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Palwal News: नहरी पानी के इंतजार में किसान, सूखने लगी खरीफ की फसल
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एक सप्ताह में पानी नहीं मिला तो अगेती खरीफ फसलें हो सकती हैं खराब
संवाद न्यूज एजेंसी
हथीन। उपमंडल क्षेत्र की नहरों, रजवाहों और माइनरों में सिंचाई के लिए पानी नहीं पहुंचने से खरीफ फसलों पर संकट गहराने लगा है। किसानों का कहना है कि यदि एक सप्ताह के भीतर नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया तो भीषण गर्मी के कारण ज्वार, बाजरा, तिलहन और दलहन की अगेती फसलें खराब हो सकती हैं।
हथीन क्षेत्र के अधिकांश हिस्सों में भूमिगत जल खारा होने के कारण किसान सिंचाई के लिए नहरी और वर्षा के पानी पर निर्भर हैं। जून माह समाप्त होने के बावजूद बारिश नहीं हुई है और अब फसलों को सिंचाई की आवश्यकता है। ऐसे में नहरों में पानी नहीं होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। यह समस्या घीगड़ाका, स्वामीका, हथीन, मलाई, बुराका, घर्रोट, जनाचौली, खोकियाका, जैनपुर, पचानका, रूपड़ाका, उटावड़ और मालूका सहित कई गांवों में बनी हुई है।
मलाई गांव के किसान मोहम्मद जकरिया ने कहा कि इस समय फसलों के लिए नहरी पानी बेहद जरूरी है। अगेती खरीफ फसलों के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण समय है। यदि सिंचाई समय पर नहीं हुई तो फसलों की पैदावार घट जाएगी, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति प्रभावित होगी। उन्होंने मांग की कि नहरों में जल्द पानी छोड़ा जाए ताकि किसानों की मेहनत और आय दोनों सुरक्षित रह सकें।
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हथीन के नांगल जाट गांव के किसान पवन रावत ने कहा कि खरीफ फसलों की बुवाई के बाद समय पर सिंचाई होना बेहद जरूरी है। नहरों में पानी नहीं आने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। यदि जल्द पानी नहीं मिला तो फसलों की बढ़वार प्रभावित होगी और उत्पादन कम होने से किसानों की आमदनी पर सीधा असर पड़ेगा।
खिल्लुका गांव के किसान याहया नम्बरदार ने कहा कि क्षेत्र का अधिकांश भूमिगत पानी खारा है, इसलिए किसान नहरी पानी पर निर्भर हैं। समय पर सिंचाई नहीं होने से बाजरा, ज्वार और अन्य खरीफ फसलें खराब होने का खतरा है। सरकार और सिंचाई विभाग को तुरंत नहरों में पानी छोड़ना चाहिए ताकि किसानों को नुकसान से बचाया जा सके।
विधायक मोहम्मद इसराइल चौधरी ने बताया कि उन्होंने सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता मोहित वशिष्ठ से इस संबंध में बात कर शीघ्र नहरों में पानी छोड़ने को कहा है।
कार्यकारी अभियंता मोहित वशिष्ठ
ने बताया कि यमुना में पर्याप्त पानी नहीं होने के कारण यह स्थिति बनी है। हालांकि विभाग नहरों में जल्द पानी छोड़ने के प्रयास कर रहा है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
हथीन। उपमंडल क्षेत्र की नहरों, रजवाहों और माइनरों में सिंचाई के लिए पानी नहीं पहुंचने से खरीफ फसलों पर संकट गहराने लगा है। किसानों का कहना है कि यदि एक सप्ताह के भीतर नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया तो भीषण गर्मी के कारण ज्वार, बाजरा, तिलहन और दलहन की अगेती फसलें खराब हो सकती हैं।
हथीन क्षेत्र के अधिकांश हिस्सों में भूमिगत जल खारा होने के कारण किसान सिंचाई के लिए नहरी और वर्षा के पानी पर निर्भर हैं। जून माह समाप्त होने के बावजूद बारिश नहीं हुई है और अब फसलों को सिंचाई की आवश्यकता है। ऐसे में नहरों में पानी नहीं होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। यह समस्या घीगड़ाका, स्वामीका, हथीन, मलाई, बुराका, घर्रोट, जनाचौली, खोकियाका, जैनपुर, पचानका, रूपड़ाका, उटावड़ और मालूका सहित कई गांवों में बनी हुई है।
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मलाई गांव के किसान मोहम्मद जकरिया ने कहा कि इस समय फसलों के लिए नहरी पानी बेहद जरूरी है। अगेती खरीफ फसलों के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण समय है। यदि सिंचाई समय पर नहीं हुई तो फसलों की पैदावार घट जाएगी, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति प्रभावित होगी। उन्होंने मांग की कि नहरों में जल्द पानी छोड़ा जाए ताकि किसानों की मेहनत और आय दोनों सुरक्षित रह सकें।
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हथीन के नांगल जाट गांव के किसान पवन रावत ने कहा कि खरीफ फसलों की बुवाई के बाद समय पर सिंचाई होना बेहद जरूरी है। नहरों में पानी नहीं आने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। यदि जल्द पानी नहीं मिला तो फसलों की बढ़वार प्रभावित होगी और उत्पादन कम होने से किसानों की आमदनी पर सीधा असर पड़ेगा।
खिल्लुका गांव के किसान याहया नम्बरदार ने कहा कि क्षेत्र का अधिकांश भूमिगत पानी खारा है, इसलिए किसान नहरी पानी पर निर्भर हैं। समय पर सिंचाई नहीं होने से बाजरा, ज्वार और अन्य खरीफ फसलें खराब होने का खतरा है। सरकार और सिंचाई विभाग को तुरंत नहरों में पानी छोड़ना चाहिए ताकि किसानों को नुकसान से बचाया जा सके।
विधायक मोहम्मद इसराइल चौधरी ने बताया कि उन्होंने सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता मोहित वशिष्ठ से इस संबंध में बात कर शीघ्र नहरों में पानी छोड़ने को कहा है।
कार्यकारी अभियंता मोहित वशिष्ठ
ने बताया कि यमुना में पर्याप्त पानी नहीं होने के कारण यह स्थिति बनी है। हालांकि विभाग नहरों में जल्द पानी छोड़ने के प्रयास कर रहा है।