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दिल्ली में संत रविदास मंदिर तोड़ने पर किया प्रदर्शन
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दिल्ली में रविदास मंदिर तोड़ने के विरोध में प्रदर्शन करते लोग।
- फोटो : Palwal
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पलवल। दिल्ली स्थित तुगलकाबाद में संत रविदास मंदिर तोड़े जाने के विरोध में शनिवार को दलित समाज के लोगों ने भीम आर्मी भारत मिशन एकता के तत्वावधान मेें पलवल में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने अदालत को गुमराह करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने व मंदिर का पुन: निर्माण कराने की मांग की। बाद में मिशन से जुड़े लोगों ने उपायुक्त के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा।
शनिवार को जैसे ही भीम आर्मी भारत मिशन एकता मिशन को इस बात की जानकारी मिली कि दिल्ली स्थित तुगलकाबाद में स्थित संत रविदास का मंदिर तोड़ दिया तो है, दलित समाज के लोगों में रोष उत्पन्न हो गया। समाज के लोगों ने मिशन के नेतृत्व में शहर के अंदर जुलूस निकालते हुए विरोध प्रदर्शन किया। जुलूस के रूप में समाज से जुड़े लोग सचिवालय स्थित उपायुक्त कार्यालय पर गए तथा वहां नारेबाजी की।
राष्ट्रपति के नाम से भेजे गए ज्ञापन के माध्यम से बताया गया कि इस संत रविदास मंदिर का निर्माण एक मार्च 1959 को बाबू जगजीवन राम ने किया था। बताया गया कि मंदिर के पीछे काफी महात्माओं की समाधि बनी हुई है। आरोप है कि अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट को गुमराह कर 500 वर्ग गज से भी ज्यादा जमीन पर बने इस एतिहासिक संत रविदास मंदिर को तोड़ने का काम किया है। इससे पूरे देश में विरोध है। संत रविदास में आस्था रखने वाले लोगों की भावनाओं से खेला गया है। ज्ञापन में कहा गया कि इस मंदिर का निर्माण पुन: कराया जाए। कहा गया कि ऐसा न होने पर पूरे देश में आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने राष्ट्रपति से मांग की कि अपनी शक्तियों का प्रयोग कर मंदिर निर्माण कराया जाए तथा जिन अधिकारियों ने गुमराह कर मंदिर को अपनी दुर्भावना के चलते तोड़ने का काम किया है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। उपायुक्त की गैर मौजूदगी में उनका ज्ञापन तहसीलदार द्वारा लिया गया।
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इस अवसर पर मिशन के जिलाध्यक्ष राज गौर, ललित कुमार, दलबीर ने बताया कि संत रविदास से उनके समाज की भावनाएं जुड़ी हैं। यदि जल्द मंदिर का निर्माण नहीं हुआ तो बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।
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शनिवार को जैसे ही भीम आर्मी भारत मिशन एकता मिशन को इस बात की जानकारी मिली कि दिल्ली स्थित तुगलकाबाद में स्थित संत रविदास का मंदिर तोड़ दिया तो है, दलित समाज के लोगों में रोष उत्पन्न हो गया। समाज के लोगों ने मिशन के नेतृत्व में शहर के अंदर जुलूस निकालते हुए विरोध प्रदर्शन किया। जुलूस के रूप में समाज से जुड़े लोग सचिवालय स्थित उपायुक्त कार्यालय पर गए तथा वहां नारेबाजी की।
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राष्ट्रपति के नाम से भेजे गए ज्ञापन के माध्यम से बताया गया कि इस संत रविदास मंदिर का निर्माण एक मार्च 1959 को बाबू जगजीवन राम ने किया था। बताया गया कि मंदिर के पीछे काफी महात्माओं की समाधि बनी हुई है। आरोप है कि अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट को गुमराह कर 500 वर्ग गज से भी ज्यादा जमीन पर बने इस एतिहासिक संत रविदास मंदिर को तोड़ने का काम किया है। इससे पूरे देश में विरोध है। संत रविदास में आस्था रखने वाले लोगों की भावनाओं से खेला गया है। ज्ञापन में कहा गया कि इस मंदिर का निर्माण पुन: कराया जाए। कहा गया कि ऐसा न होने पर पूरे देश में आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने राष्ट्रपति से मांग की कि अपनी शक्तियों का प्रयोग कर मंदिर निर्माण कराया जाए तथा जिन अधिकारियों ने गुमराह कर मंदिर को अपनी दुर्भावना के चलते तोड़ने का काम किया है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। उपायुक्त की गैर मौजूदगी में उनका ज्ञापन तहसीलदार द्वारा लिया गया।
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इस अवसर पर मिशन के जिलाध्यक्ष राज गौर, ललित कुमार, दलबीर ने बताया कि संत रविदास से उनके समाज की भावनाएं जुड़ी हैं। यदि जल्द मंदिर का निर्माण नहीं हुआ तो बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।