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बाजरे की खरीद न होने पर किसानों ने की पंचायत,आंदोलन करने की दी चेतावनी
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गांव खांबी में आयोजित पंचायत को संबोधित करते किसान नेता रतन सिंह सौरोत।
- फोटो : Palwal
पलवल। नए कृषि कानूनों को निरस्त कराने की मांग के संबंध में केएमपी-केजीपी इंटरचेंज पर चल रहे धरने में मंगलवार को लखीमपुर में किसानों की हुई मौत पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। इस दौरान किसानों ने कैंडल जलाकर मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए पीड़ित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना प्रकट की। वहीं, किसानों ने गांव खांबी में बाजरे की खरीद नहीं होने पर पंचायत का आयोजन किया।
धरने में राष्ट्रीय विचार मंच के अध्यक्ष स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती ने कहा कि उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे किसानों पर क्रूरतापूर्ण व अमानवीय हमला करना सरकार की बौखलाहट को दर्शाता है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी व उसके बेटे के खिलाफ कार्रवाई न करने से सरकार की किसान विरोधी मंशा साफ दिखाई दे रही है। सरकार तालिबानी रवैया अपनाने लगी है। इसके अलावा हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल द्वारा अपने कार्यकर्ताओं को लाठी उठाने और किसानों पर हमला करने के लिए उकसाए जाने की कड़े शब्दों में निंदा की। किसानों ने कहा कि इन दोनों घटनाओं से स्पष्ट हो चुका है कि सरकार शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे किसानों का दमन करना चाहती है। धरने की अध्यक्षता मुंशी राम खुटेला ने की, जबकि संचालन किशन चंद शर्मा बंचारी ने किया। धरने को मास्टर महेंद्र सिंह चौहान, धर्मचंद घुगेरा, रूपराम तेवतिया, राज कुमार घुघेरा, राजेंद्र बैंसला, बीधू सिंह, श्रीचंद महाशय व रमेशचंद गोड़ौता ने संबोधित किया।
धान की सस्ती खरीद का किया विरोध
प्रदेश सरकार द्वारा बाजरे की खरीद नहीं होने पर मंगलवार को गांव खांबी ने किसानों ने पंचायत की। इसकी अध्यक्षता भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय सचिव रतन सिंह सौरोत ने की। पंचायत में औने-पौने दाम पर धान की खरीद का विरोध किया गया। रतन सिंह सौरोत ने कहा कि सरकार द्वारा बाजरे की फसल न खरीदने से मंडियों में बाजरे के रेट गिर गए हैं, जिससे किसानों को नुकसान हो रहा है। सरकार धान की 1960 रुपये प्रति क्विंटल तथा बाजरे की 2250 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीद करे। मंडियों में किसानों के लिए विश्राम गृह बनाए जाएं। उन्होंने कहा कि यदि फसल की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर नहीं की गई तो किसान मंडियों में आंदोलन करने पर मजबूर होंगे। पंचायत में खांबी, मर्रोली, पालड़ी, पैंगलतू, भूपगढ़, डराना, भिडूकी, घसेड़ा, इलाहाबाद सहित अन्य गांवों के किसान मौजूद रहे। पंचायत में शेरा भिडूकी, गिर्राज सिंह, देवेंद्र सिंह, राजबीर, हरमोहन, नरेश, टेकचंद, गंगाश्याम, रोहताश व विरेंद्र पहल ने भी विचार रखे।
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धरने में राष्ट्रीय विचार मंच के अध्यक्ष स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती ने कहा कि उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे किसानों पर क्रूरतापूर्ण व अमानवीय हमला करना सरकार की बौखलाहट को दर्शाता है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी व उसके बेटे के खिलाफ कार्रवाई न करने से सरकार की किसान विरोधी मंशा साफ दिखाई दे रही है। सरकार तालिबानी रवैया अपनाने लगी है। इसके अलावा हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल द्वारा अपने कार्यकर्ताओं को लाठी उठाने और किसानों पर हमला करने के लिए उकसाए जाने की कड़े शब्दों में निंदा की। किसानों ने कहा कि इन दोनों घटनाओं से स्पष्ट हो चुका है कि सरकार शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे किसानों का दमन करना चाहती है। धरने की अध्यक्षता मुंशी राम खुटेला ने की, जबकि संचालन किशन चंद शर्मा बंचारी ने किया। धरने को मास्टर महेंद्र सिंह चौहान, धर्मचंद घुगेरा, रूपराम तेवतिया, राज कुमार घुघेरा, राजेंद्र बैंसला, बीधू सिंह, श्रीचंद महाशय व रमेशचंद गोड़ौता ने संबोधित किया।
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धान की सस्ती खरीद का किया विरोध
प्रदेश सरकार द्वारा बाजरे की खरीद नहीं होने पर मंगलवार को गांव खांबी ने किसानों ने पंचायत की। इसकी अध्यक्षता भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय सचिव रतन सिंह सौरोत ने की। पंचायत में औने-पौने दाम पर धान की खरीद का विरोध किया गया। रतन सिंह सौरोत ने कहा कि सरकार द्वारा बाजरे की फसल न खरीदने से मंडियों में बाजरे के रेट गिर गए हैं, जिससे किसानों को नुकसान हो रहा है। सरकार धान की 1960 रुपये प्रति क्विंटल तथा बाजरे की 2250 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीद करे। मंडियों में किसानों के लिए विश्राम गृह बनाए जाएं। उन्होंने कहा कि यदि फसल की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर नहीं की गई तो किसान मंडियों में आंदोलन करने पर मजबूर होंगे। पंचायत में खांबी, मर्रोली, पालड़ी, पैंगलतू, भूपगढ़, डराना, भिडूकी, घसेड़ा, इलाहाबाद सहित अन्य गांवों के किसान मौजूद रहे। पंचायत में शेरा भिडूकी, गिर्राज सिंह, देवेंद्र सिंह, राजबीर, हरमोहन, नरेश, टेकचंद, गंगाश्याम, रोहताश व विरेंद्र पहल ने भी विचार रखे।
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