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महिला विद्यार्थियों को मिलेगा 45 दिन का मातृत्व अवकाश
Updated Wed, 14 Jun 2017 01:08 AM IST
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विवाहित छात्राओं को मिलेगा 45 दिन का मातृत्व अवकाश
- विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में अध्ययनरत होने पर पा सकेंगी लाभ
- उच्चतर शिक्षा विभाग के प्रस्ताव को सीएम ने दी मंजूरी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
हरियाणा सरकार विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में विवाहित छात्राओं को 45 दिन का मातृत्व अवकाश देगी। यह निर्णय उनकी बिना रुकावट शिक्षा को पूरा कराने के मद्देनजर लिया गया है। उच्चतर शिक्षा विभाग के प्रस्ताव को मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने मंजूरी दे दी है। शिक्षा मंत्री राम बिलास शर्मा ने बताया कि ताजा दिशा-निर्देशों के अनुसार विवाहित छात्राएं वैध चिकित्सा प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने पर संबंधित विभाग अध्यक्ष की पूर्व अनुमति से एक बार में 45 दिन तक का मातृत्व अवकाश ले सकेंगी। विवाहित छात्राओं को मातृत्व अवकाश सक्षम प्राधिकारी इस शर्त के साथ प्रदान करेंगे कि उन्हें पाठ्यक्रम पूरा करने के लिए आवश्यकतानुसार अतिरिक्त कक्षाएं लगानी होंगी। अवकाश अवधि सेमेस्टर के दौरान दिए गए कुल व्याख्यानों में से निकाल दी जाएगी। हालांकि, आवश्यकता होने पर विवाहित छात्रा एक पूरा सेमेस्टर छोड़ सकती हैं, लेकिन अंतिम सेमेस्टर की परीक्षा में भाग लेने के बाद छोड़े गए सेमेस्टर की हाजिरी पूरी करनी होगी। साथ ही सम और विषम सेमेस्टर नीति के अनुसार छोड़ी गई सेमेस्टर परीक्षाओं में भाग लेना होगा।
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- विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में अध्ययनरत होने पर पा सकेंगी लाभ
- उच्चतर शिक्षा विभाग के प्रस्ताव को सीएम ने दी मंजूरी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
हरियाणा सरकार विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में विवाहित छात्राओं को 45 दिन का मातृत्व अवकाश देगी। यह निर्णय उनकी बिना रुकावट शिक्षा को पूरा कराने के मद्देनजर लिया गया है। उच्चतर शिक्षा विभाग के प्रस्ताव को मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने मंजूरी दे दी है। शिक्षा मंत्री राम बिलास शर्मा ने बताया कि ताजा दिशा-निर्देशों के अनुसार विवाहित छात्राएं वैध चिकित्सा प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने पर संबंधित विभाग अध्यक्ष की पूर्व अनुमति से एक बार में 45 दिन तक का मातृत्व अवकाश ले सकेंगी। विवाहित छात्राओं को मातृत्व अवकाश सक्षम प्राधिकारी इस शर्त के साथ प्रदान करेंगे कि उन्हें पाठ्यक्रम पूरा करने के लिए आवश्यकतानुसार अतिरिक्त कक्षाएं लगानी होंगी। अवकाश अवधि सेमेस्टर के दौरान दिए गए कुल व्याख्यानों में से निकाल दी जाएगी। हालांकि, आवश्यकता होने पर विवाहित छात्रा एक पूरा सेमेस्टर छोड़ सकती हैं, लेकिन अंतिम सेमेस्टर की परीक्षा में भाग लेने के बाद छोड़े गए सेमेस्टर की हाजिरी पूरी करनी होगी। साथ ही सम और विषम सेमेस्टर नीति के अनुसार छोड़ी गई सेमेस्टर परीक्षाओं में भाग लेना होगा।