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किसानों पर लाठीचार्ज कराने वाले एसडीएम पर मुकदमे की मांग
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पलवल। करनाल में किसानों के प्रदर्शन के दौरान एसडीएम ने लाठीचार्ज करवा दिया। इसको लेकर जिले के किसानों में भारी रोष व्याप्त है। अटोहां मोड़ पर जारी धरने में किसानों ने निंदा करते हुए एसडीएम पर कार्रवाई की मांग उठाई। वहीं तीनों कृषि कानूनों की वापसी, बिजली संशोधन विधेयक को रद्द कराने सहित अन्य मांगें उठाई गईं।
किसान नेता महेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि सरकार किसानों से बातचीत का दिखावा करके किसानों को गुमराह कर रही है। सरकार ने 9 महीने से ज्यादा लंबे किसान आंदोलन में किसानों को तमाम जुल्म ढाए हैं। इनमें लाठीचार्ज, पानी की बौछारें, आंसू गैस, सड़कों में गड्ढे खोदने व कीलें गड़ने, झूठे मुकदमे दर्ज करना, आंदोलन को हिंसक बनाने या धार्मिक रंग देने के प्रयास करना आदि शामिल हैं। फिर भी किसान आंदोलन जारी है। किसान आंदोलन ने ऐसे समय देश में प्रतिरोध की मिशाल पेश की है जब पूरा देश निरंकुश शासन के नियंत्रण में जकड़ता जा रहा है।
देश के किसान ऐसी सरकार के खिलाफ सीना तान कर खड़े हैं। लगभग विपक्ष विहीन देश, गैर जवाबदेह विधायिका, सरकारी आदेशों पर उठक-बैठक करती कार्यपालिका एवं पूंजीपतियों द्वारा नियंत्रित मीडिया के बावजूद किसान अगर लाखों की संख्या में मुजफ्फरनगर और बाद में करनाल में जुटते हैं तो यह दर्शाता है कि देश की जनता की आत्मा अभी मरी नहीं है और उसके प्रतिरोध की तासीर जिंदा है।
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किसान आंदोलन से सरकार को यह समझ लेना चाहिए कि बहुमत के आधार पर सरकारी मनमानी नहीं चल सकती। यह गांधी व भगत सिंह का देश है जो हर जोर जुल्म के खिलाफ बुरी से बुरी हालत में भी खड़ा होना जानता है। करनाल का प्रतिरोध देश की आत्मा को फिर से जागने की तस्वीर है। इस मौके पर रघुबीर सिंह, ब्रह्मसिंह छाता, राजंद्र बैंसला, रूपराम तेवतिया, रमेश गौड़ौता, किशनचंद शर्मा, कुलभानकुमार छाता आदि मौजूद रहे।
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किसान नेता महेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि सरकार किसानों से बातचीत का दिखावा करके किसानों को गुमराह कर रही है। सरकार ने 9 महीने से ज्यादा लंबे किसान आंदोलन में किसानों को तमाम जुल्म ढाए हैं। इनमें लाठीचार्ज, पानी की बौछारें, आंसू गैस, सड़कों में गड्ढे खोदने व कीलें गड़ने, झूठे मुकदमे दर्ज करना, आंदोलन को हिंसक बनाने या धार्मिक रंग देने के प्रयास करना आदि शामिल हैं। फिर भी किसान आंदोलन जारी है। किसान आंदोलन ने ऐसे समय देश में प्रतिरोध की मिशाल पेश की है जब पूरा देश निरंकुश शासन के नियंत्रण में जकड़ता जा रहा है।
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देश के किसान ऐसी सरकार के खिलाफ सीना तान कर खड़े हैं। लगभग विपक्ष विहीन देश, गैर जवाबदेह विधायिका, सरकारी आदेशों पर उठक-बैठक करती कार्यपालिका एवं पूंजीपतियों द्वारा नियंत्रित मीडिया के बावजूद किसान अगर लाखों की संख्या में मुजफ्फरनगर और बाद में करनाल में जुटते हैं तो यह दर्शाता है कि देश की जनता की आत्मा अभी मरी नहीं है और उसके प्रतिरोध की तासीर जिंदा है।
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किसान आंदोलन से सरकार को यह समझ लेना चाहिए कि बहुमत के आधार पर सरकारी मनमानी नहीं चल सकती। यह गांधी व भगत सिंह का देश है जो हर जोर जुल्म के खिलाफ बुरी से बुरी हालत में भी खड़ा होना जानता है। करनाल का प्रतिरोध देश की आत्मा को फिर से जागने की तस्वीर है। इस मौके पर रघुबीर सिंह, ब्रह्मसिंह छाता, राजंद्र बैंसला, रूपराम तेवतिया, रमेश गौड़ौता, किशनचंद शर्मा, कुलभानकुमार छाता आदि मौजूद रहे।