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एक साल में भी पूरी नहीं हुई फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस मामले की जांच

Sun, 12 Sep 2021 10:15 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 12 Sep 2021 10:15 PM IST
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Investigation of fake driving license case not completed even in a year
पलवल। क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण (आरटीए) सचिव कार्यालय में फर्जी तरीके से व्यावसायिक और भारी वाहन ड्राइविंग लाइसेंस बनाने के मामले की जांच एक साल में भी पूरी नहीं हो पाई है। मामले में अभी तक 10 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है। चार लोगों ने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी, जिसको रद्द कर दिया गया। मामले में अभी तक 7 लोगों की गिरफ्तारी नहीं हुई है। अब पुलिस एक बार फिर सक्रिय हो गई है। पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश देनी शुरू कर दी है, जिनमें चार आरटीए कार्यालय के कर्मचारी भी शामिल हैं।
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दरअसल, सीएम उड़नदस्ते के डीएसपी देवेंद्र कुमार ने 25 सितंबर 2020 को कैंप थाने पुलिस में मुकदमा दर्ज करवाया था कि क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण सचिव कार्यालय में बड़े स्तर पर नकली व्यावसायिक एवं भारी वाहन लाइसेंस बनाए और रिन्यू किए जा रहे हैं। आरटीए कार्यालय पलवल से गुरुग्राम जिले के गांव उदाका निवासी यूसुफ और जमील, गांव सहसोला निवासी रफीक के लाइसेंस रिन्यू किए गए थे। गुरुग्राम आरटीए कार्यालय की पड़ताल में पता चला कि उन्होंने लाइसेंस जारी ही नहीं किए। लाइसेंस पर गुरुग्राम अथॉरिटी की मोहर और छोटे हस्ताक्षर हैं। जांच में पता चला कि फर्जी तरीके से लाइसेंस रिन्यू करने का काम पलवल आरटीए कार्यालय में किया जा रहा है। इसके बाद इस मामले की जांच शुरू हुई।
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मामले का खुलासा होने पर जांच मुख्यालय डीएसपी अनिल कुमार को जांच सौंपी गई। शुरुआत में 212 फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस बनाने की बात सामने आई। मामले में पुलिस कंप्यूटर ऑपरेटर नकुल तेवतिया कौंडल व योगेश कुमार होडल, एडवोकेट रफीक अहमद, आरटीए कार्यालय में सब इंस्पेक्टर राजेश कुमार, असिस्टेंट ओमदत्त मढनाका, अकबर अली निवासी कोट, मोहमद अली मनकाकी, चंद्रपाल निवासी करनकी खेड़ली थाना सोहना को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि उदय सिंह की हाईकोर्ट से जमानत हो चुकी है। लाइसेंस का प्रिंट निकालने वाली कंपनी रोजमाटा के कर्मचारी रविंद्र निवासी होडल, प्रवीण, पवन कुमार और आरटीए कार्यालय के कर्मचारी सचिंद्र बहरौला की जमानत कोर्ट ने रद्द कर दी है। रोजमाटा के एक कर्मचारी प्रवीण को जेल भी भेजा जा चुका है। कंप्यूटर ऑपरेटर महिला कर्मचारियों को भी पुलिस शक के दायरे में मान रही है, जिनकी कभी भी गिरफ्तारी हो सकती है।
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अब तक 800 दस्तावेज मिले फर्जी
डीएसपी अनिल कुमार ने बताया कि अब तक करीब 800 दस्तावेज फर्जी तरीके से तैयार करने की बात सामने आई है। सभी की जांच की जा रही है। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उन सभी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अभी तक 10 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।
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