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साक्षर अभियान के कर्मियों को हटाने पर 27 जून तक रोक
Updated Thu, 22 Jun 2017 01:27 AM IST
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साक्षर अभियान के कर्मियों को हटाने पर 27 जून तक रोक
- हरियाणा सरकार ने कहा, जितना फंड रखा था वह खत्म अब आगे नहीं दे सकते पैसा
- हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई 27 जून को रखते हुए केंद्र सरकार से मांगा जवाब
- हरियाणा सरकार ने ऐसे पांच हजार से अधिक कर्मियों को हटाने का लिया है निर्णय
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
केंद्र सरकार की साक्षर अभियान योजना के तहत अनुबंध पर रखे गए पांच हजार से अधिक कर्मियों को हटाने के हरियाणा सरकार के फैसले को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। राज्य सरकार ने कहा कि उनके पास जो फंड था, वह पूरा हो चुका है और वे इस योजना को आगे नहीं चला सकते। हरियाणा के इस रुख पर हाईकोर्ट ने सुनवाई को 27 जून तक टालते हुए इन शिक्षकों को हटाने पर रोक बरकरार रखी है। इसके साथ ही केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है। इससे पहले हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा था कि क्यों न सरकार के इस फैसले पर रोक लगा दी जाए।
महेंद्रगढ़ निवासी करण सिंह व अन्य की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया है कि हरियाणा में केंद्र सरकार की साक्षर अभियान योजना को आरंभ किया गया था। इसके तहत प्रदेश भर में अनुबंध के आधार पर पांच हजार से अधिक नियुक्तियां की गई थीं। इस योजना के तहत होने वाले खर्च के लिए शर्त पूर्व में निर्धारित थी, इसके अनुसार 60 फीसदी केंद्र और 40 फीसदी राज्य सरकार को वहन करना था। योजना के तहत पांच हजार से ज्यादा नियुक्तियां की गईं और हाल ही में पत्र जारी कर कहा गया कि हरियाणा सरकार योजना के लिए ग्रांट अदा नहीं कर सकती। इस पत्र के माध्यम से लोगों से उनका रोजगार छीना जा रहा है, जो सही नहीं है। 1163 याचिकाकर्ताओं ने राज्य सरकार के फैसले को चुनौती देते हुए इसे रद्द करने की अपील की है। इस मामले में अब हरियाणा सरकार का रुख स्पष्ट होने के कारण अब हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को अपना पक्ष रखने को कहा है। साथ ही सुनवाई को 27 जून तक टालते हुए इन शिक्षकों को हटाने पर रोक बरकरार रखी है।
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- हरियाणा सरकार ने कहा, जितना फंड रखा था वह खत्म अब आगे नहीं दे सकते पैसा
- हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई 27 जून को रखते हुए केंद्र सरकार से मांगा जवाब
- हरियाणा सरकार ने ऐसे पांच हजार से अधिक कर्मियों को हटाने का लिया है निर्णय
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
केंद्र सरकार की साक्षर अभियान योजना के तहत अनुबंध पर रखे गए पांच हजार से अधिक कर्मियों को हटाने के हरियाणा सरकार के फैसले को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। राज्य सरकार ने कहा कि उनके पास जो फंड था, वह पूरा हो चुका है और वे इस योजना को आगे नहीं चला सकते। हरियाणा के इस रुख पर हाईकोर्ट ने सुनवाई को 27 जून तक टालते हुए इन शिक्षकों को हटाने पर रोक बरकरार रखी है। इसके साथ ही केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है। इससे पहले हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा था कि क्यों न सरकार के इस फैसले पर रोक लगा दी जाए।
महेंद्रगढ़ निवासी करण सिंह व अन्य की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया है कि हरियाणा में केंद्र सरकार की साक्षर अभियान योजना को आरंभ किया गया था। इसके तहत प्रदेश भर में अनुबंध के आधार पर पांच हजार से अधिक नियुक्तियां की गई थीं। इस योजना के तहत होने वाले खर्च के लिए शर्त पूर्व में निर्धारित थी, इसके अनुसार 60 फीसदी केंद्र और 40 फीसदी राज्य सरकार को वहन करना था। योजना के तहत पांच हजार से ज्यादा नियुक्तियां की गईं और हाल ही में पत्र जारी कर कहा गया कि हरियाणा सरकार योजना के लिए ग्रांट अदा नहीं कर सकती। इस पत्र के माध्यम से लोगों से उनका रोजगार छीना जा रहा है, जो सही नहीं है। 1163 याचिकाकर्ताओं ने राज्य सरकार के फैसले को चुनौती देते हुए इसे रद्द करने की अपील की है। इस मामले में अब हरियाणा सरकार का रुख स्पष्ट होने के कारण अब हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को अपना पक्ष रखने को कहा है। साथ ही सुनवाई को 27 जून तक टालते हुए इन शिक्षकों को हटाने पर रोक बरकरार रखी है।
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