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Palwal News: जोखिम भरी शिक्षा की यह डगर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 08 Aug 2026 01:52 AM IST
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This perilous path of education
नाले पर बने बिजली के खंभे के पुल को पार कर स्कूल जाते बच्चे
फलेंडी गांव के बच्चे पानी भरे खेतों की मेड़ के बीच से स्कूल जाने को विवश
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280 छात्र नामांकित हैं सरकारी प्राथमिक विद्यालय में, मिडिल स्कूल में 140


सद्दाम हुसैन

पिनगवां। साल लगातार बदल रहे हैं, लेकिन फलेंडी गांव के बच्चों की शिक्षा की राह में अब भी रोड़े हैं। अधिकारियों के आश्वासन तो मिले, लेकिन समाधान आज तक नहीं हुआ। आलम यह है कि सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंचना पड़ता है।
स्कूल तक जाने के लिए न तो कोई पक्का रास्ता है। बच्चों को पहले नाले पर रखे बिजली के खंभों को पार करना पड़ता है। उसके बाद वे खेतों की संकरी मेड़ के सहारे स्कूल पहुंचते हैं। बरसात में यही मेड़ कीचड़ और पानी से भर जाती है, जिससे कई बार बच्चे स्कूल के रास्ते से ही घर लौटने को मजबूर हो जाते हैं।
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विद्यार्थियों का कहना है कि बारिश के दिनों में मेड़ पर फिसलन और कीचड़ होने से कपड़े खराब हो जाते हैं। कई बार गिरने का डर बना रहता है। जब बच्चे बिना स्कूल पहुंचे कीचड़ लगे कपड़ों में घर लौटते हैं तो उन्हें माता-पिता की डांट भी सुननी पड़ती है। उनका कहना है कि पढ़ने की इच्छा होने के बावजूद रास्ते की वजह से उन्हें घर लाैटना पड़ता है।
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जिला उपायुक्त से की गई थी शिकायत
ग्रामीण इद्रीस बोहरा, कादिर खान, मकसूद खान, शाहिद खान, वाहिद खान आदि ने बताया कि स्कूल तक पहुंचने के लिए कोई सरकारी रास्ता नहीं है। शिक्षक और मिड-डे मील बनाने वाले कर्मचारी भी रोज इसी खतरनाक रास्ते से गुजरते हैं। मिड-डे मील का राशन दूसरे गांव से सिर पर उठाकर खेतों और मेड़ के रास्ते स्कूल तक लाना पड़ता है, जिससे काफी परेशानी होती है।
ग्रामीणों ने बताया कि इस गंभीर समस्या को लेकर जिला उपायुक्त के रात्रि विश्राम कार्यक्रम के दौरान भी शिकायत की गई थी। उस समय अधिकारियों ने जल्द समाधान का आश्वासन दिया था, लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। हाल ही में गांव की फिरनी की पैमाइश भी की गई थी। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि स्कूल के रास्ते की भी पैमाइश कराकर समाधान की दिशा में कदम बढ़ाया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

शिक्षा पर पड़ रहा असर
सरकारी मिडिल स्कूल के मुख्य अध्यापक जितेंद्र कुमार ने बताया कि पक्का रास्ता नहीं होने का सीधा असर विद्यार्थियों के दाखिले और नियमित उपस्थिति पर पड़ रहा है। सरकारी प्राइमरी स्कूल में पिछले वर्ष 340 विद्यार्थी नामांकित थे, जो अब घटकर 280 रह गए हैं। वहीं, मिडिल स्कूल में वर्तमान में करीब 140 विद्यार्थियों के नाम दर्ज हैं। उनका कहना है कि सुरक्षित रास्ता उपलब्ध होने से बच्चों की संख्या और उपस्थिति दोनों में सुधार आ सकता है। ग्रामीणों और स्कूल स्टाफ ने प्रशासन से मांग की है कि स्कूल तक पहुंचने के लिए जल्द से जल्द पक्का और सुरक्षित रास्ता बनाया जाए, ताकि मासूम बच्चों को अपनी पढ़ाई के लिए रोजाना जान जोखिम में न डालनी पड़े।

कोट
कई बार प्रशासन से मांग कर चुके हैं, लेकिन आज तक कोई समाधान नहीं हुआ। -इदरीस बोहरा, ग्रामीण

बरसात के दिनों में हालात और भी खराब हो जाते हैं। सड़क का निर्माण हो। -कादिर खान, ग्रामीण


सिर्फ बच्चे ही नहीं, शिक्षक व राशन लाने वाले कर्मचारी भी इसी रास्ते से आते-जाते हैं। -सुन्नी, ग्रामीण


सुरक्षित रास्ता बनने से बच्चों की उपस्थिति बढ़ेगी और पढ़ाई बेहतर ढंग से होगी। -जितेंद्र कुमार, मुख्य अध्यापक
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