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Palwal News: खरना कर महिलाओं ने रखा 36 घंटे का निर्जला व्रत

Sat, 18 Nov 2023 10:36 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 18 Nov 2023 10:36 PM IST
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Women kept waterless fast for 36 hours after doing Kharna
कैप्शन: खरना के दौरान गुड, चावल की खीर बनाते हुए व्रतधारी महिलाएं
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गुड़, चावल की खीर, पूड़ी, खजूर, ठेकुआ का प्रसाद ग्रहण किया
आज दिया जाएगा डूबते सूर्य को अर्घ्य, सांस्कृतिक संध्या का भी होगा आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल। आस्था के महापर्व छठ पूजा के तहत शनिवार को 36 घंटे तक रखा जाने वाला निर्जला व्रत शुरू हो गया। व्रतियों ने शाम को खरना कर व्रत शुरू किया। इस दौरान पूजा-अर्चना भी की गई। शाम को गुड़ और गन्ने के रस से बनाई गई खीर, रोटी तथा पूड़ी का प्रसाद व्रतियों व उनके परिजनों ने ग्रहण किया। प्रसाद ग्रहण करने से पहले छठी माता को भोग लगाया गया। व्रतियों ने छठी माता से मनोकामना भी मांगी। खरना के दौरान स्वच्छता का विशेष ख्याल रखा गया तथा प्रसाद में नमक और चीनी का प्रयोग नहीं किया गया। बता दें कि खरना को लोहंडा भी कहा जाता है। रविवार को अस्ताचलगामी तथा सोमवार की सुबह उदयगामी भगवान भास्कर को अर्घ्य देकर पर्व का समापन होगा।
सुख-समृद्धि तथा संतान की लंबी उम्र व यशस्वी होने की कामना वाले लोक आस्था के महापर्व छठ में खरना के लिए पूजा में मिट्टी के दीपक, सरपोस व कढ़ाई का प्रयोग किया जाता है। व्रत करने वाली महिला को परवैतिन भी कहा जाता है। पूर्वांचल जन कल्याण समिति की महिला संयोजक आरती पटेल ने बताया कि व्रती फर्श पर चादर या कंबल बिछाकर सोते हैं तथा बिना सिलाई वाले कपडे़ पहनते हैं। महिलाएं साड़ी व पुरुष धोती पहनकर पूजा करते हैं। यह भी मान्यता है कि छठ का व्रत करने वालों को यह व्रत शुरू करने के बाद इसे सालों साल तब तक करना पड़ता है, जब तक कि अगली पीढ़ी की कोई विवाहित महिला इसके लिए तैयार न हो जाए। परिवार में किसी की मृत्यु होने पर यह पर्व नहीं मनाया जाता।
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क्या है खरना

छठ पूजा का व्रत रखने वाले लोग खरना के पूरे दिन उपवास रखते हैं। उसके बाद रात को खीर खाते हैं तथा फिर सूर्य को अर्घ्य देकर पारण करने तक न कुछ खाते हैं और न ही जल ग्रहण करते हैं। खरना एक प्रकार से शारीरिक और मानसिक शुद्धि की प्रक्रिया है। इसमें रात में भोजन के बाद अगले 36 घंटे का कठिन व्रत रखा जाता है। खरना के दिन छठ पूजा का प्रसाद बनाया जाता है। इसमें गुड़ और चावल की खीर, पूड़ियां, खजूर, ठेकुआ आदि बनाया जाता है। पूजा के लिए मौसमी फल और कुछ सब्जियों का भी प्रयोग होता है। व्रत रखने वाले लोग इस प्रसाद को छठ माता को अर्पित करते हैं। खरना के दिन प्रसाद ग्रहण कर वह व्रत प्रारंभ किया जाता है। छठ पूजा का प्रसाद बनाते समय इस बात का खास ध्यान रखा जाता है कि चूल्हे में आग के लिए केवल आम की लकड़ियों का ही प्रयोग हो।
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सांस्कृतिक कार्यक्रम की हुईं तैयारियां

रविवार को डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए तथा छठ महोत्सव के तहत होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। पूर्वांचल जनकल्याण समिति के प्रधान विजय पटेल ने बताया कि समिति द्वारा अगवानपुर स्थित घाट पर पूरी तैयारियां की गई हैं। घाट में शाम को पानी भर दिया गया तथा मंदिर पर रंगाई-पुताई की गई है। उन्होंने बताया कि रविवार को सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। साफ-सफाई करा दी गई है। तैयारियों में पूरे दिन पूर्वांचल जनकल्याण समिति के प्रधान विजय पटेल के साथ बृजेश शाह, पशुपतिनाथ मिश्रा, रामवृक्ष मुंशी, गणेश मुखिया, प्रमोद कुमार, आनंंद कुमार, दीलीप शाह, पवन कुमार, चतर सिंह लगे रहे। विजय पटेल ने बताया कि डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के समय आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि विधायक दीपक मंगला होंगे, जबकि उपायुक्त नेहा सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगी।
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