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उपमंडल अस्पताल में शुरू हुई आपरेशन से डिलीवरी की सुविधा
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होडल। उपमंडल नागरिक अस्पताल में लंबे समय से इंतजार के बाद ऑपरेशन से डिलीवरी व ब्लड स्टोरेज की सुविधा शुरू हो गई है। सोमवार को शिशु मातृत्व विभाग की निदेशक डॉ. सोनिया त्रिखा ने फीता काटकर ऑपरेशन कक्ष का उद्घाटन किया। इस दौरान एक पहली डिलीवरी और दो फैमिली प्लानिंग के सफल ऑपरेशन किए गए।
उपमंडल के 90 गांवों के लोग चिकित्सा सुविधाओं के लिए जिला मुख्यालय अस्पताल पर ही निर्भर हैं। काफी लोग उपमंडल नागरिक अस्पताल भी आते हैं। अभी तक यहां पर ऑपरेशन से डिलीवरी की सुविधा उपलब्ध नहीं थी। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को पलवल या फरीदाबाद अस्पताल रेफर कर दिया जाता था। इससे मरीजों के समय की बर्बादी तो होती ही थी, साथ में रास्ते में ले जाते समय खतरा भी बना रहता था।
प्रतिमाह होती है 200 डिलीवरी
जिला सिविल सर्जन डॉ. ब्रह्मदीप ने बताया कि उपमंडल नागरिक अस्पताल में प्रतिमाह डिलीवरी की संख्या औसतन 200 होती है। गंभीर स्थिति में करीब 50 केस रेफर किए जाते हैं। ऑपरेशन की जरूरत को देखकर जो डिलीवरी केस रेफर किए जाते हैं, उनमें से कुछ निजी अस्पताल चले जाते हैं। इसमें उन्हें 50 से 60 हजार रुपये खर्च करना पड़ता है। उपमंडल नागरिक अस्पताल में यह सुविधा मिलने से मरीजों को निजी अस्पतालों की भारी भरकम फीस नहीं भरनी पड़ेगी।
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पहले ऑपरेशन सफल, मां-बेटा स्वस्थ
वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. चरण गोपाल ने बताया कि उपमंडल नागरिक अस्पताल में सोमवार को आपरेशन की सुविधा शुरू होने के साथ ही होडल की उमा की ऑपरेशन से डिलीवरी कराई गई। उसे बेटा हुआ है। मां-बेटा दोनों स्वस्थ हैं। डॉ. सीमा, डॉ. रूपा, डॉ. मोनिका व डॉ. राकेश ने यह ऑपरेशन किया।
वर्जन-
प्रदेश की सरकार मातृत्व सुरक्षा को लेकर पूरी तरह से सजग है। इसी श्रंखला में उपमंडल नागरिक अस्पताल में गर्भवती महिलाओं की सुविधा के लिए ऑपरेशन कक्ष व ब्लड स्टोरेज कक्ष का शुभारंभ किया गया है। - डॉ. सोनिया खुल्लर, निदेशक शिशु मातृत्व विभाग
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उपमंडल के 90 गांवों के लोग चिकित्सा सुविधाओं के लिए जिला मुख्यालय अस्पताल पर ही निर्भर हैं। काफी लोग उपमंडल नागरिक अस्पताल भी आते हैं। अभी तक यहां पर ऑपरेशन से डिलीवरी की सुविधा उपलब्ध नहीं थी। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को पलवल या फरीदाबाद अस्पताल रेफर कर दिया जाता था। इससे मरीजों के समय की बर्बादी तो होती ही थी, साथ में रास्ते में ले जाते समय खतरा भी बना रहता था।
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प्रतिमाह होती है 200 डिलीवरी
जिला सिविल सर्जन डॉ. ब्रह्मदीप ने बताया कि उपमंडल नागरिक अस्पताल में प्रतिमाह डिलीवरी की संख्या औसतन 200 होती है। गंभीर स्थिति में करीब 50 केस रेफर किए जाते हैं। ऑपरेशन की जरूरत को देखकर जो डिलीवरी केस रेफर किए जाते हैं, उनमें से कुछ निजी अस्पताल चले जाते हैं। इसमें उन्हें 50 से 60 हजार रुपये खर्च करना पड़ता है। उपमंडल नागरिक अस्पताल में यह सुविधा मिलने से मरीजों को निजी अस्पतालों की भारी भरकम फीस नहीं भरनी पड़ेगी।
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पहले ऑपरेशन सफल, मां-बेटा स्वस्थ
वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. चरण गोपाल ने बताया कि उपमंडल नागरिक अस्पताल में सोमवार को आपरेशन की सुविधा शुरू होने के साथ ही होडल की उमा की ऑपरेशन से डिलीवरी कराई गई। उसे बेटा हुआ है। मां-बेटा दोनों स्वस्थ हैं। डॉ. सीमा, डॉ. रूपा, डॉ. मोनिका व डॉ. राकेश ने यह ऑपरेशन किया।
वर्जन-
प्रदेश की सरकार मातृत्व सुरक्षा को लेकर पूरी तरह से सजग है। इसी श्रंखला में उपमंडल नागरिक अस्पताल में गर्भवती महिलाओं की सुविधा के लिए ऑपरेशन कक्ष व ब्लड स्टोरेज कक्ष का शुभारंभ किया गया है। - डॉ. सोनिया खुल्लर, निदेशक शिशु मातृत्व विभाग