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आतिशबाजी : आठ और लोगों की रोशनी कम हुई
Updated Sat, 10 Nov 2018 12:49 AM IST
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आतिशबाजी से आठ और लोगों की रोशनी हुई कम
सबहेड
पीजीआई में आंखों के कु़ल 39 मरीज पहुंचे, एक को छोड़ बाकी सबकी रोशनी बचा ली गई
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। दीपावली पर आतिशबाजी से आंखों पर चोट लगने के तीन और मरीज वीरवार देर रात पीजीआई पहुंचे। इन मरीजों को लेकर अब पीजीआई के एडवांस आई सेंटर में कुल मरीजों की संख्या 39 हो गई है। इनमें से 23 ट्राइसिटी के हैं, बाकी हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश से हैं। इनमें सबसे छोटा मरीज मात्र दो साल का है। इनमें 20 मरीज गंभीर थे, जिनकी सर्जरी करनी पड़ी। इनमें से 12 मरीजों की सर्जरी वीरवार को जबकि 8 मरीजों की सर्जरी शुक्रवार को की गई। सर्जरी के बाद इन मरीजों की आंखों की रोशनी को काफी हद तक बचा लिया गया है, लेकिन इसके बाद भी उनकी पूरी रोशनी वापस नहीं आ सकती। बाकी 18 पेशेंट की रोशनी में कोई खास फर्क नहीं पड़ा है। इन पेशेंट को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई है।
सिर्फ एक मरीज की आंखों की रोशनी गई
पीजीआई में पहुंचे 39 मरीजों में से सिर्फ एक मरीज की आंखों की रोशनी चली गई है। वह मरीज मौलीजागरां का रहने वाला है और एक फैक्टरी में सिक्योरिटी गार्ड का काम करता है। वह दीपावली के दिन खुद पटाखा जला रहा था। प्रत्यदर्शियों ने बताया कि आग लगने के बाद जब पटाखा नहीं फूटा तो उसने हाथ में पटाखा उठा लिया और उसी दौरान वह फट गया। इससे उसकी लेफ्ट साइड की आंख पूरी बाहर आ गई। परिजन से उसे लेकर पीजीआई पहुंचे। डाक्टरों ने पूरी कोशिश की, मगर उसकी एक आंख की रोशनी वापस नहीं आ पाएगी। हालांकि एक आंख सुरक्षित है। पटाखे की तीव्रता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मरीज की आंख की झिल्ली, कार्निया सब कुछ बाहर आ गया था।
आतिशबाजी देख रहे 21 लोग हुए घायल
लोगों के बीच एक धारणा है कि अक्सर लोग वही घायल होते हैं, जो पटाखे फोड़ते हैं लेकिन पीजीआई पहुंचे मरीजों ने इस मिथक को फिलहाल दूर कर दिया है। 21 ऐसे मरीज पीजीआई पहुंचे जो आतिशबाजी का सिर्फ लुत्फ उठा रहे थे। पीजीआई आई सेंटर की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. प्रियंका चारू चावला ने बताया कि आतिशबाजी की चपेट में देखने वाले लोग भी आए हैं। गलियों में होने वाली आतिशबाजी और उसे छत या बालकनी से देखने वाले लोगों को ज्यादा नुकसान होता है।
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पीजीआई में आंखों के कु़ल 39 मरीज पहुंचे, एक को छोड़ बाकी सबकी रोशनी बचा ली गई
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। दीपावली पर आतिशबाजी से आंखों पर चोट लगने के तीन और मरीज वीरवार देर रात पीजीआई पहुंचे। इन मरीजों को लेकर अब पीजीआई के एडवांस आई सेंटर में कुल मरीजों की संख्या 39 हो गई है। इनमें से 23 ट्राइसिटी के हैं, बाकी हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश से हैं। इनमें सबसे छोटा मरीज मात्र दो साल का है। इनमें 20 मरीज गंभीर थे, जिनकी सर्जरी करनी पड़ी। इनमें से 12 मरीजों की सर्जरी वीरवार को जबकि 8 मरीजों की सर्जरी शुक्रवार को की गई। सर्जरी के बाद इन मरीजों की आंखों की रोशनी को काफी हद तक बचा लिया गया है, लेकिन इसके बाद भी उनकी पूरी रोशनी वापस नहीं आ सकती। बाकी 18 पेशेंट की रोशनी में कोई खास फर्क नहीं पड़ा है। इन पेशेंट को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई है।
सिर्फ एक मरीज की आंखों की रोशनी गई
पीजीआई में पहुंचे 39 मरीजों में से सिर्फ एक मरीज की आंखों की रोशनी चली गई है। वह मरीज मौलीजागरां का रहने वाला है और एक फैक्टरी में सिक्योरिटी गार्ड का काम करता है। वह दीपावली के दिन खुद पटाखा जला रहा था। प्रत्यदर्शियों ने बताया कि आग लगने के बाद जब पटाखा नहीं फूटा तो उसने हाथ में पटाखा उठा लिया और उसी दौरान वह फट गया। इससे उसकी लेफ्ट साइड की आंख पूरी बाहर आ गई। परिजन से उसे लेकर पीजीआई पहुंचे। डाक्टरों ने पूरी कोशिश की, मगर उसकी एक आंख की रोशनी वापस नहीं आ पाएगी। हालांकि एक आंख सुरक्षित है। पटाखे की तीव्रता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मरीज की आंख की झिल्ली, कार्निया सब कुछ बाहर आ गया था।
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आतिशबाजी देख रहे 21 लोग हुए घायल
लोगों के बीच एक धारणा है कि अक्सर लोग वही घायल होते हैं, जो पटाखे फोड़ते हैं लेकिन पीजीआई पहुंचे मरीजों ने इस मिथक को फिलहाल दूर कर दिया है। 21 ऐसे मरीज पीजीआई पहुंचे जो आतिशबाजी का सिर्फ लुत्फ उठा रहे थे। पीजीआई आई सेंटर की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. प्रियंका चारू चावला ने बताया कि आतिशबाजी की चपेट में देखने वाले लोग भी आए हैं। गलियों में होने वाली आतिशबाजी और उसे छत या बालकनी से देखने वाले लोगों को ज्यादा नुकसान होता है।
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