{"_id":"5fc0fc758ebc3e9bd506333f","slug":"the-cold-started-to-increase-the-rain-shelters-have-not-yet-become-palwal-news-noi5506394128","type":"story","status":"publish","title_hn":"बढ़ने लगी ठंड, अब तक नहीं बने रैन बसेरे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बढ़ने लगी ठंड, अब तक नहीं बने रैन बसेरे
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पलवल। सर्दी का आगमन हो चुका है, लेकिन प्रशासन ने अभी तक रैन बसेरे बनाने शुरू नहीं किए हैं। हालांकि रेडक्रास सोसाइटी द्वारा जिला उपायुक्त को इसे शुरू करने के लिए पत्र भी लिखा जा चुका है। स्थिति यह है कि लोगों को बस अड्डे या रेलवे स्टेशन पर ठंड में रात गुजारनी पड़ रही है।
दिल्ली-मथुरा के बीच पलवल प्रमुख शहर है। ऐसे में बाहर से आने वाले यात्रियों को मथुरा, आगरा व अन्य राज्यों में जाने के लिए कई बार पलवल से ही ट्रेन व बस पकड़नी पड़ती है। इसके अलावा जिले में बाहर के आए मजदूर भी काफी संख्या में हैं, जिनके पास अपना मकान नहीं है। वे गर्मियों में तो धर्मशालाओं व रेलवे स्टेशनों पर रात गुजारते हैं। सर्दियों में उन्हें रैन बसेरों की जरूरत पड़ती है। ऐसे लोगों को काफी दिक्कत उठानी पड़ रही है। शहर की सामाजिक संस्थाएं उन्हें ठंड से बचाव के लिए कंबल दे देती हैं।
यहां बनाए जाते हैं रैन बसेरे
जिला रेडक्रास व जिला प्रशासन द्वारा सात स्थानों पर रैन बसेरे बनाए जाते हैं। इनमें जाट धर्मशाला, ब्राह्मण धर्मशाला, बस अड्डे के अंदर, श्रीराम मंदिर हथीन, वैश्य अग्रवाल सभा होडल, उपकार मंडल हसनपुर आदि में रैन बसेरे बनाए जाते हैं। पहले जिले में कई स्थानों पर रैन बसेरे बनाए गए थे, लेकिन उनमें ठहरने वालों की संख्या न होने के कारण इस बार इन्हें कम ही बनाया जाएगा।
विज्ञापन
वर्जन-
रैन बसेरे जल्द शुरू कर दिए जाएंगे। इसके लिए जिला उपायुक्त से अनुमति मिल गई है। जहां रैन बसेरे शुरू कराए जाएंगे, वहां धर्मशालाओं के जरूरत का सामान, रजाई-गद्दे आदि पहुंचा दिया जाएगा। वहीं सोसाइटी की ओर से सड़कों, रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों पर रात गुजारने वालों को रैन बसेरों में भिजवाया जाएगा। - विकास कुमार, सचिव जिला रेडक्रास पलवल
विज्ञापन
दिल्ली-मथुरा के बीच पलवल प्रमुख शहर है। ऐसे में बाहर से आने वाले यात्रियों को मथुरा, आगरा व अन्य राज्यों में जाने के लिए कई बार पलवल से ही ट्रेन व बस पकड़नी पड़ती है। इसके अलावा जिले में बाहर के आए मजदूर भी काफी संख्या में हैं, जिनके पास अपना मकान नहीं है। वे गर्मियों में तो धर्मशालाओं व रेलवे स्टेशनों पर रात गुजारते हैं। सर्दियों में उन्हें रैन बसेरों की जरूरत पड़ती है। ऐसे लोगों को काफी दिक्कत उठानी पड़ रही है। शहर की सामाजिक संस्थाएं उन्हें ठंड से बचाव के लिए कंबल दे देती हैं।
विज्ञापन
यहां बनाए जाते हैं रैन बसेरे
जिला रेडक्रास व जिला प्रशासन द्वारा सात स्थानों पर रैन बसेरे बनाए जाते हैं। इनमें जाट धर्मशाला, ब्राह्मण धर्मशाला, बस अड्डे के अंदर, श्रीराम मंदिर हथीन, वैश्य अग्रवाल सभा होडल, उपकार मंडल हसनपुर आदि में रैन बसेरे बनाए जाते हैं। पहले जिले में कई स्थानों पर रैन बसेरे बनाए गए थे, लेकिन उनमें ठहरने वालों की संख्या न होने के कारण इस बार इन्हें कम ही बनाया जाएगा।
विज्ञापन
वर्जन-
रैन बसेरे जल्द शुरू कर दिए जाएंगे। इसके लिए जिला उपायुक्त से अनुमति मिल गई है। जहां रैन बसेरे शुरू कराए जाएंगे, वहां धर्मशालाओं के जरूरत का सामान, रजाई-गद्दे आदि पहुंचा दिया जाएगा। वहीं सोसाइटी की ओर से सड़कों, रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों पर रात गुजारने वालों को रैन बसेरों में भिजवाया जाएगा। - विकास कुमार, सचिव जिला रेडक्रास पलवल