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गर्भवती महिलाओं में खून की कमी से जान का खतरा
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होडल। उपमंडल नागरिक अस्पताल में स्वास्थ्य जांच और प्रसव के लिए आने वाली 90 फीसदी गर्भवती महिलाओं में खून की कमी के साथ ही पौष्टिक तत्वों का अभाव पाया गया है। गर्भावस्था में अधिकतर महिलाएं मानसिक तनाव से ग्रस्त होती हैं, जिससे जच्चा-बच्चा को खतरा रहता है। उपमंडल नागरिक अस्पताल के चिकित्सक डॉ. पंकज का कहना है कि गर्भवती महिलाओं में पौष्टिक तत्वों की कमी अक्सर खतरनाक साबित होती है। इससे गर्भ में पल रहे बच्चे के शरीर का विकास रुक जाता है। बच्चे के जन्म के बाद भी इसके खतरनाक असर देखने को मिल सकते हैं। असंतुलित आहार से बच्चे का शरीर कमजोर होता चला जाता है। बच्चे के शरीर में स्ट्रोक के खतरे पैदा होने लगते हैं, साथ ही उच्च रक्तचाप (हाईपरटेंशन) और मधुमेह होने का खतरा भी बढ़ जाता है।
मानसिक तनाव का दुष्प्रभाव
बच्चा मां के गर्भ में होता है तो मां द्वारा की जाने वाली सभी प्रतिक्रियाओं का असर उस पर पड़ता है। ऐसे समय में हर मां को अपने आसपास के वातावरण को स्वस्थ बनाना चाहिए। हमेशा खुश रहना चाहिए। जो मां जितने तनाव में रहती है उसका असर सीधे उसके बच्चे के स्वास्थ्य के साथ ही उसके विकास पर भी पड़ता है। इसका असर बच्चे के जन्म के बाद देखा जा सकता है। मां के तनाव से बच्चे का जीवन भी तनाव में रहने वाली प्रवृत्ति का बन जाता है। बच्चा चिड़चिड़ा हो जाता है। इसलिए ऐसे समय में तनाव से बचना चाहिए।
कम मिलती है हीमोग्लोबिन की मात्रा
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक गर्भवती महिला के शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा 12.5 ग्राम होनी चाहिए। डॉ पंकज का कहना है कि अक्सर गर्भवती महिलाएं डिलीवरी के लिए अस्पताल पहुंचती हैं तो किसी में भी हीमोग्लोबिन की मात्रा 12 ग्राम नहीं होती। कुछ में बहुत कम होगा और कुछ में मात्र 4 ग्राम मात्रा होती है। जो महिलाएं तीन से चार बच्चों को जन्म देती हैं उनमें हीमोग्लोबिन कम होने का खतरा ज्यादा होता है। मुस्लिम ग्रामीण क्षेत्र में अधिकतर गर्भावस्था में खून की कमी से मां बच्चे की जान को खतरा बना रहता है।
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गर्भावस्था में क्या भोजन करें महिलाएं
हरी सब्जी, पनीर के अलावा गुड़ खाएं। गुड़ में आयरन की मात्रा ज्यादा होती है। हरी सब्जी अन्य पौष्टिक तत्वों की पूर्ति करते हैं लेकिन गुड़ आयरन की कमी पूरी करने के अलावा अन्य कई पौष्टिक तत्वों की पूर्ति करता है। विटामिन डी की कमी होने के बाद डॉक्टर की सलाह पर दवा लेनी चाहिए और धूप में ज्यादा से ज्यादा समय रहें। यदि महिलाओं को कोई पदार्थ उपलब्ध नहीं हो तो लोहे की कढ़ाई में सब्जी बनाकर जरूर खाएं जिससे लौह तत्वों की कमी पूरी होती रहेगी।
इस बारे में पूर्व मंत्री हर्ष कुमार का कहना है कि महिलाओं में खून की कमी के मामले में सरकार पूरी तरह से जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में आयरन, कैल्सियम की गोलियां तक नहीं मिलतीं। हर्ष कुमार ने कहा कि हाल के बजट में सरकार ने स्वास्थ्य बजट में कटौती की है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2018 में 2021 गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी अस्पताल में हुई। इनमें 80 फीसदी महिलाओं में खून के साथ अन्य पोषक तत्व की कमी थी।
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मानसिक तनाव का दुष्प्रभाव
बच्चा मां के गर्भ में होता है तो मां द्वारा की जाने वाली सभी प्रतिक्रियाओं का असर उस पर पड़ता है। ऐसे समय में हर मां को अपने आसपास के वातावरण को स्वस्थ बनाना चाहिए। हमेशा खुश रहना चाहिए। जो मां जितने तनाव में रहती है उसका असर सीधे उसके बच्चे के स्वास्थ्य के साथ ही उसके विकास पर भी पड़ता है। इसका असर बच्चे के जन्म के बाद देखा जा सकता है। मां के तनाव से बच्चे का जीवन भी तनाव में रहने वाली प्रवृत्ति का बन जाता है। बच्चा चिड़चिड़ा हो जाता है। इसलिए ऐसे समय में तनाव से बचना चाहिए।
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कम मिलती है हीमोग्लोबिन की मात्रा
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक गर्भवती महिला के शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा 12.5 ग्राम होनी चाहिए। डॉ पंकज का कहना है कि अक्सर गर्भवती महिलाएं डिलीवरी के लिए अस्पताल पहुंचती हैं तो किसी में भी हीमोग्लोबिन की मात्रा 12 ग्राम नहीं होती। कुछ में बहुत कम होगा और कुछ में मात्र 4 ग्राम मात्रा होती है। जो महिलाएं तीन से चार बच्चों को जन्म देती हैं उनमें हीमोग्लोबिन कम होने का खतरा ज्यादा होता है। मुस्लिम ग्रामीण क्षेत्र में अधिकतर गर्भावस्था में खून की कमी से मां बच्चे की जान को खतरा बना रहता है।
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गर्भावस्था में क्या भोजन करें महिलाएं
हरी सब्जी, पनीर के अलावा गुड़ खाएं। गुड़ में आयरन की मात्रा ज्यादा होती है। हरी सब्जी अन्य पौष्टिक तत्वों की पूर्ति करते हैं लेकिन गुड़ आयरन की कमी पूरी करने के अलावा अन्य कई पौष्टिक तत्वों की पूर्ति करता है। विटामिन डी की कमी होने के बाद डॉक्टर की सलाह पर दवा लेनी चाहिए और धूप में ज्यादा से ज्यादा समय रहें। यदि महिलाओं को कोई पदार्थ उपलब्ध नहीं हो तो लोहे की कढ़ाई में सब्जी बनाकर जरूर खाएं जिससे लौह तत्वों की कमी पूरी होती रहेगी।
इस बारे में पूर्व मंत्री हर्ष कुमार का कहना है कि महिलाओं में खून की कमी के मामले में सरकार पूरी तरह से जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में आयरन, कैल्सियम की गोलियां तक नहीं मिलतीं। हर्ष कुमार ने कहा कि हाल के बजट में सरकार ने स्वास्थ्य बजट में कटौती की है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2018 में 2021 गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी अस्पताल में हुई। इनमें 80 फीसदी महिलाओं में खून के साथ अन्य पोषक तत्व की कमी थी।