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लोगों के मन में अमिट छाप छोड़ गया धरना
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पलवल। पिछले दो माह से दिल्ली-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग पर चला किसानों का ऐतिहासिक धरना अपने पीछे अनेकों यादें छोड़ गया। बेशक धरना समाप्त हो गया, लेकिन लंगर सेवा में जुटे किसानों का सेवा भाव लोगों के मन में अमिट छाप बना गया। कृषि कानूनों के विरोध में अपने घरों को छोड़कर धरना दे रहे किसानों की वापसी का दर्द उनकी आंखों से छलक पड़ा। घर वापसी करते किसानों ने कहा कि जहां रोजाना लोगों का हुजूम जमा होता था, वहीं लोग उनके आंसू पोंछने तक नहीं आए।
दो दिसबर को मध्य प्रदेश व बुंदेलखंड से किसानों का जत्था दिल्ली कूच के लिए जा रहा था। राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित केएमपी-केजीपी इंटरचेंज पर पुलिस ने अवरोधक लगाकर किसानों को रोक दिया। किसानों ने राजमार्ग पर धरना शुरू कर दिया। धरना शुरू हुआ तो तालाबंदी गुरुद्वारा मध्य प्रदेश द्वारा लंगर सेवा शुरू कर दी गई। गुरू का ताल गुरुद्वारा आगरा द्वारा चाय, पकौड़े, पापे, बिस्कुट की सेवा शुरू की गई। मात्र 200 किसानों के शुरू किए धरने में जल्द ही हजारों के संख्या में किसान आने लगे। समय यह आया कि रोजाना सात से आठ हजार लोगों के लिए लंगर तैयार किए जाने लगा। स्थानीय लोगों ने धरने को भरपूर समर्थन दिया। बीती छह जनवरी को पटियाला से बाबा लखबीर सिंह के नेतृत्व में लंगर व दवाइयों की सेवा शुरू कर दी गई।
बैठने तक की नहीं थी जगह, अब हुआ वीरान
धरने में किसानों की संख्या इतनी ज्यादा हो जाती थी, कि उन्हें बैठने तक के लिए जगह नहीं मिलती थी। विभिन्न पालों व खापों से लोग रैलियों के माध्यम से धरने को समर्थन देने पहुंचते थे। लंगर के लिए गांवों से ट्रॉली भर-भरकर सामान पहुंचाया जाता था। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता भी पहुंचे रहते थे। लेकिन बृहस्पतिवार की शाम को जगह वीरान हो गई।
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दो दिसबर को मध्य प्रदेश व बुंदेलखंड से किसानों का जत्था दिल्ली कूच के लिए जा रहा था। राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित केएमपी-केजीपी इंटरचेंज पर पुलिस ने अवरोधक लगाकर किसानों को रोक दिया। किसानों ने राजमार्ग पर धरना शुरू कर दिया। धरना शुरू हुआ तो तालाबंदी गुरुद्वारा मध्य प्रदेश द्वारा लंगर सेवा शुरू कर दी गई। गुरू का ताल गुरुद्वारा आगरा द्वारा चाय, पकौड़े, पापे, बिस्कुट की सेवा शुरू की गई। मात्र 200 किसानों के शुरू किए धरने में जल्द ही हजारों के संख्या में किसान आने लगे। समय यह आया कि रोजाना सात से आठ हजार लोगों के लिए लंगर तैयार किए जाने लगा। स्थानीय लोगों ने धरने को भरपूर समर्थन दिया। बीती छह जनवरी को पटियाला से बाबा लखबीर सिंह के नेतृत्व में लंगर व दवाइयों की सेवा शुरू कर दी गई।
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बैठने तक की नहीं थी जगह, अब हुआ वीरान
धरने में किसानों की संख्या इतनी ज्यादा हो जाती थी, कि उन्हें बैठने तक के लिए जगह नहीं मिलती थी। विभिन्न पालों व खापों से लोग रैलियों के माध्यम से धरने को समर्थन देने पहुंचते थे। लंगर के लिए गांवों से ट्रॉली भर-भरकर सामान पहुंचाया जाता था। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता भी पहुंचे रहते थे। लेकिन बृहस्पतिवार की शाम को जगह वीरान हो गई।
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