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Palwal News: किसानों को क्यूआर कोड और ई-टोकन से मिलेगी खाद

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 24 Jun 2026 12:01 AM IST
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Farmers will get fertilizer using QR codes and e-tokens
कालाबाजारी पर लगेगी रोक, लंबी लाइनों से मिलेगा छुटकारा
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संवाद न्यूज एजेंसी
हथीन।
किसानों को उर्वरक की कालाबाजारी और लंबी लाइनों से बचाने के लिए सरकार ने क्यूआर कोड और ई-टोकन आधारित ऑनलाइन खाद वितरण प्रणाली शुरू की है। इस डिजिटल व्यवस्था से किसान घर बैठे ही मोबाइल एप या पोर्टल के जरिये अपनी जरूरत के अनुसार खाद की अग्रिम बुकिंग कर सकते हैं। कृषि विभाग की ओर से इस संबंध में किसानों को जागरूक किया जा रहा है।

कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉक्टर बाबूराम का कहना है कि किसान आधिकारिक मोबाइल एप या पोर्टल पर जाकर अपनी आधार संख्या या फार्मर आईडी (एग्री स्टैक आइडी) दर्ज कर लाॅगिन करेंगे। आधार से लिंक पंजीकृत मोबाइल नंबर पर आए ओटीपी को दर्ज कर सत्यापन कराना होगा। लाॅगिन के बाद किसान को अपनी भूमि, खसरा नंबर, सीजन और बोई जाने वाली फसल की जानकारी दर्ज करनी होगी। फसल और रकबा (क्षेत्रफल) के अनुसार सॉफ्टवेयर अपने आप यूरिया या डीएपी की मात्रा स्क्रीन पर दिखा देगा।
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किसान को अपने नजदीकी खाद विक्रेता (रिटेलर) का चयन कर सबमिट करना होगा। बुकिंग होने पर एक ई-टोकन और क्यूआर कोड जनरेट होगा जिसे किसान डाउनलोड या स्क्रीनशॉट ले सकते हैं। इसके बाद किसान को अपने चुने हुए रिटेलर के पास जाना होगा। वहां मोबाइल में मौजूद क्यूआर कोड को स्कैन करवाना होगा या ई-टोकन नंबर देना होगा। सत्यापन होते ही किसान को बिना किसी कतार के तुरंत निर्धारित खाद मिल जाएगी।
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तीन दिन बाद निरस्त हो जाएगा टोकन

जनरेट किए गए ई-टोकन की वैधता तीन दिन (72 घंटे) की होती है। यदि तीन दिन के अंदर खाद नहीं उठाई गई तो टोकन अपने आप निरस्त हो जाएगा। जिन किसानों के पास स्मार्टफोन नहीं है वह अपने नजदीकी खाद विक्रेता, सहकारी समिति या जनसुविधा केंद्र पर जाकर बुकिंग करवा सकते हैं। इसके अलावा जिन किसानों के पास खुद की जमीन नहीं है (बटाईदार या किराएदार) वह भी भू-स्वामी की अनुमति से पोर्टल पर पंजीकृत होकर इस योजना का लाभ ले सकते हैं।


यदि किसान स्वयं जाने में असमर्थ है तो वह परिवार के किसी सदस्य को ओटीपी या आधार कार्ड के जरिये अधिकृत कर खाद लेने भेज सकता है। इस व्यवस्था से रीयल-टाइम डेटा की मदद से मांग और आपूर्ति पर सटीक नियंत्रण रहेगा और खाद की कमी जैसी समस्याओं का स्थायी समाधान हो सकेगा।
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