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Palwal News: अस्पताल की इमारत नहीं, क्वार्टरों में चल रहा डिलीवरी हट

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 17 Nov 2024 10:31 PM IST
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Delivery hut running in quarters, not hospital building
बीपी, हेपेटाइटिस या पानी की कमी जैसी कमी होने पर भी कर दिया जाता है रेफर
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राजीव पाराशर
हसनपुर। सरकार एक तरफ गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए हर महीने जांच व आंगनबाड़ी केंद्रों पर गर्भवती महिलाओं के लिए पौष्टिक आहार उपलब्ध करवा रही है। वहीं, दूसरी तरफ हसनपुर अस्पताल की इमारत का निर्माण कार्य अधर में लटका होने के कारण कर्मचारियों के लिए बनाए गए टूटे फूटे क्वार्टरों में डिलिवरी हट का कार्य चल रहा है, जिस पर प्रशासन का कोई ध्यान नहीं है। समस्या सिर्फ इमारत नहीं होने की नहीं, यहां इलाज के लिए नर्सिंग स्टाफ भी पूरी नहीं है। अस्पताल में सुविधा का अभाव इतना है कि गर्भवती को अगर बीपी, हेपेटाइटिस या पानी की कमी जैसी भी कोई परेशानी होती है या महिला की पहली डिलीवरी होती है तो उसे पलवल या होडल के लिए रेफर कर दिया जाता है। इतना ही नहीं डिलीवरी हट में दवाइयों की कमी के कारण महिलाओं को निजी स्टोर से महंगे दामों में दवाइयां खरीदनी पड़ती हैं।
उल्लेखनीय है कि होडल हसनपुर से 16 किलोमीटर व पलवल 32 किलोमीटर दूर पड़ता है। कई बार रात के समय सवारी उपलब्ध नहीं होने के कारण जच्चा बच्चा के लिए जान का खतरा तक बन जाता है। नॉर्मल डिलीवरी के दौरान पैदा होने वाले बच्चों को कोई परेशानी होती है तो नवजात बच्चों के लिए भी डिलीवरी हट में आईसीयू जैसी कोई सुविधा नहीं है। बता दें कि हसनपुर अस्पताल के डिलीवरी हट में खाक्वबी, खी,डराना, रामगढ, भैंडोली, सहनोली, जटोली, सतुआगढ़ी, लहरपुर, फाटनगर, काशीपुर, कौराली आदि दर्जनों गांवों की गर्भवती महिलाएं प्रसूति के लिए आती हैं परंतु अस्पताल में सुविधा नहीं होने से मजबूरन निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है।
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अस्पताल की डिलीवरी हट में केवल नॉर्मल डिलीवरी की सुविधा है। इमरजेंसी केसों को होडल या पलवल के लिए भेजा जाता है। - डॉ. वेद चौहान, अस्पताल के चिकित्सा अधिकारी
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ठेकेदार के बीच में ही काम छोड़कर जाने के कारण स्वास्थ्य केंद्र का कार्य लटक गया है। इस बारे में उच्च अधिकारियों को लिखकर भेजा हुआ है। नए ठेकेदार को काम सौंपने की प्रक्रिया की जा रही है। अगले वर्ष तक इसका कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा। - अनिल कुमार, कनिष्ठ अभियंता, लोक निर्माण विभाग
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