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Palwal News: तीन दशक से रास्ता बदहाल, जलभराव से ग्रामीण बेहाल
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पानी में डूबे घर
सफाई के लिए 16 लाख और सीसीटीवी के लिए 17 लाख रुपये आया पर नहीं दिखा काम
संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। करीब 15 हजार की आबादी वाले गांव सालाहेड़ी में जलभराव, टूटी सड़कों और गंदे पानी की निकासी की समस्या ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। गांव के कई रास्तों पर लंबे समय से पानी जमा है। शनिवार को आयोजित संवाद कार्यक्रम में ग्रामीणों ने बताया कि बरसात के बाद स्थिति और गंभीर हो जाती है। पानी की निकासी की व्यवस्था नहीं होने से बारिश खत्म होने के बाद भी राहत नहीं मिलती।
कच्ची मस्जिद से अड़बर रोड को जोड़ने वाले रास्ते पर गंदा पानी जमा है। वहीं, सालाहेड़ी महिला कॉलेज से सरकारी स्कूल तक करीब 400 मीटर सड़क पर कई रास्तों को जोड़ते समय सड़क कहीं ऊंची तो कहीं नीची बना दी गई है। इसके कारण पानी की निकासी नहीं हो पाती और सड़क पर जलभराव बना रहता है।
नंगलिया मोहल्ले में हाजी बसीर वाली मस्जिद के पास फिरनी वाले रास्ते की सड़क टूटी हुई है। यहां भी पानी निकासी की व्यवस्था नहीं होने से लोगों को गंदे पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ता है। रमजू के घर से इल्ली के घर तक करीब 200 मीटर लंबे रास्ते पर कीचड़ जमा है। ग्रामीणों का कहना है कि यह रास्ता करीब तीन दशक से बदहाल है।
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तालाब के पास करीब 100 घरों की बस्ती में भी जलभराव की समस्या बनी हुई है। ग्रामीणों के अनुसार बरसात में यहां पानी भर जाता है और निकासी नहीं होने के कारण लंबे समय तक जमा रहता है। इससे घरों में रहने वाले लोगों को रोजमर्रा के काम के लिए भी परेशानी उठानी पड़ रही है।
ग्रामीण मुबस्सीर बदर ने आरोप लगाया कि सफाई व्यवस्था के लिए करीब 16 लाख रुपये की राशि आने की बात कही गई, लेकिन उसका असर गांव में दिखाई नहीं दे रहा है। उन्होंने मामले की जांच कराने की मांग की। ग्रामीणों के अनुसार गांव में सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए भी करीब 17 लाख रुपये आए थे, लेकिन गांव में एक भी कैमरा दिखाई नहीं देता।
खंड एवं विकास पंचायत अधिकारी अंकित यादव का कहना है कि जलभराव व सफाई न होने की जानकारी नहीं है। टीम भेजकर जानकारी जुटाई जाएगी।
कोट
सफाई और विकास के नाम पर राशि आने के बावजूद गांव की समस्याएं जस की तस हैं। अधिकारियों को स्थिति की जांच करनी चाहिए। - मुबस्सीर बदर
जलभराव और टूटी सड़कों के कारण बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे अधिक परेशानी होती है। रास्तों से निकलना मुश्किल हो चुका है। - कासिम
रमजू के घर से इल्ली के घर तक का रास्ता करीब 30 साल से बदहाल है। कई बार समस्या बताने के बावजूद स्थायी समाधान नहीं हुआ। - मौसीम
तालाब के पास रहने वाले 100 परिवार पानी की समस्या से परेशान हैं। प्रशासन को पानी निकासी की स्थायी व्यवस्था करानी चाहिए। - जेतुनी
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संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। करीब 15 हजार की आबादी वाले गांव सालाहेड़ी में जलभराव, टूटी सड़कों और गंदे पानी की निकासी की समस्या ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। गांव के कई रास्तों पर लंबे समय से पानी जमा है। शनिवार को आयोजित संवाद कार्यक्रम में ग्रामीणों ने बताया कि बरसात के बाद स्थिति और गंभीर हो जाती है। पानी की निकासी की व्यवस्था नहीं होने से बारिश खत्म होने के बाद भी राहत नहीं मिलती।
कच्ची मस्जिद से अड़बर रोड को जोड़ने वाले रास्ते पर गंदा पानी जमा है। वहीं, सालाहेड़ी महिला कॉलेज से सरकारी स्कूल तक करीब 400 मीटर सड़क पर कई रास्तों को जोड़ते समय सड़क कहीं ऊंची तो कहीं नीची बना दी गई है। इसके कारण पानी की निकासी नहीं हो पाती और सड़क पर जलभराव बना रहता है।
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नंगलिया मोहल्ले में हाजी बसीर वाली मस्जिद के पास फिरनी वाले रास्ते की सड़क टूटी हुई है। यहां भी पानी निकासी की व्यवस्था नहीं होने से लोगों को गंदे पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ता है। रमजू के घर से इल्ली के घर तक करीब 200 मीटर लंबे रास्ते पर कीचड़ जमा है। ग्रामीणों का कहना है कि यह रास्ता करीब तीन दशक से बदहाल है।
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तालाब के पास करीब 100 घरों की बस्ती में भी जलभराव की समस्या बनी हुई है। ग्रामीणों के अनुसार बरसात में यहां पानी भर जाता है और निकासी नहीं होने के कारण लंबे समय तक जमा रहता है। इससे घरों में रहने वाले लोगों को रोजमर्रा के काम के लिए भी परेशानी उठानी पड़ रही है।
ग्रामीण मुबस्सीर बदर ने आरोप लगाया कि सफाई व्यवस्था के लिए करीब 16 लाख रुपये की राशि आने की बात कही गई, लेकिन उसका असर गांव में दिखाई नहीं दे रहा है। उन्होंने मामले की जांच कराने की मांग की। ग्रामीणों के अनुसार गांव में सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए भी करीब 17 लाख रुपये आए थे, लेकिन गांव में एक भी कैमरा दिखाई नहीं देता।
खंड एवं विकास पंचायत अधिकारी अंकित यादव का कहना है कि जलभराव व सफाई न होने की जानकारी नहीं है। टीम भेजकर जानकारी जुटाई जाएगी।
कोट
सफाई और विकास के नाम पर राशि आने के बावजूद गांव की समस्याएं जस की तस हैं। अधिकारियों को स्थिति की जांच करनी चाहिए। - मुबस्सीर बदर
जलभराव और टूटी सड़कों के कारण बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे अधिक परेशानी होती है। रास्तों से निकलना मुश्किल हो चुका है। - कासिम
रमजू के घर से इल्ली के घर तक का रास्ता करीब 30 साल से बदहाल है। कई बार समस्या बताने के बावजूद स्थायी समाधान नहीं हुआ। - मौसीम
तालाब के पास रहने वाले 100 परिवार पानी की समस्या से परेशान हैं। प्रशासन को पानी निकासी की स्थायी व्यवस्था करानी चाहिए। - जेतुनी