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कोरोना के दौर में किसान भी बदहाल
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केशव देव पंडित
- फोटो : Palwal
कोरोना के दौर में किसान भी बदहाल
पलवल। कोरोना महामारी के बीच जीडीपी में 23.9 प्रतिशत की गिरावट आई है। सरकार ने सिर्फ कृषि क्षेत्र में बढ़ोत्तरी के आंकड़े दर्शाए हैं। वहीं क्षेत्र के किसान संगठन और कृषि उपकरणों के व्यवसाय से जुड़े इस पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार का यह केवल आंकड़ों का खेल है। किसान बदहाल स्थिति में हैं। उन्हें फसलों का समर्थन मूल्य तक नहीं मिल रहा है। ऐसे में कृषि क्षेत्र में जीडीपी में वृद्धि बताना किसानों के साथ धोखा है।
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय सचिव रतन सिंह सौरोत का कहना है कि किसानों को फसलों का समर्थन मूल्य तक नहीं मिल रहा है। कोरोना महामारी में किसानों की हालत आत्महत्या करने जैसी हो गई है। जहां कपास का समर्थन मूल्य सरकार ने 5700 रुपये तय किया है, वहीं किसानों को मंडी में केवल 2500 से 3500 रुपये भाव मिल रहा है। दूसरी तरफ सरकार तीन अध्यादेशों से भी किसानों का शोषण करने की योजना बना रही है। सरकार को पहले स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करनी चाहिए।
भारतीय किसान यूनियन भानू के प्रदेश स्तरीय नेता केशव देव पंडित का कहना है कि किसानों को केवल ठगने का काम किया जा रहा है। जहां जीडीपी में 23.9 फीसदी गिरावट आई है वहीं कृषि क्षेत्र कैसे अछूता रह सकता है। सरकार किसानों के साथ धोखा कर रही है। किसानों के लिए सरकार पहले समर्थन मूल्य पर फसलों के बेचने का इंतजाम कराए। पलवल में महेंद्रा ट्रैक्टर के अधिकृत विक्रेता व उद्यमी देवेंद्र चौहान का कहना है कि कृषि क्षेत्र में जहां पहले उत्पादन क्षमता 100 थी, वह अब घटकर 25 रह गई है। सरकार डीलरों की बिलिंग के हिसाब से जीडीपी में बढ़ोत्तरी दिखाकर आंकड़ों में खेल कर रही है। सच्चाई यह है कि पहले की तुलना में व्यापार घटा है।
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पलवल। कोरोना महामारी के बीच जीडीपी में 23.9 प्रतिशत की गिरावट आई है। सरकार ने सिर्फ कृषि क्षेत्र में बढ़ोत्तरी के आंकड़े दर्शाए हैं। वहीं क्षेत्र के किसान संगठन और कृषि उपकरणों के व्यवसाय से जुड़े इस पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार का यह केवल आंकड़ों का खेल है। किसान बदहाल स्थिति में हैं। उन्हें फसलों का समर्थन मूल्य तक नहीं मिल रहा है। ऐसे में कृषि क्षेत्र में जीडीपी में वृद्धि बताना किसानों के साथ धोखा है।
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय सचिव रतन सिंह सौरोत का कहना है कि किसानों को फसलों का समर्थन मूल्य तक नहीं मिल रहा है। कोरोना महामारी में किसानों की हालत आत्महत्या करने जैसी हो गई है। जहां कपास का समर्थन मूल्य सरकार ने 5700 रुपये तय किया है, वहीं किसानों को मंडी में केवल 2500 से 3500 रुपये भाव मिल रहा है। दूसरी तरफ सरकार तीन अध्यादेशों से भी किसानों का शोषण करने की योजना बना रही है। सरकार को पहले स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करनी चाहिए।
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भारतीय किसान यूनियन भानू के प्रदेश स्तरीय नेता केशव देव पंडित का कहना है कि किसानों को केवल ठगने का काम किया जा रहा है। जहां जीडीपी में 23.9 फीसदी गिरावट आई है वहीं कृषि क्षेत्र कैसे अछूता रह सकता है। सरकार किसानों के साथ धोखा कर रही है। किसानों के लिए सरकार पहले समर्थन मूल्य पर फसलों के बेचने का इंतजाम कराए। पलवल में महेंद्रा ट्रैक्टर के अधिकृत विक्रेता व उद्यमी देवेंद्र चौहान का कहना है कि कृषि क्षेत्र में जहां पहले उत्पादन क्षमता 100 थी, वह अब घटकर 25 रह गई है। सरकार डीलरों की बिलिंग के हिसाब से जीडीपी में बढ़ोत्तरी दिखाकर आंकड़ों में खेल कर रही है। सच्चाई यह है कि पहले की तुलना में व्यापार घटा है।

रतन सिंह सौरोत- फोटो : Palwal

देवेंद्र सिंह चौहान- फोटो : Palwal
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