{"_id":"60ca2c2a8ebc3e425d2a1329","slug":"opposed-the-anti-farmer-labour-policies-palwal-news-noi587896196","type":"story","status":"publish","title_hn":"किसान-मजदूर विरोधी नीतियों का किया विरोध","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
किसान-मजदूर विरोधी नीतियों का किया विरोध
विज्ञापन
पलवल। नए कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग के संबंध में केेएमपी-केजीपी इंटरचेंज पर धरना बुधवार को भी जारी रहा। इस दौरान महिलाओं ने धरने में शामिल होकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इसके अलावा मिड-डे मील वर्करों के प्रदर्शन को समर्थन दिया। मिड-डे मील वर्कर भी जुलूस निकालकर धरनास्थल तक पहुंचे और सरकारी की किसान-मजदूर विरोधी नीतियों का विरोध किया। किसान संघर्ष समिति के नेतृत्व में जारी धरने की अध्यक्षता हरीचंद जाखड़ ने की, जबकि संचालन रूपराम तेवतिया ने किया।
धरने में किसान नेता मास्टर महेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि आंदोलन को तेज करने के लिए गांवों में अभियान चलाया जा रहा है। इसका असर भी दिखने लगा है। धरने में महिलाओं की भागीदारी भी नजर आ रही है। मजदूर भी धरने को समर्थन देने के लिए पहुंच रहे हैं। स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर 24 जून को धरनास्थलों पर कबीर जयंती मनाई जाएगी। 26 जून को किसान आंदोलन के सात माह पूरे होने पर ‘खेती बचाओ-लोकतंत्र बचाओ’ दिवस मनाया जाएगा। इसी दिन आपातकाल की जानकारी भी लोगों को दी जाएगी। देश में फिर से आपातकाल जैसी ही स्थिति है। कर्मचारी नेता श्रीपाल सिंह भाटी ने कहा कि सरकार किसानों के साथ-साथ मजदूरों के लिए भी नए-नए कानून लागू कर रही है, जबकि सुविधाओं के नाम पर मजदूरों को कुछ नहीं मिल रहा है। आंगनबाड़ी, आशा और मिड-डे मील वर्करों को मेहनताना के नाम पर कुछ नहीं मिलता। कई-कई माह तक उन्हें वेतन नहीं मिलता है। अब समय आ गया है कि किसान और मजदूर एक होकर अपने हितों की लड़ाई लड़ें। धरने को किसान सभा के नेता धर्मचंद घुघेरा, राजेंद्र सिंह, चंद्रमुनि धतीर, इंदर सिंह रावत, रणजीत सिंह चौहान, नरेंद्र सहरावत, धनीराम, बीर सिंह औरंगाबाद, मिड-डे मील वर्करों की नेता सीमा आदि ने संबोधित किया।
विज्ञापन
धरने में किसान नेता मास्टर महेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि आंदोलन को तेज करने के लिए गांवों में अभियान चलाया जा रहा है। इसका असर भी दिखने लगा है। धरने में महिलाओं की भागीदारी भी नजर आ रही है। मजदूर भी धरने को समर्थन देने के लिए पहुंच रहे हैं। स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर 24 जून को धरनास्थलों पर कबीर जयंती मनाई जाएगी। 26 जून को किसान आंदोलन के सात माह पूरे होने पर ‘खेती बचाओ-लोकतंत्र बचाओ’ दिवस मनाया जाएगा। इसी दिन आपातकाल की जानकारी भी लोगों को दी जाएगी। देश में फिर से आपातकाल जैसी ही स्थिति है। कर्मचारी नेता श्रीपाल सिंह भाटी ने कहा कि सरकार किसानों के साथ-साथ मजदूरों के लिए भी नए-नए कानून लागू कर रही है, जबकि सुविधाओं के नाम पर मजदूरों को कुछ नहीं मिल रहा है। आंगनबाड़ी, आशा और मिड-डे मील वर्करों को मेहनताना के नाम पर कुछ नहीं मिलता। कई-कई माह तक उन्हें वेतन नहीं मिलता है। अब समय आ गया है कि किसान और मजदूर एक होकर अपने हितों की लड़ाई लड़ें। धरने को किसान सभा के नेता धर्मचंद घुघेरा, राजेंद्र सिंह, चंद्रमुनि धतीर, इंदर सिंह रावत, रणजीत सिंह चौहान, नरेंद्र सहरावत, धनीराम, बीर सिंह औरंगाबाद, मिड-डे मील वर्करों की नेता सीमा आदि ने संबोधित किया।
विज्ञापन