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अध्यापकों ने समस्याओं को लेकर किया रोष प्रदर्शन, दिया ज्ञापन
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पलवल। हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ के बैनर तले सोमवार को जिले के दर्जनों अध्यापकों ने छात्रों की समस्याओं को लेकर खंड कार्यालय पर धरना दिया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी अशोक बघेल को शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन दिया।
धरने की अध्यक्षता खंड प्रधान अशोक गर्ग और संचालन खंड सचिव महेश चंद ने किया। जिला प्रधान वेदपाल ने कहा कि सुलभ शिक्षा प्राप्त करना समाज की बुनियादी आवश्यकता है। इसकी पूर्ति करना सरकार का प्रथम दायित्व है, लेकिन सरकार पीछे हट रही है। क्योंकि, जनसंख्या वृद्धि के साथ-साथ जहां नए विद्यालय खोले जाने थे उसकी जगह स्कूलों को बंद किया जा रहा है। दर्जनों स्कूलों से विज्ञान संकाय को समाप्त कर दिया गया है। मुख्यमंत्री खुले मंच से सरकारी स्कूलों का प्रबंधन निजी हाथों में देने की बात करते हैं। स्कूलों में हजारों पद खाली पड़े हैं। उन पदों पर सक्षम युवाओं को लगाकर शिक्षकों का शोषण करने की तैयारी की जा रही है। शक्ति का केंद्रीयकरण करके सक्षम एनजीओ के रूप में समांतर शिक्षा चलाई जा रही है तथा अध्यापकों को पाठ्यक्रम पढ़ाने नहीं दिया जा रहा है।
राज्य उपप्रधान हरिचन्द वर्मा ने कहा कि अध्यापक संघ ने ज्ञापन में नई पेंशन स्कीम के बजाय पुरानी पेंशन बहाल करना, स्कूलों को बंद करने की बजाय जन शिक्षा का विस्तार करना, गेस्ट टीचर्स समेत विभाग में कार्यरत सभी कच्चे कर्मचारियों को पक्का करना, सभी प्रकार के शिक्षा बजट बढ़ाना और प्राथमिक एवं सी एंड वी अध्यापकों के सामान्य अंतरजिला तबादले करना, सभी प्रकार की पदोन्नति करना, अध्यापकों को सक्षम निष्ठा ट्रेनिंग, बीएलओ रिजल्ट ऑनलाइन करना आदि में न उलझाकर शैक्षिक कार्य करने देना, वर्तमान वेतन बजट यथाशीघ्र जारी करना, एससी बीसी बीपीएल समेत बच्चों की राशियां सत्र के शुरू में ही देना आदि मांग की गई। चेतावनी दी कि यदि मांग पूरी नहीं हुई तो 15 मार्च को शिक्षा मंत्री के आवास का घेराव किया जाएगा। इस दौरान महासचिव गीतेश कुमार,राम सिंह, ईश्वर सिंह, मोहन लाल, महेंद्र कुमार व ललित कुमार आदि शामिल रहे।
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धरने की अध्यक्षता खंड प्रधान अशोक गर्ग और संचालन खंड सचिव महेश चंद ने किया। जिला प्रधान वेदपाल ने कहा कि सुलभ शिक्षा प्राप्त करना समाज की बुनियादी आवश्यकता है। इसकी पूर्ति करना सरकार का प्रथम दायित्व है, लेकिन सरकार पीछे हट रही है। क्योंकि, जनसंख्या वृद्धि के साथ-साथ जहां नए विद्यालय खोले जाने थे उसकी जगह स्कूलों को बंद किया जा रहा है। दर्जनों स्कूलों से विज्ञान संकाय को समाप्त कर दिया गया है। मुख्यमंत्री खुले मंच से सरकारी स्कूलों का प्रबंधन निजी हाथों में देने की बात करते हैं। स्कूलों में हजारों पद खाली पड़े हैं। उन पदों पर सक्षम युवाओं को लगाकर शिक्षकों का शोषण करने की तैयारी की जा रही है। शक्ति का केंद्रीयकरण करके सक्षम एनजीओ के रूप में समांतर शिक्षा चलाई जा रही है तथा अध्यापकों को पाठ्यक्रम पढ़ाने नहीं दिया जा रहा है।
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राज्य उपप्रधान हरिचन्द वर्मा ने कहा कि अध्यापक संघ ने ज्ञापन में नई पेंशन स्कीम के बजाय पुरानी पेंशन बहाल करना, स्कूलों को बंद करने की बजाय जन शिक्षा का विस्तार करना, गेस्ट टीचर्स समेत विभाग में कार्यरत सभी कच्चे कर्मचारियों को पक्का करना, सभी प्रकार के शिक्षा बजट बढ़ाना और प्राथमिक एवं सी एंड वी अध्यापकों के सामान्य अंतरजिला तबादले करना, सभी प्रकार की पदोन्नति करना, अध्यापकों को सक्षम निष्ठा ट्रेनिंग, बीएलओ रिजल्ट ऑनलाइन करना आदि में न उलझाकर शैक्षिक कार्य करने देना, वर्तमान वेतन बजट यथाशीघ्र जारी करना, एससी बीसी बीपीएल समेत बच्चों की राशियां सत्र के शुरू में ही देना आदि मांग की गई। चेतावनी दी कि यदि मांग पूरी नहीं हुई तो 15 मार्च को शिक्षा मंत्री के आवास का घेराव किया जाएगा। इस दौरान महासचिव गीतेश कुमार,राम सिंह, ईश्वर सिंह, मोहन लाल, महेंद्र कुमार व ललित कुमार आदि शामिल रहे।
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