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पटाखों से आसमान में फैला जहरीला धुआं, सांस लेना मुश्किल, जिले में वायु गुणवत्ता सूचकांक 215 से बढ़कर 320 पहुंचा
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पटाखों के बाद पलवल में आसमान में छाया प्रदूषण
- फोटो : Palwal
पलवल। जिले में दिवाली के बाद प्रदूषण का स्तर एकाएक बढ़ गया है। दो दिन चले पटाखे व मौसम के अचानक आ रहे बदलाव के कारण वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 215 से बढ़कर 320 तक पहुंच गया था। हालांकि, दोपहर को 307 हो गया था। इस कारण शुक्रवार सुबह से लेकर शाम तक आसमान में धुंध छाई रही है। हालांकि, इस बार जिला प्रशासन की तरफ से पटाखों के स्टॉल लगाने की अनुमति नहीं थी। इसके बाद भी बाजार में पटाखे बेचे गए। रिहायशी क्षेत्रों में दुकानों पर पटाखे बेचे जा रहे थे।
प्रदूषण बढ़ने से सांस के रोगियों को परेशानी होने लगी है। उनका घर से निकलना मुश्किल हो गया। आम लोग भी पटाखों के धुएं से बेहद परेशान दिखे। जिन लोगों ने कोरोना महामारी में भी मास्क पहनना जरूरी नहीं समझा, दिवाली पर हुई आतिशबाजी के बाद वे भी मास्क पहने नजर आए। बताया गया कि पटाखों का धुआं लोगों के स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक है। इससे सांस लेने में परेशानी हो रही है। इससे आंखों में भी जलन की समस्या हो रही है।
हर घंटे बढ़ता रहा स्तर
जिले में बुधवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक 216 था। इसका स्तर इसी दिन से बढ़ना शुरू हो गया था और करीब 300 तक पहुंच गया था। दिवाली के दिन वायु गुणवत्ता सूचकांक 300 से बढ़कर 307 के पास पहुंच गया था। शुक्रवार सुबह करीब नौ बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक 320 दर्ज किया गया था। हर घंटे इसके स्तर में बढ़ोतरी होती रही।
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घर से निकलते समय मास्क का करें उपयोग
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी विजय सिंह ने बताया कि दो दिनों से वायु गुणवत्ता सूचकांक बढ़ गया है। पटाखों के धुएं के कारण हवा जहरीली हो गई है। यह हवा स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है। इसके अलावा धूल के कारण भी इसका स्तर बढ़ जाता है। दो से तीन दिन में प्रदूषण की स्थिति सामान्य हो सकती है। घरों से निकलते समय मास्क का प्रयोग अवश्य करें।
बच्चों को भी बचाकर रखें
जिला सिविल सर्जन डॉ. ब्रह्मदीप सिंह का कहना है कि दिवाली पर हुई आतिशबाजी से प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। ऐसे में सांस रोगी घर से बाहर कम निकलें तथा बाहर निकलते समय मुंह पर मास्क पहने। बच्चों को भी बचाकर रखें।
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प्रदूषण बढ़ने से सांस के रोगियों को परेशानी होने लगी है। उनका घर से निकलना मुश्किल हो गया। आम लोग भी पटाखों के धुएं से बेहद परेशान दिखे। जिन लोगों ने कोरोना महामारी में भी मास्क पहनना जरूरी नहीं समझा, दिवाली पर हुई आतिशबाजी के बाद वे भी मास्क पहने नजर आए। बताया गया कि पटाखों का धुआं लोगों के स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक है। इससे सांस लेने में परेशानी हो रही है। इससे आंखों में भी जलन की समस्या हो रही है।
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हर घंटे बढ़ता रहा स्तर
जिले में बुधवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक 216 था। इसका स्तर इसी दिन से बढ़ना शुरू हो गया था और करीब 300 तक पहुंच गया था। दिवाली के दिन वायु गुणवत्ता सूचकांक 300 से बढ़कर 307 के पास पहुंच गया था। शुक्रवार सुबह करीब नौ बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक 320 दर्ज किया गया था। हर घंटे इसके स्तर में बढ़ोतरी होती रही।
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घर से निकलते समय मास्क का करें उपयोग
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी विजय सिंह ने बताया कि दो दिनों से वायु गुणवत्ता सूचकांक बढ़ गया है। पटाखों के धुएं के कारण हवा जहरीली हो गई है। यह हवा स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है। इसके अलावा धूल के कारण भी इसका स्तर बढ़ जाता है। दो से तीन दिन में प्रदूषण की स्थिति सामान्य हो सकती है। घरों से निकलते समय मास्क का प्रयोग अवश्य करें।
बच्चों को भी बचाकर रखें
जिला सिविल सर्जन डॉ. ब्रह्मदीप सिंह का कहना है कि दिवाली पर हुई आतिशबाजी से प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। ऐसे में सांस रोगी घर से बाहर कम निकलें तथा बाहर निकलते समय मुंह पर मास्क पहने। बच्चों को भी बचाकर रखें।