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फाइलों में गुम हुई केजीपी को पलवल-अलीगढ़ सड़क से जोड़ने की योजना
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पलवल। ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे (केजीपी) को पलवल-अलीगढ़ सड़क से जोड़ने का मुद्दा एक बार फिर विधानसभा चुनावों में जोर-शोर से उठने लगा है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा करीब एक वर्ष पूर्व पत्र जारी करने के बाद भी इंटरचेंज के लिए जमीन का अधिग्रहण नहीं किया गया है। इंटरचेंज पलवल-अलीगढ़ सड़क पर गांव पेलक के समीप बनाया जाना था। सरकार द्वारा बनाई गई कमेटी भी इंटरचेंज बनाने के लिए हरी झंडी दे चुकी है।
दरअसल, केंद्र सरकार ने लगभग 11 हजार करोड़ रुपये की लागत से 135 किलोमीटर लंबा कुंडली-गाजियाबाद-पलवल एक्सप्रेस-वे (केजीपी) बनाया है, जिसका नाम बदलकर बाद में ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे कर दिया गया। 27 मई 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के बागपत जिले से इसका शुभारंभ किया था। केजीपी के निर्माण के समय से ही पलवल-अलीगढ़ सड़क पर विधायक करण दलाल द्वारा इंटरचेंज बनाने की मांग की जाने लगी थी। 28 अप्रैल 2017 को केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के समक्ष भी दलाल ने यह मुद्दा उठाया था। उनका कहना था कि केजीपी बनाए जाने से पलवल शहर को फायदा नहीं मिल रहा है। राजस्थान, जयपुर, गुरुग्राम व मानेसर आइएमटी से आने वाले बड़े व्यावसायिक वाहन पलवल शहर के बीच से होकर अलीगढ़ सड़क होते हुए उत्तर प्रदेश की सीमा में प्रवेश करते हैं। यदि अलीगढ़ सड़क पर इंटरचेंज बना दिया जाता है तो बड़े वाहन केजीपी के रास्ते अलीगढ़ सड़क पर चले जाएंगे तथा शहर को जाम से मुक्ति मिलेगी।
उन्होंने यह मुद्दा विधानसभा में भी उठाया। इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा के नेतृत्व में कमेटी गठित की। कमेटी में विधायक करण सिंह दलाल, विधायक उदयभान, विधायक ललित नागर, विधायक मूलचंद शर्मा, मुख्यमंत्री के राजनीतिक सचिव दीपक मंगला सहित अन्य को शामिल किया गया। कमेटी के सदस्यों ने रामबिलास शर्मा के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात कर इंटरचेंज बनाने की मांग की ।
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मांग को लेकर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा 12 अक्टूबर 2018 को पलवल जिला उपायुक्त के नाम पत्र जारी कर केजीपी को अलीगढ़ सड़क जोड़ने के लिए जमीन अधिगृहित कर इंटरचेंज बनाने के आदेश दिए थे। आदेशों के अनुसार अलीगढ़ सड़क किनारे बसे गांव पेलक व सिहौल की आठ एकड़ जमीन अधिगृहित की जानी थी, जिसके लिए संबंधित कानूनगो व हल्का पटवारी को जिम्मेवारी सौंपी गई। सर्वे का काम गायत्री प्रोजेक्ट लिमिटेड को सौंपा गया। एनएचएआई के इन आदेशों को एक वर्ष होने जाने के बाद भी इंटरचेंज के लिए जमीन तक अधिगृहित नहीं की गई है।
मैंने इंटरचेंज बनाने की मांग केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के समक्ष व विधानसभा में उठाई थी। सरकार द्वारा मांग को स्वीकृति भी मिली, परंतु अभी तक जमीन अधिगृहित नहीं की गई है। पलवल की जनता को जान-बूझकर परेशान किया जा रहा है। हमारी सरकार बनने पर प्राथमिकता के तौर पर इंटरचेंज बनवाया जाएगा।
-करण सिंह दलाल, विधायक-पलवल
केजीपी को पलवल-अलीगढ़ सड़क को जोड़ने के बाद पलवल शहर को पूरी तरह से जाम से निजात मिलेगी। जाम की वजह से पलवल में प्रदूषण का स्तर बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, जिससे तरह-तरह की बीमारियां फैल रही हैं। जाम के कारण लोगों को भारी परेशानी पड़ती है तथा धन की भी बर्बादी होती है।
-सुभाष चौधरी, पूर्व विधायक-पलवल
एनएचएआई द्वारा पलवल-अलीगढ़ सड़क को केजीपी से जोड़ने के बारे में बीते वर्ष एक पत्र भेजा गया, लेकिन अभी तक जमीन अधिगृहित नहीं की गई है। विधानसभा चुनावों के बाद जमीन अधिगृहित करने की प्रकिया की जाएगी।
-यशपाल यादव, उपायुक्त-पलवल
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दरअसल, केंद्र सरकार ने लगभग 11 हजार करोड़ रुपये की लागत से 135 किलोमीटर लंबा कुंडली-गाजियाबाद-पलवल एक्सप्रेस-वे (केजीपी) बनाया है, जिसका नाम बदलकर बाद में ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे कर दिया गया। 27 मई 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के बागपत जिले से इसका शुभारंभ किया था। केजीपी के निर्माण के समय से ही पलवल-अलीगढ़ सड़क पर विधायक करण दलाल द्वारा इंटरचेंज बनाने की मांग की जाने लगी थी। 28 अप्रैल 2017 को केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के समक्ष भी दलाल ने यह मुद्दा उठाया था। उनका कहना था कि केजीपी बनाए जाने से पलवल शहर को फायदा नहीं मिल रहा है। राजस्थान, जयपुर, गुरुग्राम व मानेसर आइएमटी से आने वाले बड़े व्यावसायिक वाहन पलवल शहर के बीच से होकर अलीगढ़ सड़क होते हुए उत्तर प्रदेश की सीमा में प्रवेश करते हैं। यदि अलीगढ़ सड़क पर इंटरचेंज बना दिया जाता है तो बड़े वाहन केजीपी के रास्ते अलीगढ़ सड़क पर चले जाएंगे तथा शहर को जाम से मुक्ति मिलेगी।
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उन्होंने यह मुद्दा विधानसभा में भी उठाया। इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा के नेतृत्व में कमेटी गठित की। कमेटी में विधायक करण सिंह दलाल, विधायक उदयभान, विधायक ललित नागर, विधायक मूलचंद शर्मा, मुख्यमंत्री के राजनीतिक सचिव दीपक मंगला सहित अन्य को शामिल किया गया। कमेटी के सदस्यों ने रामबिलास शर्मा के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात कर इंटरचेंज बनाने की मांग की ।
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मांग को लेकर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा 12 अक्टूबर 2018 को पलवल जिला उपायुक्त के नाम पत्र जारी कर केजीपी को अलीगढ़ सड़क जोड़ने के लिए जमीन अधिगृहित कर इंटरचेंज बनाने के आदेश दिए थे। आदेशों के अनुसार अलीगढ़ सड़क किनारे बसे गांव पेलक व सिहौल की आठ एकड़ जमीन अधिगृहित की जानी थी, जिसके लिए संबंधित कानूनगो व हल्का पटवारी को जिम्मेवारी सौंपी गई। सर्वे का काम गायत्री प्रोजेक्ट लिमिटेड को सौंपा गया। एनएचएआई के इन आदेशों को एक वर्ष होने जाने के बाद भी इंटरचेंज के लिए जमीन तक अधिगृहित नहीं की गई है।
मैंने इंटरचेंज बनाने की मांग केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के समक्ष व विधानसभा में उठाई थी। सरकार द्वारा मांग को स्वीकृति भी मिली, परंतु अभी तक जमीन अधिगृहित नहीं की गई है। पलवल की जनता को जान-बूझकर परेशान किया जा रहा है। हमारी सरकार बनने पर प्राथमिकता के तौर पर इंटरचेंज बनवाया जाएगा।
-करण सिंह दलाल, विधायक-पलवल
केजीपी को पलवल-अलीगढ़ सड़क को जोड़ने के बाद पलवल शहर को पूरी तरह से जाम से निजात मिलेगी। जाम की वजह से पलवल में प्रदूषण का स्तर बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, जिससे तरह-तरह की बीमारियां फैल रही हैं। जाम के कारण लोगों को भारी परेशानी पड़ती है तथा धन की भी बर्बादी होती है।
-सुभाष चौधरी, पूर्व विधायक-पलवल
एनएचएआई द्वारा पलवल-अलीगढ़ सड़क को केजीपी से जोड़ने के बारे में बीते वर्ष एक पत्र भेजा गया, लेकिन अभी तक जमीन अधिगृहित नहीं की गई है। विधानसभा चुनावों के बाद जमीन अधिगृहित करने की प्रकिया की जाएगी।
-यशपाल यादव, उपायुक्त-पलवल