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ब्रज की संस्कृति में डूबा किसान धरने का माहौल
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पलवल। नए कृषि कानूनों के विरोध में केएमपी-केजीपी इंटरचेंज पर चल रहे धरने में शुक्रवार को मशहूर गायक सीमा रावत की पार्टी ने समा बांध दिया। इससे धरने का माहौल ब्रज की संस्कृति में डूब गया। मथुरा से आई भजन पार्टी ने अपने गीतों के माध्यम से कृषि कानूनों पर जमकर कटाक्ष किए। इस दौरान भगवान श्रीकृष्ण के भजनों पर महिलाओं ने जमकर नृत्य किया। साथ ही किसान एकता और धैर्य बनाए रखने का संदेश दिया। भारी संख्या में महिला किसान आंदोलन को समर्थन देने पहुंची। महिला किसानों ने भी भजन प्रस्तुत किए। धरने में मीतरौल-श्रीनगर की सरदारी भी पहुंची, जिन्होंने एक लाख 21 हजार रुपये का सहयोग किया। किसान संघर्ष समिति के नेतृत्व में बीती दो दिसंबर से जारी धरने की अध्यक्षता बीर सिंह दलाल ने की, जबकि संचालन रूपराम तेवतिया ने किया।
किसान नेता रतन सिंह सौरोत ने कहा कि इंदिरा गांधी के शासनकाल में 25 जून 1975 को देश में आपातकाल लगाया गया था। 21 माह तक चले आपातकाल के दौरान सभी नागरिकों के मौलिक अधिकार खत्म कर दिए गए थे। यह दौर देश के नागरिकों के लिए विपरीत परिस्थितियों से भरा था। इस दौरान सरकार द्वारा काफी अत्याचार किए गए। उन्होंने कहा कि आज फिर देश में आपातकाल जैसी स्थिति पैदा हो गई है। सरकार अहंकार में है और मन चाहे कानूनों को लागू कर रही है। किसान, मजदूर और वंचित समाज अपने हितों को सुरक्षित रखने के लिए संघर्ष कर रहा है। वहीं, सरकार किसानों और मजदूरों की पीड़ा सुनने को तैयार नहीं है।
मास्टर महेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि किसान आंदोलन के सात माह पूर्व होने पर शनिवार को ‘खेती बचाओ-लोकतंत्र बचाओ दिवस’ मनाया जाएगा, जिसमें भारी संख्या में किसान मौजूद रहेंगे। यह आंदोलन को तेज करने की दिशा में एक नया प्रयास साबित होगा। धरने को किसान सभा के नेता धर्मचंद घुघेरा, नरेंद्र सहरावत, किशन चंद शर्मा, रोशनलाल अल्लीका, बीर सिंह औरंगाबाद, दरियाब सौरोत आदि ने संबोधित किया।
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किसान नेता रतन सिंह सौरोत ने कहा कि इंदिरा गांधी के शासनकाल में 25 जून 1975 को देश में आपातकाल लगाया गया था। 21 माह तक चले आपातकाल के दौरान सभी नागरिकों के मौलिक अधिकार खत्म कर दिए गए थे। यह दौर देश के नागरिकों के लिए विपरीत परिस्थितियों से भरा था। इस दौरान सरकार द्वारा काफी अत्याचार किए गए। उन्होंने कहा कि आज फिर देश में आपातकाल जैसी स्थिति पैदा हो गई है। सरकार अहंकार में है और मन चाहे कानूनों को लागू कर रही है। किसान, मजदूर और वंचित समाज अपने हितों को सुरक्षित रखने के लिए संघर्ष कर रहा है। वहीं, सरकार किसानों और मजदूरों की पीड़ा सुनने को तैयार नहीं है।
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मास्टर महेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि किसान आंदोलन के सात माह पूर्व होने पर शनिवार को ‘खेती बचाओ-लोकतंत्र बचाओ दिवस’ मनाया जाएगा, जिसमें भारी संख्या में किसान मौजूद रहेंगे। यह आंदोलन को तेज करने की दिशा में एक नया प्रयास साबित होगा। धरने को किसान सभा के नेता धर्मचंद घुघेरा, नरेंद्र सहरावत, किशन चंद शर्मा, रोशनलाल अल्लीका, बीर सिंह औरंगाबाद, दरियाब सौरोत आदि ने संबोधित किया।
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