Haryana: सरकारी अस्पताल में न रेबीज के इंजेक्शन, न बुखार की दवाइयां; भटकने को मजबूर गरीब मरीज
रामचंद ने बताया कि सोमवार सुबह कुत्ते ने काट लिया। वह अस्पताल में एंटी रेबीज का इंजेक्शन लगवाने के लिए गए। लेकिन यहां उसे पता चला कि अस्पताल में इंजेक्शन पिछले एक सप्ताह से नहीं है।
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डॉक्टर साहब! कुत्ते ने काट लिया है, जल्दी से इंजेक्शन लगा दो। बहनजी अस्पताल में एंटी रेबीज वैक्सीन नहीं है, बाहर से जाकर निजी अस्पताल में लगवा लो। यह नजारा था सोमवार को जिला नागरिक अस्पताल का। यहां आए दिन रेबीज वैक्सीन लगवाने आने वाले लोग हंगामा करते रहते हैं, लेकिन अस्पताल प्रशासन द्वारा मरीजों को बिना इंजेक्शन लगाए वापस भेजा जाता है। अब पिछले एक सप्ताह से रेबीज के इजेक्शन लगवाने वाले आ रहे हैं, लेकिन अस्पताल में वैक्सीन मौजूद नहीं है। लोगों ने मांग की है कि इंजेक्शनों की व्यवस्था की जाए। वहीं अस्पताल में बुखार के मरीजों को अन्य दवाइयां भी नहीं मिल रही हैं।
कुत्ता काटने के 40 से 50 मरीज आ रहे हैं अस्पताल में
अस्पताल का रिकॉर्ड देखा जाए तो कुत्ते के काटने के कारण प्रतिदिन औसतन 40 से 50 लोग यहां आ रहे हैं। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जनवरी से लेकर अगस्त तक जिला नागरिक अस्पताल में करीब चार हजार लोगों को रेबीज के इंजेक्शन लगाए जा चुके हैं। रिकॉर्ड के अनुसार नागरिक अस्पताल में जनवरी में 1,252, फरवरी में 580, मार्च में 1009, अप्रैल में 1,226, मई में 1,420 और जून महीने में रेबीज के 649 इंजेक्शन लगाए गए। जुलाई में 800 के करीब और अगस्त में 940 इंजेक्शन लगाए गए हैं। वहीं सितंबर में पिछले एक सप्ताह से इंजेक्शन ही नहीं हैं।
सोमवार को नागरिक अस्पताल में रेबीज का इंजेक्शन लगवाने पहुंचे रामचंद ने बताया कि सोमवार सुबह कुत्ते ने काट लिया। वह अस्पताल में एंटी रेबीज का इंजेक्शन लगवाने के लिए गए। लेकिन यहां उसे पता चला कि अस्पताल में इंजेक्शन पिछले एक सप्ताह से नहीं है। जिस कारण उन्हें बाहर से 350 रुपये में खरीदकर इंजेक्शन लगवाना पड़ा। अभी तीन इंजेक्शन और लगने हैं। इस तरह से मरीज को 1500 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। वहीं बीपीएल कार्ड धारक सुरेंद्र ने बताया कि जिला नागरिक अस्पताल में फ्री में इंजेक्शन लग जाता है, वे बेहद गरीब हैं। ऐसे में बाहर से मजबूरी में दूसरे से उधार लेकर इंजेक्शन लगवाना पड़ा है।
अन्य दवाइयां भी नहीं
रेबीज इंजेक्शन ही नहीं अस्पताल में अन्य दवाइयों की भी कमी है। अस्पताल में उपचार के लिए आ रहे मरीजों को डॉक्टरों द्वारा लिखी जा रही दवाइयों में से मात्र एक या दो ही दवाई मिल रही है। ऐसे में मरीजों को बाहर से दवाइयां लेनी पड़ रही हैं। बार-बार शिकायत के बाद भी अस्पताल प्रबंधन का कोई ध्यान नहीं है।
मुझे एलर्जी है मैं उपचार के लिए आई हूं। डॉक्टर ने जांच के बाद चार दवाइयां लिखीं, लेकिन मात्र एक दवा मिली है। अस्पताल में दवाइयां मिलती ही नहीं हैं। बाहर से खरीदकर दवाइयां लेनी पड़ती हैं।
-द्रोप्दी, सल्लागढ़
मुझे बुखार है। पिछले कई दिनों से बुखार है। जांच करने पर टायफाइड आया है। डॉक्टर ने जांच के बाद दवाइयां लिखीं, लेकिन दवाइयां पूरी नहीं मिली। अब बाहर से दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं।
-सुखराम, कारना
सिविल सर्जन डॉ. जयभगवान जाटान का कहना है कि दवाइयों की कोई कमीं नहीं है। मैं इस बारे में जानकारी लूंगा। मरीजों को दवाइयों की दिक्कत नहीं होने दी जाएगी। रेबीज के इंजेक्शन पीछे से कम आ रहे हैं। जल्द मंगवाने का प्रयास किया जा रहा है।