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मनरेगा घोटाला: विशेष टीम का गठन
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पलवल। जिले में कोरोना काल के दौरान बड़े पैमाने पर हुए मनरेगा घोटाले में मुख्यमंत्री ने कड़ी कार्रवाई की है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर जांच के लिए विशेष टीम का गठन किया गया है। शुक्रवार को टीम ने पलवल पहुंचकर नरेगा के तहत हुए कार्यों की जांच की। जांच के दौरान बडे़ पैमाने पर घोटाला होने की बात सामने आई है। गांवों में की गई फिजिकल वेरीफिकेशन के दौरान पता चला है कि दो साल में मनरेगा के तहत गांवों में कोई कार्य नहीं हुए हैं, जबकि दस्तावेजों प्रत्येक गांव में नरेगा के तहत 20 लाख से एक करोड़ तक के कार्य दर्शाए गए हैं। जिले के करीब 200 गांवों में नरेगा के तहत हुए कार्य दिखाए गए हैं। साल 2020-21 के दौरान करीब 215 करोड़ रुपये रास्तों में मिट्टी डालने के नाम दिखाए गए, इनमें 10 से अधिक ऐसे गांव हैं जिनमें 50 से 80 लाख रुपये तथा 50 गांव ऐसे हैं। इमें से 20 से 50 लाख रुपये काम के नाम पर निकाले गए।
दरअसल, स्वच्छता अभियान के तहत फर्जी बिलों को पास करवाने पर कर्मचारियों में विवाद हो गया। मामले की जांच जिला परिषद के सीईओ प्रशांत कुमार को सौंपी गई तो नरेगा घोटाला उजागर हुआ। गांवों में जाकर जांच की गई तो किसी भी गांव में नरेगा के तहत करवाए गए कार्य नहीं मिले। मामले की जांच लोकपाल को सौंपी गई तो नरेगा से जुड़े आठ कर्मचारियों ने अचानक इस्तीफा दे दिया। इससे पहले सीईओ जिला परिषद ने अदालत की अवमानना व नरेगा घोटाले के मामले में आठ कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया। एक पक्के कर्मचारी को भी योजना से अलग कर दिया गया।
जमीनी स्तर पर जांच में नहीं मिले कार्य
लोकपाल द्वारा जमीनी स्तर पर की गई जांच में किसी भी गांव में कोई काम नहीं होना पाया गया। जांच के दौरान सरकारी कर्मचारियों और 80 से 85 साल की महिलाओं के जॉब कार्ड पाए गए। दूसरे गांवों तथा जवाहर नगर कैंप पलवल में रहने वालों के जॉब कार्ड पाए गए। सरपंच और ठेकेदार ने अपने परिजनों के भी जॉब कार्ड बने पाए गए। नांगल ब्राह्मण, डाडका, सेवली, सीहा, रूंधी, हुडीथल, रसूलपुर, बहरौला, रहराना, मंडकौला सहित अन्य गांवों की जांच के दौरान काम नहीं पाए गए। जिन लोगों के खाते में राशि आई है। उन्होंने काम नहीं करने की बात कही है। वर्ष 2020 में कोरोना काल के दौरान करीब 25 करोड़ रुपये के मिट्टी डालने के नाम पर सरकारी खजाने से निकाल लिए गए। इसी प्रकार साल 2021-22 में भी 26 करोड़ से अधिक रुपये की राशि निकाली गई। गांव सौंदहद में सरकारी कर्मचारियों के नाम पर टीन शेड बनाने के नाम पर भी राशि निकाली गई।
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पांच अप्रैल तक जांच रिपोर्ट करनी होगी पेश
नरेगा घोटाले के मामले में पंचायत विभाग के निदेशक ने आगामी पांच अप्रेल तक पूरी जांच रिर्पोट पेश करने के लिए कहा है। चंडीगढ से आई टीम जांच में जुटी है। नरेगा लोकपाल पंकज शर्मा ने बताया कि अभी तक वह जितने भी गांवों में जांच के लिए गई है, वहां कहीं भी काम नहीं मिला है। गांव नांगल ब्राह्मण में अनुसूचित जाति के पार्क के नाम पर बरती गई अनियमित्ताओं को लेकर बीडीपीओ, एसडीओ, जेई, सरपंच, ग्राम सचिव व मैट पर एक-एक हजार रुपये का जुर्माना किया जा चुका है। जिला के करीब 200 गांवों से शिकायत आई हुई हैं कि उनके गांव में नरेगा के नाम पर घोटाला किया गया है।
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दरअसल, स्वच्छता अभियान के तहत फर्जी बिलों को पास करवाने पर कर्मचारियों में विवाद हो गया। मामले की जांच जिला परिषद के सीईओ प्रशांत कुमार को सौंपी गई तो नरेगा घोटाला उजागर हुआ। गांवों में जाकर जांच की गई तो किसी भी गांव में नरेगा के तहत करवाए गए कार्य नहीं मिले। मामले की जांच लोकपाल को सौंपी गई तो नरेगा से जुड़े आठ कर्मचारियों ने अचानक इस्तीफा दे दिया। इससे पहले सीईओ जिला परिषद ने अदालत की अवमानना व नरेगा घोटाले के मामले में आठ कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया। एक पक्के कर्मचारी को भी योजना से अलग कर दिया गया।
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जमीनी स्तर पर जांच में नहीं मिले कार्य
लोकपाल द्वारा जमीनी स्तर पर की गई जांच में किसी भी गांव में कोई काम नहीं होना पाया गया। जांच के दौरान सरकारी कर्मचारियों और 80 से 85 साल की महिलाओं के जॉब कार्ड पाए गए। दूसरे गांवों तथा जवाहर नगर कैंप पलवल में रहने वालों के जॉब कार्ड पाए गए। सरपंच और ठेकेदार ने अपने परिजनों के भी जॉब कार्ड बने पाए गए। नांगल ब्राह्मण, डाडका, सेवली, सीहा, रूंधी, हुडीथल, रसूलपुर, बहरौला, रहराना, मंडकौला सहित अन्य गांवों की जांच के दौरान काम नहीं पाए गए। जिन लोगों के खाते में राशि आई है। उन्होंने काम नहीं करने की बात कही है। वर्ष 2020 में कोरोना काल के दौरान करीब 25 करोड़ रुपये के मिट्टी डालने के नाम पर सरकारी खजाने से निकाल लिए गए। इसी प्रकार साल 2021-22 में भी 26 करोड़ से अधिक रुपये की राशि निकाली गई। गांव सौंदहद में सरकारी कर्मचारियों के नाम पर टीन शेड बनाने के नाम पर भी राशि निकाली गई।
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पांच अप्रैल तक जांच रिपोर्ट करनी होगी पेश
नरेगा घोटाले के मामले में पंचायत विभाग के निदेशक ने आगामी पांच अप्रेल तक पूरी जांच रिर्पोट पेश करने के लिए कहा है। चंडीगढ से आई टीम जांच में जुटी है। नरेगा लोकपाल पंकज शर्मा ने बताया कि अभी तक वह जितने भी गांवों में जांच के लिए गई है, वहां कहीं भी काम नहीं मिला है। गांव नांगल ब्राह्मण में अनुसूचित जाति के पार्क के नाम पर बरती गई अनियमित्ताओं को लेकर बीडीपीओ, एसडीओ, जेई, सरपंच, ग्राम सचिव व मैट पर एक-एक हजार रुपये का जुर्माना किया जा चुका है। जिला के करीब 200 गांवों से शिकायत आई हुई हैं कि उनके गांव में नरेगा के नाम पर घोटाला किया गया है।