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जब उपायुक्त कार्यालय में बोली महिलाएं कि हम घरों के अंदर भी सुरक्षित नहीं
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पलवल में जिला उपायुक्त से हाथ जोड़कर बंदरों से निजात दिलाने की अपील करते हुए दुर्गापुर गांव की मह
- फोटो : Palwal
पलवल। भैया हमें इन बंदरों से बचा लो, इन बंदरों से हम सुरक्षित नहीं है। हमारी बात कोई अधिकारी नहीं सुन रहा है। हम पहले भी शिकायत कर चुके हैं। यह कहना था शुक्रवार को जिला उपायुक्त से गांव दुर्गापुर की महिलाओं का। गांव दुर्गापुर में इन दिनों बंदरों का उत्पात बना हुआ है। आए दिन बंदर किसी न किसी को काट लेते हैं। हाल ही में बंदरों ने गांव की दो महिलाओं को काट खाया। बंदरों के उत्पात के कारण महिलाआें और बच्चाें का घर से निकलना दूभर हो गया है।
उपायुक्त से मिलने आई महिलाओं ने बताया कि बंदर छतों से होते हुए घरों में अंदर घुस आते हैं। घरों में रखे सामान को इधर-उधर फेंकना शुरू कर देते हैं तथा कोई भी उन्हें भगाने का प्रयास करता है, तो उस पर हमला बोल देते हैं। खाने के सामान व अन्य सामान पॉलीथिन व थैले छीन कर फरार हो जाते हैं। महिलाओं ने उपायुक्त से कहा कि दो दिन पहले ही गांव की ज्ञानवती को बुरी तरह से काटा है। सरपंच द्वारा भी दो बार इन बंदरों को पकड़ने के लिए ठेका छोड़ा जा चुका है। पकड़े जाने के बाद कुछ दिनों गांव में शांति रहती है लेकिन फिर से बंदरों के उत्पात शुरू हो जाता है।
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बंदरों का आतंक बना हुआ है। बंदरों से अब घर से बाहर निकलने में भी डर लगता है। घर से बाहर निकलने पर पहले इधर-उधर देखना पड़ता है कि बंदर तो नहीं बैठा है। इनसे गांव को मुक्ति दिलवाई जाए।
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- बिजेंद्री, निवासी दुर्गापुर
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मैं अपने घर पर बैठी थी, उसी समय बंदर घर में घुस आया तथा आते ही मुझ पर हमला बोल दिया। मुझे कई जगह से काट खाया है। मेरी हालत बेहद खराब है। बंदरों से अब बहुत डर लगता है।
-ज्ञानवती, निवासी दुर्गापुर
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एक तरफ गांव में बंदरों का आतंक है तो दूसरी तरफ अस्पतालों में बंदर काटने के बाद लगने वाले रैबीज के इंजेक्शन नहीं मिलते। इससे हालत और भी ज्यादा खराब हो जाती है। बंदरों से निजात दिलाई जाए।
-श्यामवती, निवासी दुर्गापुर
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गांव से बंदरों को पकड़वाया जाए तथा बाहर छुड़वाया जाए। बच्चों को छत पर व बाहर भेजने में डर लगता है। अधिकारियों को इस तरफ देखना चाहिए।
-सौमोती, निवासी दुर्गापुर
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मेरी जानकारी में महिलाओं द्वारा बंदरों की समस्या लाई है। मैंने जिला विकास पंचायत अधिकारी को आदेश दे दिए हैं कि बंदरों को पकड़वाने के लिए ठेका छुड़वाया जाए तथा बंदरों को गांवों से पकड़वाकर बाहर जंगलों में छुड़वाया जाए। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को भी अस्पतालों में रेबीज के इंजेक्शन उपलब्ध कराने के आदेश दिए जाएंगे।
- सतेंद्र तेवतिया
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उपायुक्त से मिलने आई महिलाओं ने बताया कि बंदर छतों से होते हुए घरों में अंदर घुस आते हैं। घरों में रखे सामान को इधर-उधर फेंकना शुरू कर देते हैं तथा कोई भी उन्हें भगाने का प्रयास करता है, तो उस पर हमला बोल देते हैं। खाने के सामान व अन्य सामान पॉलीथिन व थैले छीन कर फरार हो जाते हैं। महिलाओं ने उपायुक्त से कहा कि दो दिन पहले ही गांव की ज्ञानवती को बुरी तरह से काटा है। सरपंच द्वारा भी दो बार इन बंदरों को पकड़ने के लिए ठेका छोड़ा जा चुका है। पकड़े जाने के बाद कुछ दिनों गांव में शांति रहती है लेकिन फिर से बंदरों के उत्पात शुरू हो जाता है।
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बंदरों का आतंक बना हुआ है। बंदरों से अब घर से बाहर निकलने में भी डर लगता है। घर से बाहर निकलने पर पहले इधर-उधर देखना पड़ता है कि बंदर तो नहीं बैठा है। इनसे गांव को मुक्ति दिलवाई जाए।
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- बिजेंद्री, निवासी दुर्गापुर
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मैं अपने घर पर बैठी थी, उसी समय बंदर घर में घुस आया तथा आते ही मुझ पर हमला बोल दिया। मुझे कई जगह से काट खाया है। मेरी हालत बेहद खराब है। बंदरों से अब बहुत डर लगता है।
-ज्ञानवती, निवासी दुर्गापुर
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एक तरफ गांव में बंदरों का आतंक है तो दूसरी तरफ अस्पतालों में बंदर काटने के बाद लगने वाले रैबीज के इंजेक्शन नहीं मिलते। इससे हालत और भी ज्यादा खराब हो जाती है। बंदरों से निजात दिलाई जाए।
-श्यामवती, निवासी दुर्गापुर
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गांव से बंदरों को पकड़वाया जाए तथा बाहर छुड़वाया जाए। बच्चों को छत पर व बाहर भेजने में डर लगता है। अधिकारियों को इस तरफ देखना चाहिए।
-सौमोती, निवासी दुर्गापुर
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मेरी जानकारी में महिलाओं द्वारा बंदरों की समस्या लाई है। मैंने जिला विकास पंचायत अधिकारी को आदेश दे दिए हैं कि बंदरों को पकड़वाने के लिए ठेका छुड़वाया जाए तथा बंदरों को गांवों से पकड़वाकर बाहर जंगलों में छुड़वाया जाए। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को भी अस्पतालों में रेबीज के इंजेक्शन उपलब्ध कराने के आदेश दिए जाएंगे।
- सतेंद्र तेवतिया