पलवल। नए कृषि कानूनों के विरोध में केएमपी-केजीपी इंटरचेंज पर धरना दे रहे किसानों ने शनिवार को मुख्यमंत्री मनोहर लाल के नाम ज्ञापन सौंपा। विधायक दीपक मंगला के माध्यम से सौंपे गए ज्ञापन में 11 अक्तूबर की बजाय तुरंत धान व बाजरे की फसल को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद करने की मांग की गई। ज्ञापन किसान संघर्ष समिति के नेता मास्टर महेंद्र सिंह चौहान, धर्मचंद घुघेरा व राजेंद्र बैंसला के नेतृत्व में सौंपा गया।
किसान संघर्ष समिति नेतृत्व में शनिवार को धरने की कमान भूडेर पाल के किसानों ने संभाली। किसानों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया कि हर वर्ष सितंबर के अंतिम सप्ताह में धान की खरीद शुरू हो जाती थी। इस बार धान की खरीद के लिए एक अक्तूबर तिथि निर्धारित की थी, लेकिन खरीद शुरू नहीं की। सरकार अब 11 अक्तूबर से धान की खरीद करने की बात कर रही है। इसके अलावा सरकार ने इस बार बाजरे की फसल की खरीद करने से इंकार किया है। सरकार ने मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकृत बाजरे की फसल पर 600 रुपये सब्सिडी देने की घोषणा की है। सरकार द्वारा बाजरे की फसल न खरीदने से व्यापारी मनमाने दामों पर किसानों से फसल खरीदेगा, जिससे नुकसान केवल किसानों का होगा। निरंतर हुई बारिश से पहले ही फसलों में भारी नुकसान हो गया है। बुखार से हर परिवार के व्यक्ति पीड़ित है। किसानों को गुजारा करना मुश्किल हो रहा है। सरकार से मांग की गई कि धान व बाजरे की खरीद तुरंत शुरू की जाए। किसानों को फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य दिया जाए, ताकि किसान आर्थिक तंगी से परेशान न हों। धरने की अध्यक्षता धनीराम थानेदार ने की, जबकि संचालन राजकुमार ओहलियान ने किया। धरने को किसान नेता डॉ. रघुवीर सिंह, किशन चंद शर्मा, बिजेंद्र लालवा, श्रीचंद महाशय, अच्छेलाल, समयराम ककराली, इंद्र सिंह रावत, बाबूलाल सरपंच, चंद्रमुनि धतीर, मुंशीराम खुटैला सहित अन्य ने संबोधित किया।