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Palwal News: आभा आईडी से जुड़ा आरसीएच पोर्टल, अब मातृ-शिशु का इलाज और पहचान होगी और भी आसान
Sat, 06 Sep 2025 09:50 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पलवल
संवाद न्यूज एजेंसी, पलवल
Updated Sat, 06 Sep 2025 09:50 PM IST
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हथीन। स्वास्थ्य विभाग ने मातृ-शिशु मृत्यु दर कम करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य (आरसीएच) पोर्टल का नया वर्जन 2.0 लॉन्च किया है। इसे अब आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता (आभा) आईडी से जोड़ा गया है। इससे देशभर में कहीं भी मातृ-शिशु की पहचान और इलाज आसानी से संभव हो सकेगा।
आभा आईडी, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत 14 अंकों की एक यूनिक संख्या है, जिसमें हर व्यक्ति का स्वास्थ्य रिकॉर्ड डिजिटल रूप से सुरक्षित रहता है और जरूरत पड़ने पर तुरंत शेयर किया जा सकता है। एएनएम (स्वास्थ्यकर्मी) गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण कर उन्हें आरसीएच आईडी जारी कर रही हैं। इस आईडी के आधार पर गर्भवती महिलाओं को सरकारी अस्पतालों में मुफ्त अल्ट्रासाउंड सुविधा मिलेगी और उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था की पहचान भी समय रहते हो सकेगी।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र छांयसा के इंचार्ज डॉ. देवेंद्र कुमार ने बताया कि आरसीएच पोर्टल के पहले वर्जन में केवल गर्भवती का डिजिटल डाटा दर्ज होता था, लेकिन अब नए वर्जन के साथ एक ही आईडी से देशभर में कहीं भी इलाज संभव हो जाएगा। इसके लिए विभागीय कंप्यूटर ऑपरेटरों को प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है।
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जिले में गर्भवती महिलाओं और अन्य मरीजों की जांच के लिए चार मोबाइल हेल्थ यूनिट (एमएचयू) चलाई जा रही हैं। कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए सहेली कार्यक्रम भी लागू किया गया है, जिसके तहत दूसरी बार गर्भवती महिला की देखभाल की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ महिला एवं बाल कल्याण विभाग को भी सौंपी गई है। वहीं, जिले में प्रसव और बच्चों के जन्म का डाटा हर सप्ताह सिविल रजिस्ट्रेशन पोर्टल (सीआरएस) पर अपडेट किया जा रहा है।
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आभा आईडी, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत 14 अंकों की एक यूनिक संख्या है, जिसमें हर व्यक्ति का स्वास्थ्य रिकॉर्ड डिजिटल रूप से सुरक्षित रहता है और जरूरत पड़ने पर तुरंत शेयर किया जा सकता है। एएनएम (स्वास्थ्यकर्मी) गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण कर उन्हें आरसीएच आईडी जारी कर रही हैं। इस आईडी के आधार पर गर्भवती महिलाओं को सरकारी अस्पतालों में मुफ्त अल्ट्रासाउंड सुविधा मिलेगी और उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था की पहचान भी समय रहते हो सकेगी।
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प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र छांयसा के इंचार्ज डॉ. देवेंद्र कुमार ने बताया कि आरसीएच पोर्टल के पहले वर्जन में केवल गर्भवती का डिजिटल डाटा दर्ज होता था, लेकिन अब नए वर्जन के साथ एक ही आईडी से देशभर में कहीं भी इलाज संभव हो जाएगा। इसके लिए विभागीय कंप्यूटर ऑपरेटरों को प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है।
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जिले में गर्भवती महिलाओं और अन्य मरीजों की जांच के लिए चार मोबाइल हेल्थ यूनिट (एमएचयू) चलाई जा रही हैं। कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए सहेली कार्यक्रम भी लागू किया गया है, जिसके तहत दूसरी बार गर्भवती महिला की देखभाल की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ महिला एवं बाल कल्याण विभाग को भी सौंपी गई है। वहीं, जिले में प्रसव और बच्चों के जन्म का डाटा हर सप्ताह सिविल रजिस्ट्रेशन पोर्टल (सीआरएस) पर अपडेट किया जा रहा है।