{"_id":"6213d1a946c39f313f0c38fa","slug":"hospital-full-of-patients-palwal-news-noi633495712","type":"story","status":"publish","title_hn":"अस्पताल में बढ़े खांसी, जुकाम व बुखार के मरीज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अस्पताल में बढ़े खांसी, जुकाम व बुखार के मरीज
विज्ञापन
पलवल। जिला नागरिक अस्पताल में इन दिनों आ रहे कुपोषण के शिकार बच्चों को देख स्वास्थ्य विभाग बेहद चिंतित है। अस्पताल में उपचार के लिए आ रहे मरीजों में काफी बच्चे कुपोषण के शिकार मिल रहे हैं। अस्पताल में इस तरह के तीन से चार मरीजों को रोजाना रक्त भी चढ़ाया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग की माने तो यह एक गंभीर मामला है। ऐसे में लोगों को अपने बच्चों के खानपान व दिनचर्या में सुधार की आवश्यकता है। चिकित्सक ऐसे बच्चों के अभिभावकों को चिकित्सीय सलाह के साथ-साथ उनके खानपान पर भी ध्यान देने की सलाह दे रहे हैं। मौसम में बदलाव के बाद जिला नागरिक अस्पताल में एकाएक खांसी-जुकाम व बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ी है। इस तरह की बीमारी के बच्चे ज्यादा अस्पताल में उपचार के लिए आ रहे हैं। अस्पताल के चिकित्सकों की माने तो 1500 के करीब मरीज रोजाना उपचार के लिए आ रहे हैं। ऐसा मौसम में बदलाव के कारण हो रहा है। चिकित्सकों का मानना है कि ऐसे में बच्चों का ध्यान रखने की बेहद आवश्यकता है।
क्या है कुपोषण
शरीर के लिए आवश्यक संतुलित आहार लंबे समय तक नहीं मिलना ही कुपोषण है। कुपोषण के कारण बच्चों और महिलाओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, जिससे वे आसानी से कई तरह की बीमारियों के शिकार बन जाते हैं। कुपोषण की जानकारियाँ होना अत्यन्त जरूरी है। कुपोषण प्राय: पर्याप्त संतुलित आहार के अभाव में होता है। बच्चों और स्त्रियों के अधिकांश रोगों की जड़ में कुपोषण ही होता है। स्त्रियों में रक्ताल्पता या घेंघा रोग अथवा बच्चों में सूखा रोग या रतौंधी और यहां तक कि अंधत्व भी कुपोषण के ही दुष्परिणाम हैं। इसके अलावा ऐसे पचासों रोग हैं जिनका कारण अपर्याप्त या असंतुलित भोजन होता है।
विज्ञापन
अस्पताल में बुखार, खांसी व जुकाम से प्रभावित आ रहे बच्चों की जांच करने पाया गया कि काफी बच्चों में खून की कमी मिल रही है। रोजाना आ रहे 1500 मरीजों में से 150 के करीब बच्चों में खून की कमी मिल रही है। कई बच्चों में तो कुपोषण के लक्षण मिले हैं। तीन से चार बच्चे तो ऐसे हैं, जिन्हें खून चढ़ाने की जरूरत पड़ रही है। प्रतिदिन अस्पताल में तीन से चार बच्चों को खून चढ़ाया जा रहा है। इसके अलावा अभिभावकों को सलाह दी जा रही है। उन्हें उचित खानपान तथा खून बढ़ाने में सहायक फल व दवाइयों के बारे में जानकारी दी जा रही है। माता-पिता को आज इस तरह की बीमारी से सचेत रहने की आवश्यकता है। लोगों को खून की कमी मिलने पर बच्चों को उचित आहार जैसे ब्रेड, चावल, आलू खिलाना चाहिए। दूध, दही व फल पर्याप्त मात्रा में खिलाने चाहिए।
- डॉ. दिव्या अग्रवाल
विज्ञापन
स्वास्थ्य विभाग की माने तो यह एक गंभीर मामला है। ऐसे में लोगों को अपने बच्चों के खानपान व दिनचर्या में सुधार की आवश्यकता है। चिकित्सक ऐसे बच्चों के अभिभावकों को चिकित्सीय सलाह के साथ-साथ उनके खानपान पर भी ध्यान देने की सलाह दे रहे हैं। मौसम में बदलाव के बाद जिला नागरिक अस्पताल में एकाएक खांसी-जुकाम व बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ी है। इस तरह की बीमारी के बच्चे ज्यादा अस्पताल में उपचार के लिए आ रहे हैं। अस्पताल के चिकित्सकों की माने तो 1500 के करीब मरीज रोजाना उपचार के लिए आ रहे हैं। ऐसा मौसम में बदलाव के कारण हो रहा है। चिकित्सकों का मानना है कि ऐसे में बच्चों का ध्यान रखने की बेहद आवश्यकता है।
विज्ञापन
क्या है कुपोषण
शरीर के लिए आवश्यक संतुलित आहार लंबे समय तक नहीं मिलना ही कुपोषण है। कुपोषण के कारण बच्चों और महिलाओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, जिससे वे आसानी से कई तरह की बीमारियों के शिकार बन जाते हैं। कुपोषण की जानकारियाँ होना अत्यन्त जरूरी है। कुपोषण प्राय: पर्याप्त संतुलित आहार के अभाव में होता है। बच्चों और स्त्रियों के अधिकांश रोगों की जड़ में कुपोषण ही होता है। स्त्रियों में रक्ताल्पता या घेंघा रोग अथवा बच्चों में सूखा रोग या रतौंधी और यहां तक कि अंधत्व भी कुपोषण के ही दुष्परिणाम हैं। इसके अलावा ऐसे पचासों रोग हैं जिनका कारण अपर्याप्त या असंतुलित भोजन होता है।
विज्ञापन
अस्पताल में बुखार, खांसी व जुकाम से प्रभावित आ रहे बच्चों की जांच करने पाया गया कि काफी बच्चों में खून की कमी मिल रही है। रोजाना आ रहे 1500 मरीजों में से 150 के करीब बच्चों में खून की कमी मिल रही है। कई बच्चों में तो कुपोषण के लक्षण मिले हैं। तीन से चार बच्चे तो ऐसे हैं, जिन्हें खून चढ़ाने की जरूरत पड़ रही है। प्रतिदिन अस्पताल में तीन से चार बच्चों को खून चढ़ाया जा रहा है। इसके अलावा अभिभावकों को सलाह दी जा रही है। उन्हें उचित खानपान तथा खून बढ़ाने में सहायक फल व दवाइयों के बारे में जानकारी दी जा रही है। माता-पिता को आज इस तरह की बीमारी से सचेत रहने की आवश्यकता है। लोगों को खून की कमी मिलने पर बच्चों को उचित आहार जैसे ब्रेड, चावल, आलू खिलाना चाहिए। दूध, दही व फल पर्याप्त मात्रा में खिलाने चाहिए।
- डॉ. दिव्या अग्रवाल