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Panchkula News: ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर 1.50 करोड़ की ठगी, आरोपी की जमानत खारिज
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अदालत की टिप्पणी- साइबर अपराधों का समाज पर व्यापक असर, लंबे समय से हिरासत जमानत का आधार नहीं
ऑनलाइन ट्रेडिंग में निवेश का झांसा देकर की गई थी ठगी, शिकायतकर्ता से करीब 1.50 करोड़ रुपये ऐंठे गए
संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। ऑनलाइन ट्रेडिंग में निवेश पर मोटे मुनाफे का झांसा देकर करीब 1.50 करोड़ रुपये की साइबर ठगी के मामले में गिरफ्तार राजस्थान निवासी विशाल कुमार को अदालत से राहत नहीं मिली। पंचकूला की अदालत ने उसकी नियमित जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि साइबर अपराधों का समाज पर व्यापक प्रभाव पड़ता है और ऐसे मामलों में केवल लंबे समय से न्यायिक हिरासत में होना जमानत का पर्याप्त आधार नहीं माना जा सकता।
पंचकूला निवासी एक व्यक्ति ने पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि नवंबर 2023 में टेलीग्राम के माध्यम से उनसे संपर्क कर ऑनलाइन ट्रेडिंग में निवेश के जरिए भारी मुनाफा कमाने का लालच दिया गया। भरोसा जीतने के लिए शुरुआत में उन्हें चार हजार रुपये का भुगतान भी किया गया।
इसके बाद शिकायतकर्ता ने अलग-अलग बैंक खातों में लगातार निवेश किया। जब उन्होंने अपनी रकम वापस निकालने का प्रयास किया तो उनसे 30 प्रतिशत टैक्स जमा कराने की शर्त रखी गई। शिकायतकर्ता ने दोस्तों और रिश्तेदारों से उधार लेकर भी रकम जमा कराई, लेकिन बाद में पता चला कि उनके साथ करीब 1.50 करोड़ रुपये की ठगी हो चुकी है।
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जांच में सामने आया कि ठगी की रकम कई बैंक खातों के माध्यम से आगे ट्रांसफर की गई। पुलिस ने पहले राजेश कुमार को गिरफ्तार किया था, जिसके खाते से 4.80 लाख रुपये सह-आरोपी अकीब अली के खाते में भेजे गए थे। जांच आगे बढ़ने पर विशाल कुमार की भूमिका सामने आई।
पुलिस के अनुसार, विशाल कुमार के खाते में साइबर ठगी की राशि की पहली परत के रूप में 8.68 लाख रुपये आए थे। इसके बाद उसे 11 फरवरी 2026 को राजस्थान के हनुमानगढ़ से गिरफ्तार किया गया। वह तभी से न्यायिक हिरासत में है।
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ऑनलाइन ट्रेडिंग में निवेश का झांसा देकर की गई थी ठगी, शिकायतकर्ता से करीब 1.50 करोड़ रुपये ऐंठे गए
संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। ऑनलाइन ट्रेडिंग में निवेश पर मोटे मुनाफे का झांसा देकर करीब 1.50 करोड़ रुपये की साइबर ठगी के मामले में गिरफ्तार राजस्थान निवासी विशाल कुमार को अदालत से राहत नहीं मिली। पंचकूला की अदालत ने उसकी नियमित जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि साइबर अपराधों का समाज पर व्यापक प्रभाव पड़ता है और ऐसे मामलों में केवल लंबे समय से न्यायिक हिरासत में होना जमानत का पर्याप्त आधार नहीं माना जा सकता।
पंचकूला निवासी एक व्यक्ति ने पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि नवंबर 2023 में टेलीग्राम के माध्यम से उनसे संपर्क कर ऑनलाइन ट्रेडिंग में निवेश के जरिए भारी मुनाफा कमाने का लालच दिया गया। भरोसा जीतने के लिए शुरुआत में उन्हें चार हजार रुपये का भुगतान भी किया गया।
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इसके बाद शिकायतकर्ता ने अलग-अलग बैंक खातों में लगातार निवेश किया। जब उन्होंने अपनी रकम वापस निकालने का प्रयास किया तो उनसे 30 प्रतिशत टैक्स जमा कराने की शर्त रखी गई। शिकायतकर्ता ने दोस्तों और रिश्तेदारों से उधार लेकर भी रकम जमा कराई, लेकिन बाद में पता चला कि उनके साथ करीब 1.50 करोड़ रुपये की ठगी हो चुकी है।
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जांच में सामने आया कि ठगी की रकम कई बैंक खातों के माध्यम से आगे ट्रांसफर की गई। पुलिस ने पहले राजेश कुमार को गिरफ्तार किया था, जिसके खाते से 4.80 लाख रुपये सह-आरोपी अकीब अली के खाते में भेजे गए थे। जांच आगे बढ़ने पर विशाल कुमार की भूमिका सामने आई।
पुलिस के अनुसार, विशाल कुमार के खाते में साइबर ठगी की राशि की पहली परत के रूप में 8.68 लाख रुपये आए थे। इसके बाद उसे 11 फरवरी 2026 को राजस्थान के हनुमानगढ़ से गिरफ्तार किया गया। वह तभी से न्यायिक हिरासत में है।