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शहर में एक साल में 15 करोड़ खर्च करने पर भी सड़ रहा कूड़ा

Sun, 19 Sep 2021 10:53 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 19 Sep 2021 10:53 PM IST
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Garbage rotting in the city even after spending 15 crores in a year
पलवल में दिल्ली-आगरा राजमार्ग पर पड़ी गंदगी - फोटो : Palwal
पलवल (अनूप पाराशर)। नगर परिषद द्वारा सफाई व्यवस्था पर एक साल में 15 करोड़, 60 लाख रुपये खर्च करने के बावजूद शहर में कूड़ा सड़ रहा है। हालत इतनी बदतर है कि पूरा शहर गंदगी के ढेर पर बसा हुआ है। इन सबके बावजूद जिला प्रशासन और नगर परिषद इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। यहां तक की सत्ता पर काबिज भाजपा नेताओं ने भी आंखें मूंदी हुई हैं। जिसका खामियाजा शहर के लोग तो भुगत ही रहे हैं, साथ ही शहर से होकर आगरा और दिल्ली की तरफ जाने वाले पर्यटकों की नजर में भी पलवल की स्थिति बेहद गंदी नजर आ रही है। पर्यटक गाड़ियां रोककर राजमार्ग पर पड़े गंदगी के ढेरों की तस्वीर भी खींच लेते हैं।
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नगर परिषद द्वारा सफाई व्यवस्था पर प्रतिमाह करीब एक करोड़ 31 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं। फिर भी शहर में गंदगी ही गंदगी दिखाई पड़ती है। अब लोग भी इतनी बड़ी धनराशि खर्च करने पर सवाल उठा रहे हैं। यहां तक निवर्तमान पार्षदों ने भी इस मुद्दे पर नगर परिषद के अधिकारियों के साथ-साथ सत्ता पक्ष से जुड़े नेताओं पर भी उंगली उठानी शुरू कर दी है। लोगों ने इसके लिए मुख्यमंत्री और गृहमंत्री अनिल विज से भी जवाब मांगा है। वहीं, इस मुद्दे पर विपक्षी नेता भी सरकार पर निशाना साध रहे हैं। (संवाद)
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24 से 71 लाख हुई ठेके की धनराशि
नगर परिषद द्वारा शहर की सफाई व्यवस्था का ठेका एक साल पहले तक मात्र 24 लाख रुपये में टेंडर द्वारा छोड़ा जाता था। गत वर्ष इस ठेके को छोड़ने के लिए टेंडर के बाद इसकी धनराशि बढ़ाकर 71 लाख रुपये कर दी गई। इसके अलावा ट्रैक्टर, जेसीबी, अन्य गाड़ियों में डीजल भरवाने के नाम पर प्रतिमाह छह लाख रुपये तथा नियमित व पक्के कर्मचारियों सहित दैनिक सफाई कर्मियों के वेतन देने के नाम पर दी जा रही धनराशि को मिलाकर कुल एक करोड़, 31 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं। यदि पिछले 12 माह का हिसाब देखा जाए तो नगर परिषद एक साल में करीब 15 करोड़, 60 लाख रुपये सफाई पर खर्च कर चुकी है।
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परिषद के पास रोल पर भी हैं 170 सफाई कर्मी
71 लाख रुपये की धनराशि में सफाई का ठेका देने के बावजूद नगर परिषद के पास पालिका रोल पर भी 170 कर्मचारी कार्यरत हैं। इनके अलावा 51 पक्के कर्मचारी, 10 ग्रामीण सफाई कर्मचारी हैं। 25 दैनिक वेतन सफाई कर्मचारी भी हैं। सफाई ठेके पर 71 लाख रुपये खर्च करने के बाद भी इन सभी कर्मचारियों को वेतन दिया जाता है, जिस पर करीब 50 लाख रुपये की धनराशि खर्च की जाती है। नगर परिषद पलवल के पास 6 ट्रैक्टर-ट्रॉलियां, एक जेसीबी, डंपर और मशीनें हैं। इनका डीजल खर्च 6 लाख रुपये प्रतिमाह है।
ठेकेदार ने 146 की जगह लगाए मात्र 70 कर्मचारी
सूत्रों की माने तो नगर परिषद द्वारा ठेकेदार को सफाई के लिए 146 कर्मचारी, 40 टाटा टिपर, 10 ट्रैक्टर-ट्रॉॅलियां, तीन डंपर प्लेसर, दो जेसीबी, 60 साइकिल रिक्शा और सफाई निरीक्षण के लिए दो कामर्शियल गाड़ी तथा लगभग 4700 आरएफआईडी टैग लगाने थे। लेकिन, ठेकेदार द्वारा सिर्फ 70 कर्मचारी लगाए गए हैं। गाड़ियों पर कोई हेल्पर भी नहीं है। शहर में घर-घर से कूड़ा उठाने के बाद उसे ढका भी नहीं जाता है। साथ ही अब नगर परिषद के पास कूड़ा डालने तक को जगह नहीं है।
मेघपुर में ग्रामीणों ने कूड़ा डालने पर किया था विरोध
नगर परिषद फिरोजपुर में ग्रामीणों के विरोध के बाद सफाई कर्मियों को कूड़ा डालने के लिए मेघपुर स्थित डंपिग स्टेशन पर भेजा गया। यहां पर भी शनिवार को मेघपुर व घुघेरा के ग्रामीण एकत्रित हो गए तथा कूड़ा डालने से रोक दिया। विरोध कर नारेबाजी भी की थी।
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कांग्रेस सरकार में सफाई व्यवस्था का इतना बुरा हाल नहीं था। भाजपा सरकार में भ्रष्टाचार फैला हुआ है।भाजपा विधायक के चहेते ठेकेदारी में शामिल हैं। सफाई व्यवस्था के लिए प्रतिमाह एक करोड़ 31 लाख रुपये खर्च करना भ्रष्टाचार को दर्शाता है।

- करण सिंह दलाल, पूर्व मंत्री हरियाणा
शहर की सफाई व्यवस्था पर पूरा ध्यान दिया जा रहा है। उपायुक्त को इस संदर्भ में निर्देश दिए हैं कि शहर की सफाई की जाए तथा ठेकेदार को नोटिस दिया जाए। इसके बाद उपायुक्त ने ठेकेदार की कंपनी पर 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जल्द शहर की सफाई व्यवस्था में सुधार होगा।
- दीपक मंगला, विधायक पलवल
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