं, छह माह से छह साल तक के बच्चों को 300 दिन राशन उपलब्ध कराया जाता है। विभाग की अन्य योजनाएं भी इन्हीं कर्मियावें के मार्फत अमल में लाई जा रही हैं।
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विभाग के देखने में आया है कि ये कर्मचारी योजनाओं को दरकिनार कर छोटी-छोटी मांगों के लिए धरने-प्रदर्शन और हड़ताल करती रहती हैं, जो उचित नहीं है। इससे विभाग की योजनाएं बाधित हो रही हैं, साथ ही जनता में संदेश भी गलत जा रहा है। इससे विभाग की छवि धूमिल होने के साथ ही योजनाओं पर विपरीत प्रभाव तो पड़ ही रहा है, आंगनबाड़ी केंद्रों के काम भी प्रभावित हो रहे हैं। इसलिए इन कर्मियों की गतिविधियों पर रोक लगाना जरूरी है।
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प्रथा पर रोक लगाना जरूरी : फुलिया
महिला एवं बाल विकास विभाग की निदेशक रेणु एस फुलिया के अनुसार आंगनबाड़ी वर्कर्स और हेल्पर्स की इस प्रथा पर रोक लगाना जरूरी है। अगर भविष्य में ये आदेशों की अवहेलना करती हैं तो इनकी सेवाएं तत्काल प्रभाव से खत्म कर दी जाएं।