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मेट्रो प्रोजेक्ट का गृह मंत्री का इंकार
Updated Fri, 28 Jul 2017 01:31 AM IST
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मेट्रो प्रोजेक्ट पर गृह मंत्री का भी इंकार
दिल्ली में राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में सलाहकार समिति की बैठक
कहा, प्रोजेक्ट के लिए कहा से आएगी 200 एकड़ जमीन
पंजाबी या हिंदी को राजभाषा के मामले से दूर रहने की दी सलाह
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
शहर में अब मेट्रो प्रोजेक्ट की उम्मीद पूरी तरह से खत्म हो गई है। गृह मंत्री ने भी इस प्रोजेक्ट के लिए अपनी सहमति नहीं दी है। दिल्ली में वीरवार को गृह मंत्री के निवास स्थान पर सलाहकार समिति की हुई बैठक में मेट्रो प्रोजेक्ट के मुद्दे पर मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि यह प्रोजेक्ट फिजिबल नहीं है और वित्तीय तौर पर भी यह उपयुक्त नहीं है। अधिकारियों का कहना है इस प्रोजेक्ट पर 10 हजार करोड़ का खर्च आएगा और प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए 200 एकड़ जमीन चाहिए। इतनी ज्यादा जमीन चंडीगढ़ के पास नहीं है। गृह मंत्री राजनाथ ने कहा कि 10 हजार करोड़ रुपये के मुकाबले में इसका चंडीगढ़ को एक प्रतिशत भी कमाई नहीं होगी। जबकि बैठक में यह निर्णय लिया गया कि जो शहर का वर्तमान ट्रांसपोर्ट सिस्टम है उसको अपग्रेड किया जाए। भाजपा अध्यक्ष संजय टंडन ने बैठक में कहा कि उनके यहां पर वाहनों की संख्या जनसंख्या से भी ज्यादा है। ऐसे में जाम से निबटने का कोई अन्य समाधान तलाश करना चाहिए। वहीं गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि कारों की खरीदारी पर लगाम लगाने पर कोई सिस्टम लागू करना चाहिए। खरीदार पर एक सीमित संख्या के बार वाहनों की खरीदारी पर पाबंदी लगानी चाहिए। सांसद किरण खेर पहले से इस प्रोजेक्ट के खिलाफ अपनी सहमति दे चुकी है। खेर पहले ही कह चुकी है कि दिल्ली की तरह जगह-जगह से शहर को खोद दिया जाए और फिर सालों तक ऐसे ही पड़ा रहे, इससे शहर की खूबसूरती, बदसूरती में बदल जाएगी।
10 करोड़ हो चुका है है खर्च
मालूम हो कि पिछले नौ साल में 109 मीटिंग के बाद मेट्रो की डीपीआर तैयार करने और अन्य कामों में 10 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च हो चुका है। जबकि प्रशासन इसके लिए सर्वे भी कर चुका है। मालूम हो कि यह प्रोजेक्ट चंडीगढ़ में कांग्रेस के कार्यकाल में सर्वे के लिए आया था।
हिंदी या पंजाबी को राजभाषा बनाना काफी गंभीर मुद्दा
बैठक में यूटी की राजभाषा को हिंदी या पंजाबी को बनाने के मामले में गृह मंत्री राजनाथ ने कहा कि यह काफी गंभीर विषय है। इस मामले को नहीं छूना चाहिए। उन्होंने प्रशासन के अधिकारियों को कहा कि जो कोई भी जिस भाषा में पत्र लिखता है उसे उसी भाषा में ही जबाव देना चाहिए। बैठक में प्रशासक वीपी सिंह बदनौर और सलाहकार परिमल राय भी प्रशासन की ओर से उपस्थित थे।
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मेयर ने उठाया सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट का मामला
मेयर आशा जसवाल ने शहर के सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के बारे में ध्यान देने के लिए कहा इस पर गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि वह दिल्ली में बैठकर इसका कोई हल नहीं निकाल सकते हैं। मेयर और नगर निगम के अधिकारी इसका हल अपने स्तर पर ही निकालें।
कमेटी की जगह कमीशन बना दिया जाए
बैठक में हेरिटेज स्टेटस पर भी बात हुई। बैठक में यह बात सामने आई कि हेरिटेज कमेटी ज्यादा कुछ नहीं कर पा रही है जिस कारण शहर में कोई ज्यादा बदलाव नहीं हो रहा है इसलिए गृह मंत्रालय ने प्रशासन को कहा कि इसकी जगह पर हेरिटेज कमीशन बना दिया जाए।
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दिल्ली में राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में सलाहकार समिति की बैठक
कहा, प्रोजेक्ट के लिए कहा से आएगी 200 एकड़ जमीन
पंजाबी या हिंदी को राजभाषा के मामले से दूर रहने की दी सलाह
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
शहर में अब मेट्रो प्रोजेक्ट की उम्मीद पूरी तरह से खत्म हो गई है। गृह मंत्री ने भी इस प्रोजेक्ट के लिए अपनी सहमति नहीं दी है। दिल्ली में वीरवार को गृह मंत्री के निवास स्थान पर सलाहकार समिति की हुई बैठक में मेट्रो प्रोजेक्ट के मुद्दे पर मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि यह प्रोजेक्ट फिजिबल नहीं है और वित्तीय तौर पर भी यह उपयुक्त नहीं है। अधिकारियों का कहना है इस प्रोजेक्ट पर 10 हजार करोड़ का खर्च आएगा और प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए 200 एकड़ जमीन चाहिए। इतनी ज्यादा जमीन चंडीगढ़ के पास नहीं है। गृह मंत्री राजनाथ ने कहा कि 10 हजार करोड़ रुपये के मुकाबले में इसका चंडीगढ़ को एक प्रतिशत भी कमाई नहीं होगी। जबकि बैठक में यह निर्णय लिया गया कि जो शहर का वर्तमान ट्रांसपोर्ट सिस्टम है उसको अपग्रेड किया जाए। भाजपा अध्यक्ष संजय टंडन ने बैठक में कहा कि उनके यहां पर वाहनों की संख्या जनसंख्या से भी ज्यादा है। ऐसे में जाम से निबटने का कोई अन्य समाधान तलाश करना चाहिए। वहीं गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि कारों की खरीदारी पर लगाम लगाने पर कोई सिस्टम लागू करना चाहिए। खरीदार पर एक सीमित संख्या के बार वाहनों की खरीदारी पर पाबंदी लगानी चाहिए। सांसद किरण खेर पहले से इस प्रोजेक्ट के खिलाफ अपनी सहमति दे चुकी है। खेर पहले ही कह चुकी है कि दिल्ली की तरह जगह-जगह से शहर को खोद दिया जाए और फिर सालों तक ऐसे ही पड़ा रहे, इससे शहर की खूबसूरती, बदसूरती में बदल जाएगी।
10 करोड़ हो चुका है है खर्च
मालूम हो कि पिछले नौ साल में 109 मीटिंग के बाद मेट्रो की डीपीआर तैयार करने और अन्य कामों में 10 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च हो चुका है। जबकि प्रशासन इसके लिए सर्वे भी कर चुका है। मालूम हो कि यह प्रोजेक्ट चंडीगढ़ में कांग्रेस के कार्यकाल में सर्वे के लिए आया था।
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हिंदी या पंजाबी को राजभाषा बनाना काफी गंभीर मुद्दा
बैठक में यूटी की राजभाषा को हिंदी या पंजाबी को बनाने के मामले में गृह मंत्री राजनाथ ने कहा कि यह काफी गंभीर विषय है। इस मामले को नहीं छूना चाहिए। उन्होंने प्रशासन के अधिकारियों को कहा कि जो कोई भी जिस भाषा में पत्र लिखता है उसे उसी भाषा में ही जबाव देना चाहिए। बैठक में प्रशासक वीपी सिंह बदनौर और सलाहकार परिमल राय भी प्रशासन की ओर से उपस्थित थे।
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मेयर ने उठाया सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट का मामला
मेयर आशा जसवाल ने शहर के सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के बारे में ध्यान देने के लिए कहा इस पर गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि वह दिल्ली में बैठकर इसका कोई हल नहीं निकाल सकते हैं। मेयर और नगर निगम के अधिकारी इसका हल अपने स्तर पर ही निकालें।
कमेटी की जगह कमीशन बना दिया जाए
बैठक में हेरिटेज स्टेटस पर भी बात हुई। बैठक में यह बात सामने आई कि हेरिटेज कमेटी ज्यादा कुछ नहीं कर पा रही है जिस कारण शहर में कोई ज्यादा बदलाव नहीं हो रहा है इसलिए गृह मंत्रालय ने प्रशासन को कहा कि इसकी जगह पर हेरिटेज कमीशन बना दिया जाए।