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नारों और भाषणों से गुंजायमान रहने वाला धरनास्थल अब हुआ शांत

Sun, 12 Dec 2021 11:03 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 12 Dec 2021 11:03 PM IST
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The protest site, which was resonant with slogans and speeches, is now quiet
पलवल। किसान आंदोलन के दौरान नारों, प्रदर्शन, चौपाई, गीत, नृत्य और भाषणों से गुलजार रहने वाला केएमपी-केजीपी इंटरचेंज स्थित धरनास्थल रविवार को वीरान नजर आया। केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों ने किसानों के अंदर संघर्ष का ऐसा जज्बा पैदा किया कि घर-परिवार सबको भूल कर, उन्होंने धरनास्थल को ही अपना घर बना लिया। 24 घंटे धरनास्थल पर रहने के कारण किसानों की आत्मीयता यहां रहने वाले लोगों से ऐसी जुड़ी कि उन्हें जहां कृषि कानून वापसी की खुशी हुई, वहीं उनसे बिछड़ने का दुख भी हुआ। रविवार को धरनास्थल पर लगे तंबू व झोपड़ियों को हटाने के दौरान किसान भावुक नजर आए। किसानों का कहना था कि आने वाले दो-तीन दिन में धरनास्थल पूरी तरह से खाली कर दिया जाएगा।
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दरअसल, केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में पिछली साल 26 नवंबर को किसान आंदोलन शुरू हुआ तो स्थानीय किसान नेता दिल्ली कूच के लिए चल दिए। किसान नेताओं को दिल्ली पहुंचने से पहले ही फरीदाबाद में गिरफ्तार कर वापस पलवल छोड़ दिया गया। इसके बाद दो दिसंबर को मध्य प्रदेश से दिल्ली कूच के लिए जाते किसानों को पुलिस ने केएमपी-केजीपी इंटरचेंज पर बैरिकेट लगाकर रोक दिया तो राष्ट्रीय राजमार्ग पर ही धरना शुरू हो गया। शुरुआत में मध्य प्रदेश व बुंदेलखंड के किसानों ने मोर्चा संभाला। इनके संघर्ष को देख स्थानीय किसान भी उनसे जुड़ने लगे और किसान आंदोलन ने एक मेले का रूप ले लिया। धरनास्थल पर लगने वाले लंगर में हजारों लोग भोजन ग्रहण करते थे। गांवों के सामूहिक कार्यक्रमों की तरह से सभी जाति व धर्मों के लोग धरनास्थल पर एक साथ खाने-पीने व सोने लगे थे। क्षेत्रीय किसान बाहर के किसानों को मेहमान की तरह रखने लगे थे। इस दौरान कई बार प्रदर्शन हुए।
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बीती 26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड के दौरान लाल किले की घटना के बाद प्रशासन के दबाव में मध्य प्रदेश व बुंदेलखंड के किसानों को धरनास्थल से हटा कर वापस भेज दिया गया। इसके बाद क्षेत्रीय किसानों ने हार नहीं मानी और पंचायत आयोजित कर दोबारा से उसी स्थान पर धरना शुरू कर दिया। एक साल के दौरान किसानों ने संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान को मजबूती के साथ पूरा किया। दो बार रेल मार्ग, दो बार राष्ट्रीय राजमार्ग व दो बार केएमपी एक्सप्रेसवे को जाम किया गया। कई बार ट्रैक्टर रैली निकालकर प्रदर्शन भी किए गए।
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आंदोलन के दौरान मध्य प्रदेश और बुंदेलखंड के किसानों ने स्थानीय किसानों में संघर्ष का जज्बा पैदा किया। एक साल के दौरान रोजाना एक पाल की तरफ से किसान धरनास्थल पर पहुंचते और कृषि कानूनों के खिलाफ रणनीति तैयार की जाती थी। आंदोलन के दौरान एक-दूसरे से ऐसा जुड़ाव हो गया कि अब बिछड़ने का दुख तो होना ही था।

- मास्टर महेंद्र सिंह चौहान, नेता, किसान संघर्ष समिति पलवल
धरनास्थल पर रोजाना प्रदर्शन, चौपाई, भजन आदि कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाते थे, जिन्होंने कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों में जोश भरने का काम किया। महिला किसानों ने भी धरने में कंधे से कंधा मिलाकर साथ दिया। आंदोलन से किसानों में जली संघर्ष की चिंगारी को बुझने नहीं दिया जाएगा।
- धर्मचंद घुघेरा, जिला प्रधान, अखिल भारतीय किसान सभा
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