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कैसे हों सेना में युवा भर्ती, जब न सुविधाएं न कोच
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पलवल। देश की सीमा पर खड़े रहकर मुल्क की रक्षा करने का जज्बा तो जिले के युवाओं में बहुत है, लेकिन सेना में भर्ती होने के लिए जो तैयारी करनी है, उसके लिए जिले में संसाधनों का अभाव है। उसके लिए पर्याप्त सुविधाएं उन्हें नहीं मिल रही हैं। यहां तक जिले में ऐसा एक भी स्टेडियम या दौड़ लगाने के लिए ट्रैक तक नहीं हैं, जहां जिले के युवा दौड़ का अभ्यास कर सकें। सरकार की तरफ से पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध न कराए जाने के कारण सेना में भर्ती होने के शौकीन युवा जान जोखिम में डालकर सड़कों के किनारे सुबह-शाम शारीरिक अभ्यास कर रहे हैं। सड़कों पर दौड़ लगा व शारीरिक अभ्यास करते हुए ऐसे कई युवा हादसे का शिकार होकर अपनी जान भी गवां बैठे हैं। उसके बाद भी सरकार द्वारा आज तक न तो शहरी क्षेत्रों में और न ही ग्रामीण क्षेत्रों में दौड़ व अभ्यास के लिए ट्रैक बनवाए गए हैं। यहां तक कि घोषणा के बावजूद जिले में सेना भर्ती कार्यालय तक नहीं खोला गया है। यहां तक की दो साल से सेना में भर्ती भी नहीं हुई है।
जिले में पांच स्टेडियम लेकिन न कोच न सुविधाएं
पलवल में जिला स्तरीय स्टेडियम तो नहीं बन पाया है, लेकिन गांव स्तर पर पांच खेल स्टेडियम हैं। ये बंचारी, खेड़ला, पृथला, मंडकौला व पलवल में स्थित हैं। पलवल को छोड़कर किसी भी स्टेडियम में अच्छा ट्रैक नहीं है। घुघेरा में बनाया जा रहा जिला स्तरीय स्टेडियम का निर्माण आठ साल में भी पूरा नहीं हुआ है। पलवल में नेताजी सुभाष चंद्र बोस स्टेडियम, जीजीडीएसडी कालेज व ओमेक्स सिटी में ही युवाओं को दौड़ लगाने के लिए ट्रैक मिला हुआ है। गांवों में तो बिल्कुल भी जगह नहीं है
सुविधाएं और कोच भी नहीं
जिले में सेना में भर्ती होने के इच्छुक युवाओं को तैयारी कराने के लिए न तो सरकार की तरफ से कोई कोच तैनात किया गया है और न ही पर्याप्त सुविधाएं हैं। काफी युवा तो दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा, मेरठ व बंग्लूरू जैसे शहरों में जाकर सेना में भर्ती होने के लिए तैयारियां कर रहे हैं। बंग्लूरू में कोचिंग ले रहे सीहा गांव के युवा अमित के पिता धर्मवीर ने बताया कि उनके बेटे ने सड़कों पर दौड़कर तैयारी कर फिजिकल तो पास कर लिया, अब टेस्ट की तैयारी के लिए बंग्लूरू में कोचिंग ले रहा है।
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तीन साल में हो चुकी हैं 150 से अधिक युवाओं की मौत
एक साल पहले होडल-पुन्हाना मार्ग पर रिंकू नामक युवक की दौड़ अभ्यास के दौरान वाहन की चपेट में आने से मौत हो गई थी। उसके अलावा संदीप, आकाश व बादल नामक युवक घायल हो गए थे। बंचारी गांव के एक युवक की राजमार्ग पर दौड़ लगाते समय वाहन की चपेट में आने से मौत हो गई थी। वहीं पृथला के पास भी एक युवक की ट्रक की चपेट में आने से मौत हो गई थी। आंकड़ों पर नजर दौड़ाई जाए तो तीन साल में 150 से अधिक युवाओं की मौत हो चुकी है। 2019 में 77, 2020 में 56 तथा 2021 में भी 58 से अधिक युवाओं की मौत हो चुकी है। 2022 में सड़क दुर्घटना में अभी तक 23 युवाओं की मौत हो चुकी है।
जिले में ऐसी कोई सुविधा नहीं है, जिसके द्वारा युवा सेना में भर्ती होने के लिए तैयारी कर सकें। सरकार ने आज तक कोच तक उपलब्ध नहीं कराया। युवा केवल दौड़ का अभ्यास करते हैं, वे भी अपने दम पर।
- निखिल इंदौरिया, सल्लागढ़
जिले में पलवल नेताजी सुभाष चंद्र बोस स्टेडियम को छोड़कर कहीं भी ट्रैक नहीं है। जिस कारण युवा सड़कों पर दौड़ते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में तो कुछ भी नहीं है। सरकार को इस तरफ ध्यान देना चाहिए।
- योगेंद्र, गुप्तागंज बाजार
हमारे गांव में स्टेडियम तो बना दिया, लेकिन आज तक सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई। न ही कोई कोच है। स्टेडियम शराबियों का अड्डा बना हुआ है। युवाओं को सड़कों पर दौड़ लगानी पड़ती है।
- विनोद, अकबरपुर डकौरा
नेताजी सुभाष चंद्र बोस स्टेडियम में ट्रैक तो है, लेकिन उस हिसाब से नहीं है, जो होना चाहिए। यहां तक की यहां अभ्यास करने वाले युवाओं के लिए न पानी की सुविधा है और न ही शौचालयों की ठीक व्यवस्था है। सेना में भर्ती के लिए स्वयं प्रयास करते हैं, वह भी दो साल से नहीं हो रही।
- साहिल भारद्वाज, पलवल
मैंने रक्षा मंत्रालय को पत्र लिखकर मांग की थी कि फरीदाबाद, पलवल, नूंह में सैनिक भर्ती बोर्ड स्थापित किया जाए। मंत्रालय से जवाब मिला है कि इन जिलों में पर्याप्त सुविधाएं नहीं है, इस कारण सेना भर्ती बोर्ड कार्यालय नहीं खोला जा सकता। जिले में पांच हजार से अधिक युवा सेना में भर्ती के लिए तैयारी कर रहे हैं, लेकिन पिछले दो साल से भर्ती नहीं हुई है।
- बैएस पोसवाल, सेवानिवृत्त कैप्टन भारतीय सेना
मैंने खेल मंत्री से बात की है। मुख्यमंत्री को भी इस बारे में अवगत कराया है। मेरा प्रयास है कि जिले के हर बड़े गांव में सेना में भर्ती होने के लिए दौड़ लगाने वाले युवाओं के लिए ट्रैक बने। स्टेडियमों में पूरी सुविधाएं मिले तथा कोच नियुक्त हों। इसके लिए जल्द इंतजाम कराए जाएंगे। जल्द ही सारी सुविधाएं मिलेंगी। मुख्यमंत्री खेल को लेकर स्वयं बड़े जागरूक हैं।
- दीपक मंगला, विधायक पलवल
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जिले में पांच स्टेडियम लेकिन न कोच न सुविधाएं
पलवल में जिला स्तरीय स्टेडियम तो नहीं बन पाया है, लेकिन गांव स्तर पर पांच खेल स्टेडियम हैं। ये बंचारी, खेड़ला, पृथला, मंडकौला व पलवल में स्थित हैं। पलवल को छोड़कर किसी भी स्टेडियम में अच्छा ट्रैक नहीं है। घुघेरा में बनाया जा रहा जिला स्तरीय स्टेडियम का निर्माण आठ साल में भी पूरा नहीं हुआ है। पलवल में नेताजी सुभाष चंद्र बोस स्टेडियम, जीजीडीएसडी कालेज व ओमेक्स सिटी में ही युवाओं को दौड़ लगाने के लिए ट्रैक मिला हुआ है। गांवों में तो बिल्कुल भी जगह नहीं है
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सुविधाएं और कोच भी नहीं
जिले में सेना में भर्ती होने के इच्छुक युवाओं को तैयारी कराने के लिए न तो सरकार की तरफ से कोई कोच तैनात किया गया है और न ही पर्याप्त सुविधाएं हैं। काफी युवा तो दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा, मेरठ व बंग्लूरू जैसे शहरों में जाकर सेना में भर्ती होने के लिए तैयारियां कर रहे हैं। बंग्लूरू में कोचिंग ले रहे सीहा गांव के युवा अमित के पिता धर्मवीर ने बताया कि उनके बेटे ने सड़कों पर दौड़कर तैयारी कर फिजिकल तो पास कर लिया, अब टेस्ट की तैयारी के लिए बंग्लूरू में कोचिंग ले रहा है।
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तीन साल में हो चुकी हैं 150 से अधिक युवाओं की मौत
एक साल पहले होडल-पुन्हाना मार्ग पर रिंकू नामक युवक की दौड़ अभ्यास के दौरान वाहन की चपेट में आने से मौत हो गई थी। उसके अलावा संदीप, आकाश व बादल नामक युवक घायल हो गए थे। बंचारी गांव के एक युवक की राजमार्ग पर दौड़ लगाते समय वाहन की चपेट में आने से मौत हो गई थी। वहीं पृथला के पास भी एक युवक की ट्रक की चपेट में आने से मौत हो गई थी। आंकड़ों पर नजर दौड़ाई जाए तो तीन साल में 150 से अधिक युवाओं की मौत हो चुकी है। 2019 में 77, 2020 में 56 तथा 2021 में भी 58 से अधिक युवाओं की मौत हो चुकी है। 2022 में सड़क दुर्घटना में अभी तक 23 युवाओं की मौत हो चुकी है।
जिले में ऐसी कोई सुविधा नहीं है, जिसके द्वारा युवा सेना में भर्ती होने के लिए तैयारी कर सकें। सरकार ने आज तक कोच तक उपलब्ध नहीं कराया। युवा केवल दौड़ का अभ्यास करते हैं, वे भी अपने दम पर।
- निखिल इंदौरिया, सल्लागढ़
जिले में पलवल नेताजी सुभाष चंद्र बोस स्टेडियम को छोड़कर कहीं भी ट्रैक नहीं है। जिस कारण युवा सड़कों पर दौड़ते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में तो कुछ भी नहीं है। सरकार को इस तरफ ध्यान देना चाहिए।
- योगेंद्र, गुप्तागंज बाजार
हमारे गांव में स्टेडियम तो बना दिया, लेकिन आज तक सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई। न ही कोई कोच है। स्टेडियम शराबियों का अड्डा बना हुआ है। युवाओं को सड़कों पर दौड़ लगानी पड़ती है।
- विनोद, अकबरपुर डकौरा
नेताजी सुभाष चंद्र बोस स्टेडियम में ट्रैक तो है, लेकिन उस हिसाब से नहीं है, जो होना चाहिए। यहां तक की यहां अभ्यास करने वाले युवाओं के लिए न पानी की सुविधा है और न ही शौचालयों की ठीक व्यवस्था है। सेना में भर्ती के लिए स्वयं प्रयास करते हैं, वह भी दो साल से नहीं हो रही।
- साहिल भारद्वाज, पलवल
मैंने रक्षा मंत्रालय को पत्र लिखकर मांग की थी कि फरीदाबाद, पलवल, नूंह में सैनिक भर्ती बोर्ड स्थापित किया जाए। मंत्रालय से जवाब मिला है कि इन जिलों में पर्याप्त सुविधाएं नहीं है, इस कारण सेना भर्ती बोर्ड कार्यालय नहीं खोला जा सकता। जिले में पांच हजार से अधिक युवा सेना में भर्ती के लिए तैयारी कर रहे हैं, लेकिन पिछले दो साल से भर्ती नहीं हुई है।
- बैएस पोसवाल, सेवानिवृत्त कैप्टन भारतीय सेना
मैंने खेल मंत्री से बात की है। मुख्यमंत्री को भी इस बारे में अवगत कराया है। मेरा प्रयास है कि जिले के हर बड़े गांव में सेना में भर्ती होने के लिए दौड़ लगाने वाले युवाओं के लिए ट्रैक बने। स्टेडियमों में पूरी सुविधाएं मिले तथा कोच नियुक्त हों। इसके लिए जल्द इंतजाम कराए जाएंगे। जल्द ही सारी सुविधाएं मिलेंगी। मुख्यमंत्री खेल को लेकर स्वयं बड़े जागरूक हैं।
- दीपक मंगला, विधायक पलवल