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Palwal News: ड्रॉपआउट छात्रों का रिकॉर्ड पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 12 May 2026 06:25 PM IST
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It is mandatory to upload the records of dropout students on the portal.
हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद ने जारी किए निर्देश
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संवाद न्यूज एजेंसी

हथीन। स्कूल छोड़ चुके छात्रों को दोबारा शिक्षा से जोड़ने के लिए शिक्षा विभाग ने नई पहल शुरू की है। अब सरकारी और निजी स्कूलों को छात्रों का पूरा रिकॉर्ड एमआईएस पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद की ओर से इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देश जारी किए गए हैं।



नई व्यवस्था के तहत यदि कोई छात्र स्कूल छोड़ता है तो उसकी पूरी जानकारी ऑनलाइन दर्ज करनी होगी। इसमें छात्र ने पढ़ाई क्यों छोड़ी। वह किसी दूसरे स्कूल में गया या नहीं। वर्तमान स्थिति क्या है और आगे उसने दाखिला लिया है या नहीं जैसी जानकारी पोर्टल पर उपलब्ध रहेगी। शिक्षा विभाग के अनुसार हर, साल शैक्षणिक सत्र समाप्त होने के बाद बड़ी संख्या में छात्र स्कूल छोड़ देते हैं। कई छात्र दूसरे विद्यालयों में दाखिला नहीं लेते जिससे उनका रिकॉर्ड ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में ड्रॉपआउट छात्रों की संख्या बढ़ती जाती है।
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अब यू-डाइस के अंतर्गत स्टूडेंट डाटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम के जरिए छात्रों की जानकारी एसआरएन नंबर से जोड़ी जाएगी, जिससे किसी भी छात्र की शैक्षणिक स्थिति आसानी से पता चल सकेगी। निर्देशों के अनुसार जो छात्र अगली कक्षा में पहुंचे हैं उनके अंक और वर्तमान स्थिति भी पोर्टल पर अपडेट करनी होगी। वहीं स्कूल छोड़ने वाले छात्रों का कारण और उनका अगला ठिकाना दर्ज करना अनिवार्य रहेगा।
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सरकारी, निजी विद्यालयों में एक लाख से अधिक कर रहे अध्ययन


जिले में इस समय 701 सरकारी और करीब 300 निजी विद्यालय संचालित हैं जिनमें एक लाख से अधिक छात्र अध्ययन कर रहे हैं। शिक्षा विभाग का मानना है कि कई बार आर्थिक, पारिवारिक या सामाजिक कारणों से छात्र पढ़ाई बीच में छोड़ देते हैं। अब ऑनलाइन रिकॉर्ड उपलब्ध होने से ऐसे बच्चों को तलाश कर फिर से शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने में मदद मिलेगी।



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विभाग का उद्देश्य जिले में ड्रॉपआउट छात्रों की संख्या को शून्य करना है। छात्रों को शिक्षा से जोड़कर ही उन्हें बेहतर भविष्य और प्रदेश की प्रगति में भागीदारी का अवसर दिया जा सकता है। - मामराज रावत, जिला शिक्षा अधिकारी
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