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धरने में दिख रही अलग-अलग संस्कृतियों की झलक

Thu, 14 Jan 2021 10:35 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 14 Jan 2021 10:35 PM IST
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Glimpses of different cultures seen in the dharna
पलवल। किसान आंदोलन में भारत की संस्कृति ‘अनेकता में एकता’ की झलक दिखाई दे रही है। जहां किसान एक-दूसरे की संस्कृतियों को जान रहे हैं, वहीं बृहस्पतिवार को धरना स्थल पर चल रहे लंगर का पूरा मीनू बदल दिया गया। मकर संक्रांति के उपलक्ष्य में किसानों को गन्ने के रस से बनाई गई खीर, जलेबियां, खिचड़ी के साथ सरसों का साग खिलाया गया।
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केएमपी-केजीपी इंटरचेंज पर चल रहे धरने में गुरुद्वारों की तर्ज पर लंगर तैयार किया जा है। जिसमें बनने वाला प्रसाद भी त्योहारों को समर्पित किया जा रहा है। गुरु का ताल गुरुद्वारा आगरा की लंगर सेवा संभाले हुए सरदार जोगा सिंह ने बताया कि लोहड़ी के दिन पोष माह होता है। इस दिन मकर सक्रांति के लिए प्रसाद तैयार किया है। इसको मकर संक्रांति के दिन खाया जाता है। लोहड़ी जलाने के बाद गन्ने के रस की खीर बनाई जाती है, जिसमें दूध नहीं डाला जाता। इसे ठंडा करके खाया जाता है। इसके अलावा खिचड़ी व सरसों का साग बनाया जाता है, जिसे सुबह दही के साथ खाते हैं। वहीं सुबह गर्मागरम जलेबियां व सेवइयां बनाई जाती हैं।
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