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जिले में बढ़ा सरसो का रकबा
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पलवल। सरकार द्वारा तय समर्थन मूल्य से अधिक दामों में इस बार सरसों की फसल बिकने से जिले में सरसों के प्रति किसानों का रूझान बढ़ा है। पिछले साल के मुकाबले किसानों ने इस बार सरसों की फसल अधिक बोई है। गेेहूं व धान के मुकाबले किसान अब सरसों की फसल को खेती के कार्य में अधिक मुनाफे वाली फसल मान रहे हैं। हालांकि जिले के कुल रकबा के हिसाब से अब भी मात्र 10 प्रतिशत रकबे में फसल बोई गई है, लेकिन पिछले सालों के मुकाबले इस बार 40 प्रतिशत अधिक सरसों बोई गई है।
कृषि विभाग के अनुसार जिले में एक लाख, 7 हजार हेक्टेयर जमीन पर खेती होती है। इस रकबे में जिले के किसान फसलों की बुवाई करते हैं। जिले में सर्वाधिक फसल गेहूं व धान की होती है। तीसरे नंबर पर गन्ना की फसल बोई जाती है। उसके बाद सब्जी व अन्य फसलें किसान बोते हैं। पिछले वर्ष तक जिले में किसानों द्वारा मात्र 6 हजार हेक्टेयर में सरसों की बुवाई की जाती थी, लेकिन इस वर्ष जैसे ही सरकार द्वारा तय समर्थन मूल्य से अधिक सरसों का दाम किसानों को मिला तो किसानों का रुझान भी बढ़ा है। इस बार 6 हजार हेक्टेयर से बढ़कर सरसों की फसल 10 हजार हेक्टेयर जमीन में बोई गई है।
समर्थन मूल्य था 4600 रुपये, बिकी 7200 रुपये तक
हरियाणा में इस बार सरकार की तरफ से सरसों की फसल का समर्थन मूल्य 4600 रुपये प्रति क्विंटल था। मंडियों में इस बार सरसों की फसल 7200 रुपये प्रति क्विंटल तक बिकी। मंडी में सरसों की फसल पहुंचने के साथ ही बिक जाती थी। जिसे देख किसान काफी खुश हुए। समर्थन मूल्य से 40 प्रतिशत अधिक दाम मिलने से खुश किसानों ने सरसों की फसल भी अधिक बोई है। गेहूं व धान से अधिक फसल एक एकड़ में सरसों की अधिक होती है। सरसों की फसल एक एकड़ में 12 क्विंटल तक होती है। कई बार तो कहीं-कहीं 15 क्विंटल तक हो जाती है। इसके अलावा गेहूं व धान के मुुकाबले लागत भी कम आती है तथा मुनाफा अधिक मिलता है। गेहूं के मुकाबले सरसों की कटाई भी काफी सरल है।
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तेल की मांग के चलते सरसों को अधिक प्रोत्साहन
सरकार तेल की मांग को देखते हुए किसानों को सरसों की फसल के लिए भी प्रोत्साहित कर रही हैं। किसानों को इसके लिए सरकार की तरफ से बीज भी सस्ते दामों में मिल रहा है तथा सब्सिडी भी मिल रही है। यही कारण है कि किसान भी सरसों की फसल की तरफ प्रोत्साहित हो रहा है।
सरसों की फसल काफी लाभदायक है। गेहूं व धान के मुकाबले कम पानी में सरसों की फसल हो जाती है। सरसों की फसल के लिए दो बार पानी की जरूरत पड़ती है। अक्टूबर महीने में सरसों की फसल की बुवाई होती है। सरसों की फसल बुवाई करने से अन्य फसलों को भी फायदा होता है। साथ ही जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ती है। गेहूं व धान की फसल लगातार बोने से जमीन के ऊपरी हिस्से की परत उखड़ जाती है। जमीन के पोषक तत्व खत्म होने लगते हैं। सरसों की फसल बुवाई करने से पोषक तत्व बनते हैं तथा जमीन ठीक होती है। उपजाऊ बनती है। लाभकारी कीट बनते हैं। सरसों की फसल बोने से मधु मक्खी पालन को भी बढ़ावा मिलता है। युवाओं को भी मधु मक्खी पालन से रोजगार मिलेगा। इसलिए किसानों को सरसों की फसल की तरफ बढ़ावा देना चाहिए।
- डॉ. महावीर मलिक, कृषि सलाहकार
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कृषि विभाग के अनुसार जिले में एक लाख, 7 हजार हेक्टेयर जमीन पर खेती होती है। इस रकबे में जिले के किसान फसलों की बुवाई करते हैं। जिले में सर्वाधिक फसल गेहूं व धान की होती है। तीसरे नंबर पर गन्ना की फसल बोई जाती है। उसके बाद सब्जी व अन्य फसलें किसान बोते हैं। पिछले वर्ष तक जिले में किसानों द्वारा मात्र 6 हजार हेक्टेयर में सरसों की बुवाई की जाती थी, लेकिन इस वर्ष जैसे ही सरकार द्वारा तय समर्थन मूल्य से अधिक सरसों का दाम किसानों को मिला तो किसानों का रुझान भी बढ़ा है। इस बार 6 हजार हेक्टेयर से बढ़कर सरसों की फसल 10 हजार हेक्टेयर जमीन में बोई गई है।
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समर्थन मूल्य था 4600 रुपये, बिकी 7200 रुपये तक
हरियाणा में इस बार सरकार की तरफ से सरसों की फसल का समर्थन मूल्य 4600 रुपये प्रति क्विंटल था। मंडियों में इस बार सरसों की फसल 7200 रुपये प्रति क्विंटल तक बिकी। मंडी में सरसों की फसल पहुंचने के साथ ही बिक जाती थी। जिसे देख किसान काफी खुश हुए। समर्थन मूल्य से 40 प्रतिशत अधिक दाम मिलने से खुश किसानों ने सरसों की फसल भी अधिक बोई है। गेहूं व धान से अधिक फसल एक एकड़ में सरसों की अधिक होती है। सरसों की फसल एक एकड़ में 12 क्विंटल तक होती है। कई बार तो कहीं-कहीं 15 क्विंटल तक हो जाती है। इसके अलावा गेहूं व धान के मुुकाबले लागत भी कम आती है तथा मुनाफा अधिक मिलता है। गेहूं के मुकाबले सरसों की कटाई भी काफी सरल है।
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तेल की मांग के चलते सरसों को अधिक प्रोत्साहन
सरकार तेल की मांग को देखते हुए किसानों को सरसों की फसल के लिए भी प्रोत्साहित कर रही हैं। किसानों को इसके लिए सरकार की तरफ से बीज भी सस्ते दामों में मिल रहा है तथा सब्सिडी भी मिल रही है। यही कारण है कि किसान भी सरसों की फसल की तरफ प्रोत्साहित हो रहा है।
सरसों की फसल काफी लाभदायक है। गेहूं व धान के मुकाबले कम पानी में सरसों की फसल हो जाती है। सरसों की फसल के लिए दो बार पानी की जरूरत पड़ती है। अक्टूबर महीने में सरसों की फसल की बुवाई होती है। सरसों की फसल बुवाई करने से अन्य फसलों को भी फायदा होता है। साथ ही जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ती है। गेहूं व धान की फसल लगातार बोने से जमीन के ऊपरी हिस्से की परत उखड़ जाती है। जमीन के पोषक तत्व खत्म होने लगते हैं। सरसों की फसल बुवाई करने से पोषक तत्व बनते हैं तथा जमीन ठीक होती है। उपजाऊ बनती है। लाभकारी कीट बनते हैं। सरसों की फसल बोने से मधु मक्खी पालन को भी बढ़ावा मिलता है। युवाओं को भी मधु मक्खी पालन से रोजगार मिलेगा। इसलिए किसानों को सरसों की फसल की तरफ बढ़ावा देना चाहिए।
- डॉ. महावीर मलिक, कृषि सलाहकार