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मार्केटिंग बोर्ड के अधिकारियों को नोटिस जारी कर मांगा रिकॉर्ड
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पलवल। मेरी फसल-मेरा ब्योरा में फर्जी तरीके से जमीनों का पंजीकरण करा 50-50 लाख रुपये का गेहूं बेचने के मामले में सरकारी खरीद एजेंसियां और मार्केटिंग बोर्ड के अधिकारी संदेह के घेरे में आ गए हैं। अधिकारियों के साथ-साथ कुछ आढ़तियों पर भी इसकी गाज गिरेगी। मुख्यमंत्री के आदेश पर शुरू की गई जांच में अतिरिक्त उपायुक्त के नेतृत्व वाली कमेटी सभी पहलुओं पर जांच कर रही है। उन किसानों के नामों की भी सूची तैयार कर ली है, जिनके खाते में गेहूं बेचने के बदले 50-50 लाख रुपये डाले गए हैं। इसके अलावा तहसीलदार से भी सूची में शामिल किसानों की जमीनों का ब्योरा मांगा गया है। जांच कमेटी ने संबंधित सरकारी खरीद एजेंसियों और मार्केटिंग बोर्ड के अधिकारियों को नोटिस जारी कर गेहूं खरीद और ऑनलाइन पोर्टल का रिकार्ड मांगा है।
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29 किसानों की हुई पहचान
पोर्टल पर फर्जी पंजीकरण करा गेहूं बेचने के बदले जिन किसानों के खाते में 50-50 लाख रुपये डाले गए हैं, ऐसे 29 किसानों की पहचान हो चुकी है। इनमें 20 हसनपुर और 9 किसान पलवल के हैं। इन किसानों को नोटिस भेजकर जमीनों का रिकार्ड मांगा गया है।
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फर्जी दस्तावेज द्वारा बना दिया पट्टेदार
मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकरण करवाने के लिए जमीन का मालिक, कास्तकार या पट्टेदार होना जरूरी है। लेकिन इस बार जिन लोगों के पास जमीन नहीं है, उन्हें फर्जी दस्तावेज द्वारा पट्टेदार बना दिया तथा उनके पट्टे में उन लोगों की जमीन जोड़ दी गई, जिन्होंने पोर्टल पर गेहूं बेचने के लिए पंजीकरण नहीं कराया था। ऐसे भी किसानों की जमीन पट्टे में जोड़ दी गई, जो कभी मंडी में गेहूं नहीं बेचते हैं। इस तरह से फर्जीवाड़ा कर किसानों द्वारा 50-50 लाख रुपये का गेहूं बेच दिया गया। सूत्रों की माने तो इस फर्जीवाड़े में मंडी अधिकारियों के साथ-साथ आढ़ती और सरकारी खरीद एजेंसी के अधिकारी भी शामिल हैं।
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20 एकड़ से अधिक जमीन वालों की हो रही जांच
20 एकड़ से अधिक जमीन और 500 क्विंटल से अधिक गेहूं का पंजीकरण करवाने वाले किसानों की जांच की जा रही है। किसानों की पहचान कर उन्हें नोटिस जारी किए जा रहे हैं। नोटिस में पटवारी से प्रमाणित जमीन रिकार्ड (फर्द) पेश करने को कहा गया है। पट्टा दर्ज करवाने वालों को तहसीलदार से रजिस्टर्ड पट्टे के कागजात पेश करने के आदेश दिए गए हैं। जिन किसानों के नाम और पते की पहचान की गई है, उनमें नोटिस जारी कर जांच समिति के सामने पेश होकर एक सप्ताह में जवाब देने को कहा गया है।
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खाते भी कराए जा रहे सीज
जिन 29 किसानों की पहचान की गई है, उनके खाते भी सीज कराए जा रहे हैं। ताकि धनराशि न निकाल सकें। जांच के बाद जो दोषी मिलेगा, उसकी धनराशि जब्त कर कार्रवाई की जाएगी।
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दोषी साबित होने पर दर्ज होगा मुकदमा
जांच कमेटी के मुख्य अधिकारी अतिरिक्त उपायुक्त सतेंद्र कुमार दूहन का कहना है कि जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक किसी के नाम उजागर नहीं किए जाएंगे। किसानों को दस्तावेज सहित पेश होने के लिए नोटिस जारी किए जा रहे हैं। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कार्रवाई की जाएगी।
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29 किसानों की हुई पहचान
पोर्टल पर फर्जी पंजीकरण करा गेहूं बेचने के बदले जिन किसानों के खाते में 50-50 लाख रुपये डाले गए हैं, ऐसे 29 किसानों की पहचान हो चुकी है। इनमें 20 हसनपुर और 9 किसान पलवल के हैं। इन किसानों को नोटिस भेजकर जमीनों का रिकार्ड मांगा गया है।
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फर्जी दस्तावेज द्वारा बना दिया पट्टेदार
मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकरण करवाने के लिए जमीन का मालिक, कास्तकार या पट्टेदार होना जरूरी है। लेकिन इस बार जिन लोगों के पास जमीन नहीं है, उन्हें फर्जी दस्तावेज द्वारा पट्टेदार बना दिया तथा उनके पट्टे में उन लोगों की जमीन जोड़ दी गई, जिन्होंने पोर्टल पर गेहूं बेचने के लिए पंजीकरण नहीं कराया था। ऐसे भी किसानों की जमीन पट्टे में जोड़ दी गई, जो कभी मंडी में गेहूं नहीं बेचते हैं। इस तरह से फर्जीवाड़ा कर किसानों द्वारा 50-50 लाख रुपये का गेहूं बेच दिया गया। सूत्रों की माने तो इस फर्जीवाड़े में मंडी अधिकारियों के साथ-साथ आढ़ती और सरकारी खरीद एजेंसी के अधिकारी भी शामिल हैं।
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20 एकड़ से अधिक जमीन वालों की हो रही जांच
20 एकड़ से अधिक जमीन और 500 क्विंटल से अधिक गेहूं का पंजीकरण करवाने वाले किसानों की जांच की जा रही है। किसानों की पहचान कर उन्हें नोटिस जारी किए जा रहे हैं। नोटिस में पटवारी से प्रमाणित जमीन रिकार्ड (फर्द) पेश करने को कहा गया है। पट्टा दर्ज करवाने वालों को तहसीलदार से रजिस्टर्ड पट्टे के कागजात पेश करने के आदेश दिए गए हैं। जिन किसानों के नाम और पते की पहचान की गई है, उनमें नोटिस जारी कर जांच समिति के सामने पेश होकर एक सप्ताह में जवाब देने को कहा गया है।
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खाते भी कराए जा रहे सीज
जिन 29 किसानों की पहचान की गई है, उनके खाते भी सीज कराए जा रहे हैं। ताकि धनराशि न निकाल सकें। जांच के बाद जो दोषी मिलेगा, उसकी धनराशि जब्त कर कार्रवाई की जाएगी।
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दोषी साबित होने पर दर्ज होगा मुकदमा
जांच कमेटी के मुख्य अधिकारी अतिरिक्त उपायुक्त सतेंद्र कुमार दूहन का कहना है कि जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक किसी के नाम उजागर नहीं किए जाएंगे। किसानों को दस्तावेज सहित पेश होने के लिए नोटिस जारी किए जा रहे हैं। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कार्रवाई की जाएगी।