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देश को गुमराह कर रहे हैं प्रधानमंत्री : कक्का
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पलवल। राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवकुमार कक्का का कहना है कि प्रधानमंत्री देश को गुमराह कर रहे हैं। 11 दौर की वार्ता में बिंदुवार कृषि कानूनों की खामियां गिनवाई गई हैं। कृषि मंत्री आठ बिंदुओं को बदलने के लिए 40 सदस्यीय किसान कमेटी से बात कर चुके हैं। उसके बावजूद प्रधानमंत्री राज्यसभा में कृषि कानूनों में काला क्या है, यह बूझ रहे हैं।
कक्का बृहस्पतिवार को केएमपी-केजीपी इंटरचेंज पर संयुक्त किसान मोर्चा के तत्वावधान में चल रहे किसानों के धरने को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने कृषि कानून बनाने के पीछे सरकार की मंशा व उनसे होने वाले नुकसान के बारे में विस्तार से किसानों को जानकारी दी।
शिवकुमार कक्का ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र अमेरिका हर वर्ष किसानों को दो लाख 90 हजार सब्सिडी देता है, जबकि भारत में किसानों को 15 हजार से भी कम सब्सिडी सालाना दी जाती है। भारत सरकार ने विश्व व्यापार संगठन से करार किया तो पांच लाख किसानों ने दिल्ली पहुंचकर इसका विरोध किया था, क्योंकि विदेशी तो भारत में माल बेचे सकेंगे, परंतु भारत का किसान विदेशों में अपना उत्पाद नहीं बेच सकेगा। फरवरी वर्ष 2015 में वर्तमान सरकार से एग्रीमेंट किया कि देश में समर्थन मूल्य पर फसल नहीं खरीदेंगे, जिस कारण पूंजीपतियों की नजर भारत में 16 लाख करोड़ रुपये के कृषि व्यवसाय पर पड़ी और सरकार को कृषि कानून लाने पड़े।
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मजबूरन प्राइवेट मंडियों में लुटना पड़ेगा
कक्का ने किसानों से कहा कि पहला कानून एक राष्ट्र-एक कृषि बाजार है, जिसके तहत प्राइवेट मंडियां स्थापित की जाएंगी। इसके तहत व्यापारी को लाइसेंस नहीं लेना पड़ेगा। केवल पैन नंबर से व्यापारी फसल खरीद सकेगा। प्राइवेट मंडियों में तोल काटा से लूट शुरू होगी और भुगतान तक व्यापारी किसान को लूटेगा। प्राइवेट में टैक्स नहीं लगेगा, इसलिए व्यापारी प्राइवेट मंडियों में ही जाएगा। व्यापारी न होने से सरकारी मंडियों में किसान फसल नहीं बेच पाएगा और उसे मजबूरन प्राइवेट मंडियों में लुटना पड़ेगा। दूसरे कानून में आवश्यक वस्तु अधिनियम को खत्म किया गया है।
इस कानून में व्यापारी को स्टॉक करने की छूट दी गई है। व्यापारी फसल को खरीदकर मनमाने दाम पर बेच सकेगा। तीसरे कानून ठेके पर खेती के बारे में बताया कि कंपनी किसान से फसल का एग्रीमेंट करेगी, जिसमें उसकी जमीन का भी विवरण दिया जाएगा। यदि फसल की गुणवत्ता कमजोर हुई तो कंपनी फसल नहीं खरीदेगी। ऐसा पहले भी होता रहा है। यदि कंपनी घाटे में चली गई तो बैंक किसान की जमीन पर दावा करेगी, जिससे किसान की जमीन छिन जाएगी।
16 को मनाएंगे छोटूराम जयंती, 18 को रोकेंगे रेल
कक्का ने बताया कि 16 फरवरी को दीनबंधु सर छोटूराम की जयंती मनाई जाएगी। इस दिन 204 शहीद किसानों को कैंडल मार्च के जरिये श्रद्धांजलि दी जाएगी। 18 फरवरी को रेल रोको आंदोलन चलाया जाएगा। उन्होंने बताया कि किसान आंदोलन देश का सबसे बड़ा आंदोलन है। किसान आंदोलन का अहिंसक होना इसकी सफलता की वजह है। 26 जनवरी को लालकिले पर हुआ प्रकरण सरकार की सोची समझी साजिश थी, जिस संगठन ने यह कार्य किया वह संयुक्त किसान मोर्चा में शामिल नहीं है। मोर्चा द्वारा 22 व 23 जनवरी को सरकार को पत्र लिखकर इस बारे में आगाह भी किया गया था।
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कक्का बृहस्पतिवार को केएमपी-केजीपी इंटरचेंज पर संयुक्त किसान मोर्चा के तत्वावधान में चल रहे किसानों के धरने को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने कृषि कानून बनाने के पीछे सरकार की मंशा व उनसे होने वाले नुकसान के बारे में विस्तार से किसानों को जानकारी दी।
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शिवकुमार कक्का ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र अमेरिका हर वर्ष किसानों को दो लाख 90 हजार सब्सिडी देता है, जबकि भारत में किसानों को 15 हजार से भी कम सब्सिडी सालाना दी जाती है। भारत सरकार ने विश्व व्यापार संगठन से करार किया तो पांच लाख किसानों ने दिल्ली पहुंचकर इसका विरोध किया था, क्योंकि विदेशी तो भारत में माल बेचे सकेंगे, परंतु भारत का किसान विदेशों में अपना उत्पाद नहीं बेच सकेगा। फरवरी वर्ष 2015 में वर्तमान सरकार से एग्रीमेंट किया कि देश में समर्थन मूल्य पर फसल नहीं खरीदेंगे, जिस कारण पूंजीपतियों की नजर भारत में 16 लाख करोड़ रुपये के कृषि व्यवसाय पर पड़ी और सरकार को कृषि कानून लाने पड़े।
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मजबूरन प्राइवेट मंडियों में लुटना पड़ेगा
कक्का ने किसानों से कहा कि पहला कानून एक राष्ट्र-एक कृषि बाजार है, जिसके तहत प्राइवेट मंडियां स्थापित की जाएंगी। इसके तहत व्यापारी को लाइसेंस नहीं लेना पड़ेगा। केवल पैन नंबर से व्यापारी फसल खरीद सकेगा। प्राइवेट मंडियों में तोल काटा से लूट शुरू होगी और भुगतान तक व्यापारी किसान को लूटेगा। प्राइवेट में टैक्स नहीं लगेगा, इसलिए व्यापारी प्राइवेट मंडियों में ही जाएगा। व्यापारी न होने से सरकारी मंडियों में किसान फसल नहीं बेच पाएगा और उसे मजबूरन प्राइवेट मंडियों में लुटना पड़ेगा। दूसरे कानून में आवश्यक वस्तु अधिनियम को खत्म किया गया है।
इस कानून में व्यापारी को स्टॉक करने की छूट दी गई है। व्यापारी फसल को खरीदकर मनमाने दाम पर बेच सकेगा। तीसरे कानून ठेके पर खेती के बारे में बताया कि कंपनी किसान से फसल का एग्रीमेंट करेगी, जिसमें उसकी जमीन का भी विवरण दिया जाएगा। यदि फसल की गुणवत्ता कमजोर हुई तो कंपनी फसल नहीं खरीदेगी। ऐसा पहले भी होता रहा है। यदि कंपनी घाटे में चली गई तो बैंक किसान की जमीन पर दावा करेगी, जिससे किसान की जमीन छिन जाएगी।
16 को मनाएंगे छोटूराम जयंती, 18 को रोकेंगे रेल
कक्का ने बताया कि 16 फरवरी को दीनबंधु सर छोटूराम की जयंती मनाई जाएगी। इस दिन 204 शहीद किसानों को कैंडल मार्च के जरिये श्रद्धांजलि दी जाएगी। 18 फरवरी को रेल रोको आंदोलन चलाया जाएगा। उन्होंने बताया कि किसान आंदोलन देश का सबसे बड़ा आंदोलन है। किसान आंदोलन का अहिंसक होना इसकी सफलता की वजह है। 26 जनवरी को लालकिले पर हुआ प्रकरण सरकार की सोची समझी साजिश थी, जिस संगठन ने यह कार्य किया वह संयुक्त किसान मोर्चा में शामिल नहीं है। मोर्चा द्वारा 22 व 23 जनवरी को सरकार को पत्र लिखकर इस बारे में आगाह भी किया गया था।