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पांच बरी

Tue, 30 Jan 2018 01:36 AM IST
Updated Tue, 30 Jan 2018 01:36 AM IST
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पांच बरी
युवती के अपहरण और दुराचार में पांच बरी
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- मुख्य आरोपी केस में हो चुका है भगौड़ा करार
- युवती को नाबालिग बता किया था केस दर्ज, अदालत ने किया था बालिग घोषित
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
जिला अदालत ने युवती के अपहरण और दुराचार में पांच आरोपियों को बरी कर दिया। केस में कुल छह आरोपी थे, एक को अदालत पहले ही भगौड़ा करार दे चुकी है। मुख्य आरोपी पर युवती से दुराचार और उसके बाद जबरन शादी के लिए दबाव बनाने का आरोप था। शिकायत के वक्त पीड़िता को नाबालिग बताया गया था, इस आधार पर इसमें मदद करने के अन्य पांच को पॉक्सो एक्ट के तहत केस में आरोपी बनाया गया था। हालांकि, बाद में अदालत में उसे बालिग (20) करार दिया गया था। बरी होने वालों में दिनेश, उसकी पत्नी सीमा, नारायण, रोहित और उसकी पत्नी काजल शामिल हैं। वहीं, मुख्य आरोपी टैनी शर्मा को अदालत भगौड़ा करार दे चुकी है।
11 नवंबर 2016 को पीड़िता के पिता ने सेक्टर-31 थाना पुलिस को शिकायत दी थी कि उनकी तीन बेटियों में से सबसे छोटी 15 वर्षीय बेटी का किसी ने अपहरण कर कर लिया है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ नाबालिग के अपहरण का केस दर्ज किया और उसकी तलाश शुरू कर दी। कुछ दिन बाद पीड़िता खुद घर आ गई। पुलिस ने उसके धारा 164 के तहत बयान दर्ज करवाए तो उसमें उसने कहा कि टैनी शर्मा ने उसे कॉल किया था और वह मर्जी से उसके साथ गई थी।
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वहीं, इससे पहले जांच अधिकारी के समक्ष पीड़िता ने सीआरपीसी की धारा 161 के तहत दर्ज कराए बयान में उसने सभी छह आरोपियों के नाम लिए थे। उसके अनुसार उन्होंने उसे अपहरण किया और टैनी से उसकी जबरदस्ती शादी के लिए दबाव बनाया था। इससे पहले टैनी ने उससे दुराचार किया था। इस पर पुलिस ने सभी छह आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 376, 120बी और पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज किया था। उस वक्त पीड़िता के खुद को नाबालिग बताए जाने पर पुलिस ने केस में पॉक्सो एक्ट की धारा भी लगाई थी।
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ट्रायल के दौरान अदालत ने पाया कि पीड़िता की असल में उम्र 20 साल है। इसका पता तब चला, जब उसके माता-पिता ने बताया कि पीड़िता का जुड़वा भाई भी है और वह 20 वर्ष का है। इसके अलावा क्रास एग्जामिनेशन के दौरान पीड़िता ने अदालत को बताया कि उसने सीआरपीसी की धारा 161 के तहत पुलिस को कभी कोई बयान नहीं दिए। बचाव पक्ष के अनुसार इसके अलावा भी उसके बयान में कई अंतर सामने आए। इस आधार पर अदालत ने सभी पांचों आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।
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