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Palwal News: जर्जर भवन में चल रहा पशु औषधालय, हादसे का मंडरा रहा खतरा
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छत और दीवारों में दरारों से बढ़ी चिंता, कर्मचारियों और पशुपालकों ने की जल्द मरम्मत की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल।
जिले के अहरवां गांव स्थित राजकीय पशु औषधालय की हालत बेहद खराब हो चुकी है। करीब 57 वर्ष पुराना यह जर्जर भवन कभी भी हादसे का कारण बन सकता है। भवन की छत गिरने की कगार पर है, दीवारों में गहरी दरारें पड़ चुकी हैं और फर्श भी जमीन में धंस चुकी है। ऐसे हालात में इस भवन में कार्यरत पशु चिकित्सक और कर्मचारी हर दिन जान जोखिम में डालकर काम करने को मजबूर हैं।
पशु चिकित्सा एवं पशुपालन विकास सहायक रविंद्र के अनुसार, बारिश के मौसम में स्थिति और भी बदतर हो जाती है। छत से लगातार पानी टपकता है, जिससे फर्श गीला हो जाता है और दवाइयों व वैक्सीन को सुरक्षित रखना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने बताया कि कई बार विभागीय अधिकारियों को इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। अस्पताल परिसर में पशुओं को बांधकर उपचार करने के लिए बनाए गए शेड भी क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जिससे इलाज की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। स्थानीय पशुपालकों का कहना है कि वे अपने पशुओं के इलाज के लिए यहां आते तो हैं, लेकिन जर्जर भवन और असुरक्षित माहौल के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है, खासकर बारिश के दिनों में हालात और खराब हो जाते हैं। गांव के लोगों और कर्मचारियों ने प्रशासन से मांग की है कि भवन की जल्द मरम्मत या पुनर्निर्माण कराया जाए, ताकि किसी बड़े हादसे से बचा जा सके और पशुओं को बेहतर इलाज मिल सके।
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औषधालय भवन की जर्जर स्थिति को देखते हुए मरम्मत और नवीनीकरण के लिए प्रस्ताव तैयार किया गया है। जल्द ही टीम भेजकर निरीक्षण कराया जाएगा और जल्द ही भवन की मरम्मत का कार्य शुरु किया जाएगा, ताकि कर्मचारियों और पशुपालकों को सुरक्षित और सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।
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- वीरेंद्र राठी, डिप्टी डायरेक्टर, पशु विभाग
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संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल।
जिले के अहरवां गांव स्थित राजकीय पशु औषधालय की हालत बेहद खराब हो चुकी है। करीब 57 वर्ष पुराना यह जर्जर भवन कभी भी हादसे का कारण बन सकता है। भवन की छत गिरने की कगार पर है, दीवारों में गहरी दरारें पड़ चुकी हैं और फर्श भी जमीन में धंस चुकी है। ऐसे हालात में इस भवन में कार्यरत पशु चिकित्सक और कर्मचारी हर दिन जान जोखिम में डालकर काम करने को मजबूर हैं।
पशु चिकित्सा एवं पशुपालन विकास सहायक रविंद्र के अनुसार, बारिश के मौसम में स्थिति और भी बदतर हो जाती है। छत से लगातार पानी टपकता है, जिससे फर्श गीला हो जाता है और दवाइयों व वैक्सीन को सुरक्षित रखना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने बताया कि कई बार विभागीय अधिकारियों को इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। अस्पताल परिसर में पशुओं को बांधकर उपचार करने के लिए बनाए गए शेड भी क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जिससे इलाज की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। स्थानीय पशुपालकों का कहना है कि वे अपने पशुओं के इलाज के लिए यहां आते तो हैं, लेकिन जर्जर भवन और असुरक्षित माहौल के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है, खासकर बारिश के दिनों में हालात और खराब हो जाते हैं। गांव के लोगों और कर्मचारियों ने प्रशासन से मांग की है कि भवन की जल्द मरम्मत या पुनर्निर्माण कराया जाए, ताकि किसी बड़े हादसे से बचा जा सके और पशुओं को बेहतर इलाज मिल सके।
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औषधालय भवन की जर्जर स्थिति को देखते हुए मरम्मत और नवीनीकरण के लिए प्रस्ताव तैयार किया गया है। जल्द ही टीम भेजकर निरीक्षण कराया जाएगा और जल्द ही भवन की मरम्मत का कार्य शुरु किया जाएगा, ताकि कर्मचारियों और पशुपालकों को सुरक्षित और सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।
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- वीरेंद्र राठी, डिप्टी डायरेक्टर, पशु विभाग