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दादरी-मुंबई रेलवे फ्रेट कॉरिडोर घोटाला : प्रोजेक्ट शुरू होने से अब तक का रिकॉर्ड दे रेलवे
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पलवल। दादरी-मुंबई रेलवे फ्रेट कॉरिडोर के लिए अधिकृत जमीन में हुई धांधली के मामले में जिला पुलिस ने रेलवे विभाग को नोटिस देकर योजना के तहत जमीन अधिग्रहण की शुरुआत से लेकर अभी तक का सारा रिकॉर्ड मांगा है। नोटिस में रेलवे से जमीन अधिग्रहण के लिए तथा अन्य मदों के लिए जारी की गई राशि की भी जानकारी मांगी गई है।
पुलिस द्वारा रेलवे को यह नोटिस 10 जुलाई को दिया गया था, लेकिन अभी तक रेलवे की तरफ से कोई जानकारी नहीं दी गई है। वहीं, मामले में कानूनगो के तौर पर गिरफ्तार किया गया सुरेश नामक व्यक्ति न तो कानूनगो है और न ही पटवारी। बल्कि वह तो आउटसोर्स पर कार्य करता है। पुलिस द्वारा दिए गए नोटिस का रेलवे से जवाब आने के बाद इस मामले में कई अन्य अधिकारियों पर भी गाज गिर सकती है।
यह है मामला
उत्तर प्रदेश के दादरी से नवी मुंबई रेलवे फ्रेट कॉरिडोर के लिए जिले के करीब 10 गांवों की जमीन अधिगृहीत की गई। गांव असावटी, जटौला, मैदापुर, पृथला में रेलवे फ्रेट कॉरिडोर के लिए अधिगृहीत जमीन का अवार्ड घोषित कर दिया गया। रेलवे की पॉलिसी के अनुसार, जिस किसान की जमीन अधिगृहीत हुई, उसे सरकारी नौकरी या करीब साढ़े पांच लाख रुपये दिए जाने थे। साढ़े पांच लाख रुपये लेने के लिए 6, 7, 12, 15 और 30 गज के टुकड़ों में की गई रजिस्ट्रियों में करीब 400 लोग शामिल कर लिए गए। जमाबंदी में जहां एक व्यक्ति जमीन का मालिक है, वहीं रजिस्ट्री में 30 से 40 लोगों को शामिल किया।
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अधिगृहीत जमीन का अवार्ड घोषित करते समय एक नंबर पर एक व्यक्ति के नाम अवार्ड घोषित किया जाना था और वहीं राशि टुकड़ों में बांटी जानी थी। छह गज जमीन का 45 लाख रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से 5578 रुपये का मुआवजा 31 लोगों में दिया जाना था। रेलवे के नियमों के तहत सभी 31 लोगों को पांच-पांच लाख के हिसाब से डेढ़ करोड़ रुपये अवार्ड घोषित कर दिया गया। करीब 100 गज जमीन के लिए 400 मालिकों को साढे़ 22 करोड़ रुपये अवार्ड घोषित किया गया। रेलवे अधिकारियों को इतनी मोटी राशि जारी करने के दौरान शक हुआ और मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से की गई।
मामले का खुलासा होने पर जांच के लिए अतिरिक्त उपायुक्त सतेंद्र दूहन के नेतृत्व में कमेटी गठित की गई। कमेटी में सीईओ जिला परिषद अमित कुमार और डीआरओ रामफल कटारिया को शामिल किया गया। जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने से पहले फरीदाबाद रेंज कमिश्नर संजय जून ने दस्तावेजों की जांच की थी। कमेटी ने तीन एसडीएम, पांच तहसीलदार, चार रजिस्ट्री क्लर्क सहित 20 लोगों को मामले संलिप्त पाया था। मामले की जांच रिपोर्ट कमेटी ने सीएम को सौंप दी थी।
रेलवे को नोटिस देकर 50 सवालों के मांगे हैं जवाब
जिला पुलिस द्वारा रेलवे को भेजे गए नोटिस में 50 सवालों के जवाब मांगे हैं। इनमें प्रमुख रूप से पलवल जिले में प्रोजेक्ट के लिए कितनी जमीन अधिग्रहण की जानी थी। उसके लिए कितनी राशि आवंटित की गई तथा किस-किस मद में कितनी राशि आवंटित की गई है। काटे गए पेड़ों के बदले पेउ़ मालिकों व वन विभाग को कितनी राशि आवंटित की गई। प्रोजेक्ट में लगे अधिकारियों व व कर्मचारियों को कितना वेतन अब तक दिया गया है। नोटिस में पुलिस द्वारा जानकारी मांगी गई है कि 2012 में जब से प्रोजेक्ट शुरू हुआ तब से लेकर आज तक का पूरा हिसाब मांगा गया है।
कानूनगो के रूप में गिरफ्तार आरोपी निकला चपरासी
पुलिस द्वारा इस मामले में गिरफ्तार किए गए कानूनगो के रूप में सुरेश कुमार नामक व्यक्ति से रिमांड के दौरान की गई पूछताछ में जानकारी मिली कि वह न तो कानूनगो है और न ही पटवारी। वह तो आऊटसोर्स पर कार्यरत था, लेकिन बाद में एक एसडीएम से सांठगांठ होने पर उसे यह प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद हरियाणा अर्फोडेबल रेल कॉरिडोर तथा वेस्टर्न डेडीकेट रेल कॉरिडोर में आऊटसोर्स पर जमीनों की जांच करने के लिए लगवा दिया गया जिससे उसे दोनों विभागों से वेतन मिलने लगा। इतना ही नहीं इन दोनों विभागों में गुपचुप तरीके से काम करते हुए वेतन लेने के अलावा उसने भी 30 गज जमीन खरीद ली थी। बताया गया कि आरोपी सुरेश पहले पटवारियों के साथ सहायक के रूप में दैनिक वेतन पर काम करता था। वहीं से जमीनों से संबंधित पूरी जानकारी होने के चलते एसडीएम ने उसे दोनों विभागों में इस प्रोजेक्ट के लिए पटवारी के रूप में नियुक्त कराया था।
जमीन अधिग्रहण के दौरान काटे गए पेड़ों की भी नहीं ली गई अनुमति
इतना ही नहीं प्रोजेक्ट के लिए की गई अधिगृहीत जमीन में लगे पेड़ों को काटने के लिए भी वन विभाग से अनुमति नहीं ली गई थी। जबकि नियमानुसार अनुमति लेनी होती है। बिना अनुमति के पेड़ काटने के बाद उन्हें बेच भी दिया गया। उनका भी हिसाब किसी के पास नहीं है।
इस मामले में रेलवे से भी जानकारी ली जा रही है। रेलवे को नोटिस देकर जवाब मांगा गया है कि रेलवे द्वारा अब तक किस मद के लिए कितनी राशि जारी की गई है। इसके अलावा जांच गहनता से की जा रही है। सारे तथ्य सामने आने के बाद जो भी अधिकारी इस मामले में शामिल मिलेगा, उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
-दीपक गहलावत, जिला पुलिस अधीक्षक पलवल
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पुलिस द्वारा रेलवे को यह नोटिस 10 जुलाई को दिया गया था, लेकिन अभी तक रेलवे की तरफ से कोई जानकारी नहीं दी गई है। वहीं, मामले में कानूनगो के तौर पर गिरफ्तार किया गया सुरेश नामक व्यक्ति न तो कानूनगो है और न ही पटवारी। बल्कि वह तो आउटसोर्स पर कार्य करता है। पुलिस द्वारा दिए गए नोटिस का रेलवे से जवाब आने के बाद इस मामले में कई अन्य अधिकारियों पर भी गाज गिर सकती है।
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यह है मामला
उत्तर प्रदेश के दादरी से नवी मुंबई रेलवे फ्रेट कॉरिडोर के लिए जिले के करीब 10 गांवों की जमीन अधिगृहीत की गई। गांव असावटी, जटौला, मैदापुर, पृथला में रेलवे फ्रेट कॉरिडोर के लिए अधिगृहीत जमीन का अवार्ड घोषित कर दिया गया। रेलवे की पॉलिसी के अनुसार, जिस किसान की जमीन अधिगृहीत हुई, उसे सरकारी नौकरी या करीब साढ़े पांच लाख रुपये दिए जाने थे। साढ़े पांच लाख रुपये लेने के लिए 6, 7, 12, 15 और 30 गज के टुकड़ों में की गई रजिस्ट्रियों में करीब 400 लोग शामिल कर लिए गए। जमाबंदी में जहां एक व्यक्ति जमीन का मालिक है, वहीं रजिस्ट्री में 30 से 40 लोगों को शामिल किया।
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अधिगृहीत जमीन का अवार्ड घोषित करते समय एक नंबर पर एक व्यक्ति के नाम अवार्ड घोषित किया जाना था और वहीं राशि टुकड़ों में बांटी जानी थी। छह गज जमीन का 45 लाख रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से 5578 रुपये का मुआवजा 31 लोगों में दिया जाना था। रेलवे के नियमों के तहत सभी 31 लोगों को पांच-पांच लाख के हिसाब से डेढ़ करोड़ रुपये अवार्ड घोषित कर दिया गया। करीब 100 गज जमीन के लिए 400 मालिकों को साढे़ 22 करोड़ रुपये अवार्ड घोषित किया गया। रेलवे अधिकारियों को इतनी मोटी राशि जारी करने के दौरान शक हुआ और मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से की गई।
मामले का खुलासा होने पर जांच के लिए अतिरिक्त उपायुक्त सतेंद्र दूहन के नेतृत्व में कमेटी गठित की गई। कमेटी में सीईओ जिला परिषद अमित कुमार और डीआरओ रामफल कटारिया को शामिल किया गया। जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने से पहले फरीदाबाद रेंज कमिश्नर संजय जून ने दस्तावेजों की जांच की थी। कमेटी ने तीन एसडीएम, पांच तहसीलदार, चार रजिस्ट्री क्लर्क सहित 20 लोगों को मामले संलिप्त पाया था। मामले की जांच रिपोर्ट कमेटी ने सीएम को सौंप दी थी।
रेलवे को नोटिस देकर 50 सवालों के मांगे हैं जवाब
जिला पुलिस द्वारा रेलवे को भेजे गए नोटिस में 50 सवालों के जवाब मांगे हैं। इनमें प्रमुख रूप से पलवल जिले में प्रोजेक्ट के लिए कितनी जमीन अधिग्रहण की जानी थी। उसके लिए कितनी राशि आवंटित की गई तथा किस-किस मद में कितनी राशि आवंटित की गई है। काटे गए पेड़ों के बदले पेउ़ मालिकों व वन विभाग को कितनी राशि आवंटित की गई। प्रोजेक्ट में लगे अधिकारियों व व कर्मचारियों को कितना वेतन अब तक दिया गया है। नोटिस में पुलिस द्वारा जानकारी मांगी गई है कि 2012 में जब से प्रोजेक्ट शुरू हुआ तब से लेकर आज तक का पूरा हिसाब मांगा गया है।
कानूनगो के रूप में गिरफ्तार आरोपी निकला चपरासी
पुलिस द्वारा इस मामले में गिरफ्तार किए गए कानूनगो के रूप में सुरेश कुमार नामक व्यक्ति से रिमांड के दौरान की गई पूछताछ में जानकारी मिली कि वह न तो कानूनगो है और न ही पटवारी। वह तो आऊटसोर्स पर कार्यरत था, लेकिन बाद में एक एसडीएम से सांठगांठ होने पर उसे यह प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद हरियाणा अर्फोडेबल रेल कॉरिडोर तथा वेस्टर्न डेडीकेट रेल कॉरिडोर में आऊटसोर्स पर जमीनों की जांच करने के लिए लगवा दिया गया जिससे उसे दोनों विभागों से वेतन मिलने लगा। इतना ही नहीं इन दोनों विभागों में गुपचुप तरीके से काम करते हुए वेतन लेने के अलावा उसने भी 30 गज जमीन खरीद ली थी। बताया गया कि आरोपी सुरेश पहले पटवारियों के साथ सहायक के रूप में दैनिक वेतन पर काम करता था। वहीं से जमीनों से संबंधित पूरी जानकारी होने के चलते एसडीएम ने उसे दोनों विभागों में इस प्रोजेक्ट के लिए पटवारी के रूप में नियुक्त कराया था।
जमीन अधिग्रहण के दौरान काटे गए पेड़ों की भी नहीं ली गई अनुमति
इतना ही नहीं प्रोजेक्ट के लिए की गई अधिगृहीत जमीन में लगे पेड़ों को काटने के लिए भी वन विभाग से अनुमति नहीं ली गई थी। जबकि नियमानुसार अनुमति लेनी होती है। बिना अनुमति के पेड़ काटने के बाद उन्हें बेच भी दिया गया। उनका भी हिसाब किसी के पास नहीं है।
इस मामले में रेलवे से भी जानकारी ली जा रही है। रेलवे को नोटिस देकर जवाब मांगा गया है कि रेलवे द्वारा अब तक किस मद के लिए कितनी राशि जारी की गई है। इसके अलावा जांच गहनता से की जा रही है। सारे तथ्य सामने आने के बाद जो भी अधिकारी इस मामले में शामिल मिलेगा, उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
-दीपक गहलावत, जिला पुलिस अधीक्षक पलवल