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9 लोगों के फर्जी गन लाइसेंस बनाने का खुलासा
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पुलिस की गिरफ्त में पूर्व नायब तहसीलदार का आरोपी पुत्र, जिसने बनवा दिए फर्जी आर्मस लाइसेंस।
- फोटो : Palwal
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पलवल। जिले में पांच साल से चल रहे फर्जी गन लाइसेंस बनवाने के धंधे का खुलासा होने व पूर्व नायब तहसीलदार के बेटे की गिरफ्तारी के बाद जिला प्रशासन के अंतर्गत आने वाले विभिन्न सरकारी विभाग कार्यालयों में अफरातफरी मच गई है। मामले में हिरासत में लिए गए पूर्व नायब तहसीलदार के बेटे सुनील ने पैसे लेकर 9 फर्जी गन लाइसेंस बनाने की बात स्वीकार कर ली है। इस फर्जीवाड़ा कांड में शामिल अभी और भी कई कर्मचारी गिरफ्तार हो सकते हैं तथा एक-दो बड़े अधिकारियों पर भी गाज गिर सकती है। पूर्व नायब तहसीलदार के आरोपी पुत्र की गिरफ्तारी के बाद हालांकि अभी केवल फर्जी गन लाइसेंस बनाने के 9 मामले सामने आए हैं, लेकिन उपायुक्त को संदेह है कि मामले की पूरी जांच होने के बाद काफी संख्या में फर्जी लाइसेंस मिल सकते हैं। अब इस मामले को उपायुक्त यशपाल व पुलिस कप्तान नरेंद्र बिजारनिया स्वयं देख रहे हैं, जिससे मामले में शामिल आरोपियों का खुलासा होने की उम्मीद ज्यादा है।
जिला उपायुक्त यशपाल को जुलाई में कहीं से जानकारी मिली कि उनके कार्यालय के अंतर्गत आने वाले पीएलए शाखा से फर्जी गन लाइसेंस जारी किए जा रहे हैं। जानकारी मिलने के बाद उपायुक्त यशपाल ने अपने स्तर पर जांच की तो मामला सही पाया और उन्हें दो लोगों के फर्जी बनाए गए गन लाइसेंस की प्रतिलिपि भी बरामद हो गई। उपायुक्त ने तुरंत ही 24 जुलाई को पुलिस कप्तान नरेंद्र बिजारनिया को इस मामले की जानकारी देते हुए लिखित शिकायत दे दी। उपायुक्त की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए कैंप थाना पुलिस ने धारम पट्टी होडल निवासी बीर सिंह नामक उस व्यक्ति को हिरासत में पूछताछ के लिए ले लिया, जिसका फर्जी लाइसेंस बनाया गया था। जैसे ही पुलिस ने उसे हिरासत में लिया तो उसे हृदय गति रुकने की शिकायत बन गई और उसे एक निजी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इस घटना के बाद उपायुक्त व पुलिस कप्तान ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच अपने स्तर पर करानी शुरू कर दी।
अब जांच में पूर्व नायब तहसीलदार का बेटा सुनील जो कि अंत्योदय सरल केंद्र पलवल में कार्यरत था, का नाम आते ही पुलिस ने तुरंत उसे गिरफ्तार कर लिया। आरोपी की गिरफ्तारी के बाद जब पुलिस ने उससे सख्ती की तो पूछताछ में बताया कि वह एक लाइसेंस बनाने के नाम पर 60 हजार रुपये लेता था, जबकि उसके पास लाइसेंस बनवाने के लिए लोगों को लाने वाले डेढ़ से दो लाख रुपये वसूलते थे। पुलिस को उसने फिलहाल बताया है कि उसके साथ सुरजीत व गुरूदत्त नामक व्यक्ति इस फर्जीवाड़ा कांड में शामिल थे तथा सबसे पहले उनके ही फर्जी गन लाइसेंस बनाए थे। उसके बाद धारम पट्टी होडल निवासी बीर सिंह व भिडूकी गांव निवासी राहुल के फर्जी गन लाइसेंस बनाए गए थे। ये दोनों लाइसेंस 8 मार्च 2019 को जारी किए गए, जबकि उस दिन राजपत्रित अवकाश था। पुलिस उससे गहनता से पूछताछ कर रही है।
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पहले भी खुल चुका था आरोपी सुनील का मामला
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार फर्जी लाइसेंस बनाने के मामले में पहले भी खुलासा हो चुका था, लेकिन पूर्व नायब तहसीलदार के पलवल में तैनात होने पर यह मामला दबा दिया गया। बताया गया है कि उस मामले में एक किसी न्यायिक अधिकारी का फर्जी लाइसेंस बना दिया गया था, जिसे बाद में आरोपी के पिता पूर्व नायब तहसीलदार दुर्गा प्रसाद ने एक बड़े आईएएस अधिकारी की मदद से सुलझाकर मामला दबा दिया था, लेकिन उस समय किसी ने इस मामले में आगे जांच करने की कोशिश नहीं की। सूत्रों का कहना है कि उस बड़े अधिकारी पर राजनैतिक दबाव डलवाकर मामले को दबाया गया था।
रुपये लेकर डीसी रेट पर भी नौकरी लगवाता है आरोपी सुनील
उपायुक्त कार्यालय के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार गिरफ्तार पूर्व नायब तहसीलदार का यह आरोपी पुत्र सुनील जिले के सरकारी विभागों में खासकर स्वास्थ्य विभाग में एक से दो लाख रुपये लेकर अधिकारियों की मिलीभगत से लोगों को डीसी रेट पर नौकरी दिलवाता था। इस मामले में भी उपायुक्त द्वारा जांच कराई जा रही है कि कौन-कौन अधिकारी व कर्मचारी सुनील से जुड़े हुए हैं।
डीएसपी मुख्यालय रमेश कुमार ने बताया कि आरोपी सुनील को गिरफ्तार कर अदालत से दो दिन के रिमांड पर लिया है। उसने नौ फर्जी लाइसेंस बनाने की बात स्वीकार कर ली है। इसके बाद भी उससे और जानकारी हासिल की जा रही है। शक है कि इस मामले में काफी लोग जुड़े हुए हैं।
उपायुक्त यशपाल का कहना है कि मामले में जानकारी मिलते ही पुलिस को शिकायत देकर जांच शुरू करा दी थी। वे स्वयं भी इस मामले को गंभीरता से लेकर अपने स्तर पर जांच करा रहे हैं। उन्हें शक है कि इस आरोपी सुनील के साथ और भी काफी लोग जुड़े हैं। जल्द ही उनका खुलासा हो जाएगा तथा इस तरह की सुरक्षा से जुड़े मामले में जो भी आरोपी मिलेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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जिला उपायुक्त यशपाल को जुलाई में कहीं से जानकारी मिली कि उनके कार्यालय के अंतर्गत आने वाले पीएलए शाखा से फर्जी गन लाइसेंस जारी किए जा रहे हैं। जानकारी मिलने के बाद उपायुक्त यशपाल ने अपने स्तर पर जांच की तो मामला सही पाया और उन्हें दो लोगों के फर्जी बनाए गए गन लाइसेंस की प्रतिलिपि भी बरामद हो गई। उपायुक्त ने तुरंत ही 24 जुलाई को पुलिस कप्तान नरेंद्र बिजारनिया को इस मामले की जानकारी देते हुए लिखित शिकायत दे दी। उपायुक्त की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए कैंप थाना पुलिस ने धारम पट्टी होडल निवासी बीर सिंह नामक उस व्यक्ति को हिरासत में पूछताछ के लिए ले लिया, जिसका फर्जी लाइसेंस बनाया गया था। जैसे ही पुलिस ने उसे हिरासत में लिया तो उसे हृदय गति रुकने की शिकायत बन गई और उसे एक निजी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इस घटना के बाद उपायुक्त व पुलिस कप्तान ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच अपने स्तर पर करानी शुरू कर दी।
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अब जांच में पूर्व नायब तहसीलदार का बेटा सुनील जो कि अंत्योदय सरल केंद्र पलवल में कार्यरत था, का नाम आते ही पुलिस ने तुरंत उसे गिरफ्तार कर लिया। आरोपी की गिरफ्तारी के बाद जब पुलिस ने उससे सख्ती की तो पूछताछ में बताया कि वह एक लाइसेंस बनाने के नाम पर 60 हजार रुपये लेता था, जबकि उसके पास लाइसेंस बनवाने के लिए लोगों को लाने वाले डेढ़ से दो लाख रुपये वसूलते थे। पुलिस को उसने फिलहाल बताया है कि उसके साथ सुरजीत व गुरूदत्त नामक व्यक्ति इस फर्जीवाड़ा कांड में शामिल थे तथा सबसे पहले उनके ही फर्जी गन लाइसेंस बनाए थे। उसके बाद धारम पट्टी होडल निवासी बीर सिंह व भिडूकी गांव निवासी राहुल के फर्जी गन लाइसेंस बनाए गए थे। ये दोनों लाइसेंस 8 मार्च 2019 को जारी किए गए, जबकि उस दिन राजपत्रित अवकाश था। पुलिस उससे गहनता से पूछताछ कर रही है।
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पहले भी खुल चुका था आरोपी सुनील का मामला
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार फर्जी लाइसेंस बनाने के मामले में पहले भी खुलासा हो चुका था, लेकिन पूर्व नायब तहसीलदार के पलवल में तैनात होने पर यह मामला दबा दिया गया। बताया गया है कि उस मामले में एक किसी न्यायिक अधिकारी का फर्जी लाइसेंस बना दिया गया था, जिसे बाद में आरोपी के पिता पूर्व नायब तहसीलदार दुर्गा प्रसाद ने एक बड़े आईएएस अधिकारी की मदद से सुलझाकर मामला दबा दिया था, लेकिन उस समय किसी ने इस मामले में आगे जांच करने की कोशिश नहीं की। सूत्रों का कहना है कि उस बड़े अधिकारी पर राजनैतिक दबाव डलवाकर मामले को दबाया गया था।
रुपये लेकर डीसी रेट पर भी नौकरी लगवाता है आरोपी सुनील
उपायुक्त कार्यालय के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार गिरफ्तार पूर्व नायब तहसीलदार का यह आरोपी पुत्र सुनील जिले के सरकारी विभागों में खासकर स्वास्थ्य विभाग में एक से दो लाख रुपये लेकर अधिकारियों की मिलीभगत से लोगों को डीसी रेट पर नौकरी दिलवाता था। इस मामले में भी उपायुक्त द्वारा जांच कराई जा रही है कि कौन-कौन अधिकारी व कर्मचारी सुनील से जुड़े हुए हैं।
डीएसपी मुख्यालय रमेश कुमार ने बताया कि आरोपी सुनील को गिरफ्तार कर अदालत से दो दिन के रिमांड पर लिया है। उसने नौ फर्जी लाइसेंस बनाने की बात स्वीकार कर ली है। इसके बाद भी उससे और जानकारी हासिल की जा रही है। शक है कि इस मामले में काफी लोग जुड़े हुए हैं।
उपायुक्त यशपाल का कहना है कि मामले में जानकारी मिलते ही पुलिस को शिकायत देकर जांच शुरू करा दी थी। वे स्वयं भी इस मामले को गंभीरता से लेकर अपने स्तर पर जांच करा रहे हैं। उन्हें शक है कि इस आरोपी सुनील के साथ और भी काफी लोग जुड़े हैं। जल्द ही उनका खुलासा हो जाएगा तथा इस तरह की सुरक्षा से जुड़े मामले में जो भी आरोपी मिलेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।